नेपाल में आई भीषण बाढ़ और मलबे की तबाही ने जहां सैकड़ों परिवारों की जिंदगी बदल दी, वहीं इस त्रासदी के बीच उम्मीद और हौसले की दो छोटी तस्वीरें भी सामने आई हैं. नुवाकोट के एक स्कूल में राहत शिविर में रह रहे 14 वर्षीय स्वास्तिक और उसकी 9 वर्षीय बहन स्वस्तिमा उन बच्चों में शामिल हैं जो मौत को बेहद करीब से देखकर लौटे हैं. बाढ़ के पहले दिन दोनों अपने माता-पिता से अलग हो गए थे, तेज बहाव और मलबे में फंस गए, घायल हुए, लेकिन हार नहीं मानी. NDTV से विशेष बातचीत में दोनों ने अपनी आपबीती सुनाई, जो इस त्रासदी के बीच साहस की मिसाल बन गई है.
'स्कूल जाते समय आया मौत का सैलाब'
नुवाकोट के एक स्कूल में बने अस्थायी राहत केंद्र में स्वास्तिक और स्वस्तिमा अपने माता-पिता के साथ शरण लिए हुए हैं. दोनों के शरीर पर चोटों के निशान साफ दिखाई देते हैं. लेकिन इन घावों से कहीं बड़ी कहानी उनके जज्बे की है.
स्वास्तिक के मुताबिक, लोग ऊंचाई की ओर भागने लगे थे. वह भी भाग रहा था, लेकिन अचानक आए तेज बहाव ने उसे अपनी चपेट में ले लिया. उसके साथ एक छोटा बच्चा भी था, जिसे बचाने की उसने भरसक कोशिश की. स्वास्तिक ने बताया 'हम उसे बचाना चाहते थे, लेकिन बाढ़ का पानी बहुत तेज था. हम खुद बह गए.'
10 मिनट तक मौत से संघर्ष
स्वास्तिक के लिए अगले कुछ मिनट जिंदगी और मौत के बीच की लड़ाई थे. वह तेज बहाव, पत्थरों, गाद और मलबे के बीच लगातार बहता रहा. वह बताता है कि कभी पानी उसे एक तरफ पटकता तो कभी दूसरी तरफ. कई बार लगा कि अब बचना मुश्किल है. शरीर में चोट लग चुकी थी और ताकत जवाब देने लगी थी, लेकिन वह लगातार संघर्ष करता रहा. उसने कहा कि 'मुझे लगा था कि शायद अब मैं इस दुनिया में नहीं रहूंगा. फिर किसी तरह मैं एक जगह फंस गया और बाद में लोग मुझे सुरक्षित स्थान पर ले आए.'
स्कूल में फंसी थी स्वस्तिमा
9 वर्षीय स्वस्तिमा अपने भाई से करीब 10 मिनट पहले स्कूल पहुंच गई थी. जब तक वह स्कूल के गेट तक पहुंची, तब तक बाढ़ का पानी परिसर में घुस चुका था. उसने मासूमियत से बताया 'टीचर ने जल्दी-जल्दी ऊपर आने को कहा. फिर गांव के लोगों ने भी मदद की और हम बच गए.'
माता-पिता तक नहीं पहुंच पा रहे थे
त्रासदी के पहले दिन दोनों बच्चों और उनके माता-पिता के लिए सबसे कठिन समय था. बाढ़ ने रास्ते बंद कर दिए थे और परिवार एक-दूसरे तक नहीं पहुंच पा रहा था. स्वास्तिक ने बताया कि उसके माता-पिता लगातार उन्हें खोजने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन तेज बहाव और टूटे रास्तों की वजह से वहां तक पहुंचना संभव नहीं था.
दर्द के बीच भी मुस्कान बरकरार
इतनी बड़ी त्रासदी झेलने के बावजूद स्वस्तिमा के चेहरे पर मुस्कान है. शायद उसे अभी भी पूरी तरह एहसास नहीं है कि वह कितनी बड़ी आपदा से बचकर निकली है. वहीं स्वास्तिक अपनी उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्व नजर आता है. जब उससे पूछा गया कि क्या वह उस दिन को भूल पाया है, तो उसने तुरंत जवाब दिया, 'नहीं, हम उसे भूल नहीं सकते. वह बहुत बड़ा सैलाब था. हमें लगा था कि हम बच नहीं पाएंगे. भगवान ने बचा लिया.'
फुटबॉलर बनने का सपना
त्रासदी ने इन बच्चों के सपने नहीं छीने हैं. बातचीत के दौरान जब स्वास्तिक से पूछा गया कि वह बड़ा होकर क्या बनना चाहता है, तो उसने बिना झिझक कहा, 'फुटबॉल प्लेयर.' उसका पसंदीदा खिलाड़ी किलियन एम्बाप्पे है. वहीं स्वस्तिमा अभी अपने भविष्य को लेकर निश्चित नहीं है, लेकिन पढ़ाई जारी रखना चाहती है.
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