- नेपाल में आई प्रलयकारी बाढ़ में अब तक 1127 लोगों की मौत की पुष्टि, लगभग 4000 लोग लापता हैं
- रिसर्च के अनुसार बाढ़ की रफ्तार 19 मीटर प्रति सेकंड थी जो उसैन बोल्ड की सबसे तेज दौड़ की स्पीड से भी दोगुनी थी
- मलबे और पानी की तेज गति के कारण बचाव के लिए रिएक्ट करने का समय बहुत कम था
नेपाल में प्रलयकारी बाढ़ को आए 7 दिन हो चुके हैं. इस भयावह आपदा ने नेपाल की रूह को छलनी कर दिया है. अबतक 1127 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. अभी भी लगभग 4 हजार लापता हैं. नेपाल से जितनी भी तस्वीरें 26 अगस्त के बाद सामने आई हैं, उन्होंने सभी को झकझोर कर रख दिया है. हर मंजर में जलप्रयल के सामने इंसानी ताकत बौना साबित दिखी हैं. एक सवाल उठ रहा था कि क्या सुनामी की तरह आईं पानी और महबे की लहरों से किसी भी तरह बचा जा सकता था. इसका जवाब एक रिसर्च में सामने आया है- और वह है नहीं!
इंसानी पैरों की कोई रफ्तार काम नहीं आती
इस आपदा को लेकर की गई शुरुआती रिसर्च में से एक के अनुसार, दुनिया का सबसे तेज इंसान भी उस भयानक बाढ़ से नहीं बच पाता, जिसने 26 अगस्त के दिन तिब्बत से निकलर नेपाल में त्राहिमाम मचा दिया था. चीनी अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (CAS) के रिसर्चर्स ने हिसाब लगाया कि जब मलबे के बहाव ने तिब्बत में ग्यिरोंग पोर्ट के चेकपॉइंट पर टक्कर मारी, तो उसकी रफ्तार 19 मीटर प्रति सेकंड की थी. यह रफ्तार उसैन बोल्ट की औसत रफ्तार से लगभग दोगुनी है, जब उन्होंने 2009 में 9.58 सेकंड का 100 मीटर का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. बाढ़ दुनिया के सबसे तेज इंसान की टॉप स्पीड से भी 50 प्रतिशत ज्यादा तेजी से आई थी. ऐसे में भला कोई भागकर अपनी जान कैसे ही बचा पाता.
"बर्फ के हिमस्खलन के होने और ग्यिरोंग पोर्ट पर उसके असर के बीच का समय बहुत कम था, और सही रिएक्शन देने का समय भी सीमित था. इससे तेजी से पहचान करने, जानकारी भेजने और आपातकालीन फैसले लेने की जरूरतें और बढ़ गईं."
रिसर्च में और क्या पता चला?
इसके अनुसार हिमालयी बॉर्डर के नेपाली हिस्से में लांगटांग लिरुंग में ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों का हिमस्खलन और मलबे का बहाव पैदा हुआ, जो तेजी से लगभग 22 किमी दूर ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंच गया और फिर नीचे की ओर बहता रहा. रिसर्चर ने हिसाब लगाया कि जब बाढ़ का पानी बॉर्डर क्रॉसिंग से 52 किलोमीटर दूर नेपाल की त्रिशूली नदी पर बने पुल तक पहुंचा, तब भी उसकी सतह की रफ्तार लगभग 11.7 मीटर प्रति सेकंड थी. इसका मतलब था कि बहाव को पुल तक पहुंचने में 46 से 75 मिनट का समय लगा.
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