- नासा ने 50 वर्षों बाद चंद्रमा पर मानवयुक्त मिशन आर्टेमिस-II के लिए दो दिवसीय प्रैक्टिस काउंटडाउन शुरू किया है.
- चार अंतरिक्ष यात्रियों को संक्रमण से बचाने के लिए क्वारंटीन में रखा गया है और वे केनेडी स्पेस सेंटर जाएंगे.
- 98 मीटर ऊंचे रॉकेट में ईंधन भरने का परीक्षण सफल होने पर नासा एक सप्ताह के भीतर मिशन लॉन्च कर सकता है.
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा 1972 के अपोलो मिशन के बाद पहली बार इंसानों को चांद की ओर भेजने की तैयारी में है. अपोलो मिशन को करीब आधी सदी गुजर चुकी है और इन सालों में अंतरिक्ष यात्रा की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. जहां अपोलो मिशन के दौर में हर फैसला इंसान लेता था, वहीं अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अंतरिक्ष अभियानों की दिशा तय कर रहा है. नासा ने 50 से अधिक वर्षों के बाद चंद्रमा पर अपने पहले मानवयुक्त मिशन आर्टेमिस-II के लिए शनिवार से दो दिवसीय 'प्रैक्टिस काउंटडाउन' शुरू कर दिया है.
NASA के नए मून रॉकेट में ईंधन भरने से पहले शुरू दो दिवसीय 'प्रैक्टिस काउंटडाउन' को बेहद अहम माना जा रहा है. इसी के आधार पर यह तय होगा कि चार अंतरिक्ष यात्री चांद की परिक्रमा के लिए कब रवाना होंगे.
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अंतरिक्ष यात्रियों को किया क्वारंटीन
संक्रमण से बचने के लिए पहले से ही कमांडर रीड वाइसमैन और उनके दल को क्वारंटीन में रखा गया है. यह टीम 1972 के बाद चांद की ओर उड़ान भरने वाले पहले इंसान होंगे. रॉकेट को उड़ान के लिए हरी झंडी मिलने तक वे ह्यूस्टन स्थित अपने बेस से इस ड्रेस रिहर्सल पर नजर रखेंगे, इसके बाद केनेडी स्पेस सेंटर जाएंगे.
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पहले ईंधन भरने का होगा परीक्षण
98 मीटर ऊंचे स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट को दो हफ्ते पहले ही लॉन्च पैड पर लाया गया था. सोमवार को यदि ईंधन भरने का परीक्षण सफल रहता है तो NASA एक हफ्ते के भीतर लॉन्च की कोशिश कर सकता है. इस दौरान टीमें रॉकेट के टैंकों में 7 लाख गैलन से ज्यादा बेहद ठंडा ईंधन भरेंगी और ईंजन के शुरू होने से आधा मिनट पहले रुक जाएंगी. कड़ाके की ठंड के चलते यह अभ्यास दो दिन के लिए टाल दिए गए थे. अब 8 फरवरी सबसे पहली संभावित लॉन्च तारीख मानी जा रही है.
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10 दिन में पूरा होगा नासा का मिशन
रॉकेट के ऊपर लगे ओरियन कैप्सूल में सवार अमेरिकी और कनाडाई अंतरिक्ष यात्री चांद की परिक्रमा करेंगे और बिना रुके सीधे वापस धरती की ओर लौटेंगे. प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के साथ यह मिशन समाप्त होगा. पूरा मिशन करीब 10 दिन का होगा.
तब इंसानी भरोसा, अब AI पर भी विश्वास
1972 में अपोलो मिशन के बाद यह पहली बार होगा जब इंसान चांद के इतने करीब पहुंचेगा. फर्क सिर्फ इतना है कि तब मिशन पूरी तरह इंसानों के भरोसे था, जबकि अब AI, ऑटोनॉमस सिस्टम और एडवांस टेक्नोलॉजी अंतरिक्ष खोज की नई कहानी लिख रहे हैं. 1972 में कंट्रोल पूरी तरह से इंसानी हाथों में था और कंप्यूटर सीमित था और इस कारण जोखिम भी ज्यादा था. हालांकि आज एआई के कारण कई फैसले मशीन खुद ले सकती है. हाईटेक कंप्यूटर के कारण नेविगेशन एडवांस है और कम्युनिकेशन बेहतर है.
ऐसा रहेगा ये मिशन
- चार सदस्यीय चालक दल फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा और सबसे पहले पृथ्वी की कक्षा में एक चक्कर लगाएगा. इस दौरान लाइफ सपोर्ट सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों की जांच की जाएगी.
- पृथ्वी के करीब रहते हुए ही अंतरिक्ष यात्री उस लाइफ सपोर्ट सिस्टम के प्रदर्शन का आकलन करेंगे, जो सांस लेने योग्य हवा तैयार करने के लिए आवश्यक है.
- इसके बाद चांद के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करते हुए अंतरिक्ष यात्री ‘ट्रांस-लूनर इंजेक्शन बर्न' की कोशिश करेंगे. इस प्रक्रिया में ओरियन अंतरिक्ष यान का सर्विस मॉड्यूल अंतिम जोर देगा, जिससे यान करीब चार दिन की यात्रा पर चांद के सबसे दूर वाले हिस्से की ओर जाएगा और ‘आठ' के आकार जैसा रास्ता तय करेगा.
- इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से करीब 2 लाख 30 हजार मील से अधिक दूर पहुंचेंगे. यह उड़ान ‘फ्री-रिटर्न पाथ' पर होगी, जिससे बिना अतिरिक्त इंजन बर्न के यान खुद-ब-खुद पृथ्वी की ओर लौट सकेगा.
- उड़ान का समापन तेज गति से वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के बाद प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के साथ होगा
NASA ने 1968 से 1972 के बीच अपोलो कार्यक्रम के तहत कुल 24 अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजा था, जिनमें से 12 अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर उतरे थे.
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