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धरती से अब तक सबसे दूर पहुंचा इंसान, आर्टेमिस II ने तोड़ा 54 साल पुराना रिकॉर्ड; देखा चांद का अनदेखा नजारा

अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के भूरे रंग और रहस्यमयी क्रेटरों का निरीक्षण कर रहे हैं. आर्टेमिस II के क्रू ने पृथ्वी से अब तक की सबसे लंबी दूरी 2,52,756 मील तय कर ली है. ये अपोलो 13 के 2,48,655 मील के रिकॉर्ड से अधिक है.

धरती से अब तक सबसे दूर पहुंचा इंसान, आर्टेमिस II ने तोड़ा 54 साल पुराना रिकॉर्ड; देखा चांद का अनदेखा नजारा
  • नासा के आर्टेमिस II मिशन के अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के करीब पहुंचकर सात घंटे का फ्लाईबाई शुरू कर चुके हैं
  • मिशन ने अपोलो 13 का 1970 का 2,48,655 मील का दूरी रिकॉर्ड तोड़कर 2,52,756 मील की दूरी तय की है
  • चंद्रमा का रंग पृथ्वी से देखे गए सफेद और ग्रे रंग से अलग होकर भूरे और नीले शेड्स में दिखाई दे रहा है
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अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में आज एक चैप्टर लिख दिया गया है. नासा के 'आर्टेमिस II' मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के करीब पहुंचकर अपना सात घंटे का फ्लाईबाई शुरू कर दिया है. इससे पहले क्रू को 40 मिनट तक ब्लैकआउट में रहना पड़ा था यानी इतनी देर तक पृथ्वी से उनका कनेक्शन टूटा हुआ था. इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस 'दूरस्थ हिस्से'को अपनी आंखों से देख रहे हैं, जिसे आज तक किसी इंसान ने सीधे नहीं देखा है. इस ऐतिहासिक सफर के दौरान आर्टेमिस II के क्रू ने पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड भी बना दिया है.

मिशन ने अपोलो 13 द्वारा साल 1970 में बनाए गए 2,48,655 मील की दूरी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. नासा के अनुसार, ओरियन अंतरिक्ष यान पृथ्वी से करीब 2,52,756 मील (406,771 किमी) की अधिकतम दूरी तक पहुंचा है. ये मानव इतिहास में अब तक की सबसे लंबी दूरी है.

चांद के 'असली रंगों' ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

चंद्रमा का चक्कर लगाते समय अंतरिक्ष यात्रियों ने जो देखा वह पृथ्वी से दिखने वाले सफेद और ग्रे रंग के चांद से काफी अलग है. नासा की अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पास से देखने पर चंद्रमा काफी 'ब्राउन' यानी भूरे रंग का दिखाई दे रहा है. 

कोच ने खिड़की से दिखने वाले नजारों का जिक्र करते हुए कहा, "जितना ज्यादा हम चांद को देख रहे हैं, यह उतना ही भूरा नजर आ रहा है." 

नासा की टीम के अनुसार, आंखों से दिखने वाले इन रंगों के शेड्स (भूरा और नीला) वैज्ञानिकों को चांद की सतह के खनिज संरचना और उसकी उम्र समझने में बड़ी मदद करेंगे. जैसे-जैसे क्रू अपनी रिपोर्ट भेज रहा है, नासा की साइंस टीम उसी आधार पर उन्हें नए निर्देश और गाइडेंस दे रही है ताकि चंद्रमा के रहस्यों से पर्दा उठाया जा सके.

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पिनप्रिक छेद और रहस्यमयी 'रेनर गामा' की खोज

मिशन के दौरान क्रू का ध्यान खास तौर से उन जगहों पर है जहां भविष्य में नासा के CLPS मिशन लैंड करने वाले हैं. इनमें सबसे प्रमुख है 'रेनर गामा' (Reiner Gamma), जो चांद की सतह पर एक रहस्यमयी चमकता हुआ घुमावदार हिस्सा है. वैज्ञानिक अब तक इसके बनने की सही वजह तलाश रहे हैं. 

क्रू ने 'ग्लुश्को' नामक 27 मील चौड़े क्रेटर का भी निरीक्षण किया है. इससे निकलने वाली सफेद धारियां 500 मील दूर तक फैली हुई हैं.

क्रिस्टीना कोच ने चंद्रमा के नए और चमकीले क्रेटरों की तुलना एक बेहद खूबसूरत नजारे से की. उन्होंने बताया कि ये छोटे-बड़े क्रेटर ऐसे लग रहे हैं जैसे किसी 'लैंपशेड' में बारीक सुई से छेद कर दिए गए हों और उनके भीतर से रोशनी छनकर बाहर आ रही हो. यह नजारा अंतरिक्ष यात्रियों के लिए अद्भुत और वैज्ञानिक दृष्टि से काफी अहम है.

अगले पड़ाव की ओर ओरियन 

इस मिशन में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हेंसन शामिल हैं. ओरियन यान ने शाम 7:07 बजे (ET) अपनी अधिकतम दूरी तय की. 

यह मिशन नासा के उस बड़े प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत इंसानों को न केवल चांद पर दोबारा उतारना है, बल्कि भविष्य में मंगल ग्रह जैसे गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए रास्ता तैयार करना है.

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