- नासा का आर्टेमिस-II मिशन सफलतापूर्वक चंद्रमा के चारों ओर घूमकर पृथ्वी पर लौट रहा है
- यह मिशन पांच दशकों में पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर मानव अंतरिक्ष अन्वेषण की महत्वपूर्ण वापसी का प्रतीक है
- आर्टेमिस-II दल ने पृथ्वी से 248,655 मील की दूरी तय कर अपोलो-13 के रिकॉर्ड को पार किया है
नासा ने मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उसका आर्टेमिस-II मिशन एक अप्रैल को सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ था और अब अपनी ऐतिहासिक यात्रा के अंतिम चरण में पहुंच गया है. नासा ने अपने संदेश में कहा है कि वे अंतरिक्ष यात्रियों का फिर से पृथ्वी पर स्वागत करने का इंतजार कर रहे हैं.
नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि अंतरिक्ष यान चंद्रमा के चारों ओर घूम चुका है और अब पृथ्वी पर लौट रहा है. इसकी समुद्र में लैंडिंग (स्प्लैशडाउन) 10 अप्रैल को रात करीब 8:07 बजे (ईटी) प्रशांत महासागर में होने की उम्मीद है.
भारतीय समयानुसार ये 11 अप्रैल को सुबह 5 बजकर 37 मिनट पर सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में उतरेगा.

मिशन के दौरान पहले, चार सदस्यों वाले दल ने पृथ्वी से 248,655 मील की यात्रा करके एक नया रिकॉर्ड बनाया है. इस दल में रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल हैं. अपनी यात्रा के सबसे दूर के बिंदु पर वे लगभग 252,756 मील तक पहुंचे. यह उपलब्धि पहले अपोलो-13 मिशन के रिकॉर्ड से भी आगे निकल गई है.

अधिकारियों के अनुसार, यह 10 दिन का मिशन स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान की गहरे अंतरिक्ष में क्षमता को परखने के लिए बनाया गया है. इसमें चंद्रमा के पास से गुजरना भी शामिल था, जो भविष्य के मिशनों के लिए बहुत जरूरी कदम है.
नासा की अधिकारी डॉ. लोरी ग्लेज ने कहा कि यह सफलता दिखाती है कि एजेंसी लगातार नई सीमाओं को पार करने और अंतरिक्ष में नई खोज करने के लिए प्रतिबद्ध है. ओरियन अंतरिक्ष यान से जेरेमी हैनसन ने कहा कि यह उपलब्धि पुराने अंतरिक्ष यात्रियों की विरासत को सम्मान देती है और साथ ही अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए दौर की शुरुआत भी करती है.
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यह फ्लाईबाय विशेष रूप से रोमांचक था क्योंकि इसने चंद्रमा की सतह का एक नया और अद्भुत तस्वीर पेश की. इसने ह्यूस्टन, टैक्सास स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में मिशन कंट्रोल के नए विज्ञान दल और ‘साइंस इवैल्यूएशन रूम (एसईआर)' के संचालन का पहला परीक्षण भी किया.
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चंद्रमा की नई तस्वीरें
अपोलो मिशनों में यान चंद्रमा की सतह से लगभग 110 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा करते थे. इसके विपरीत आर्टेमिस-दो कहीं अधिक ऊंचाई यानी चंद्रमा की सतह से लगभग 6,545 किलोमीटर पर था. इस अधिक दूरी के कारण दल चंद्रमा को एक पूर्ण डिस्क के रूप में देख पाया जिसमें उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के निकट के क्षेत्र भी शामिल थे.
दल आर्टेमिस-दो विज्ञान कार्यक्रम के तहत चंद्रमा की सतह की विभिन्न भू-आकृतिक संरचनाओं की लक्षित तस्वीरें लेने में भी सक्षम रहा. इन अध्ययनों का एक प्रमुख उद्देश्य भविष्य के मिशनों, विशेष रूप से 2028 तक प्रस्तावित आर्टेमिस-चार के साथ चंद्रमा की सतह पर वापसी के लिए जानकारी उपलब्ध कराना है.

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