- नासा ने गैलीलियो मिशन के पुराने डेटा से यूरोपा की सतह पर पहली बार अमोनिया यौगिक मिलने की पुष्टि की है
- अमोनिया की उपस्थिति यूरोपा के बर्फीले महासागर में जीवन के अनुकूल परिस्थितियों का संकेत देती है
- अमोनिया पानी के हिमांक को कम करता है और क्रायो-ज्वालामुखी विस्फोट के जरिए सतह पर पहुंचा होगा
नासा ने बताया है कि बृहस्पति के चंद्रमा 'यूरोपा' की सतह पर पहली बार अमोनिया वाली चीजें (पदार्थ) मिली हैं. यह जानकारी किसी नए मिशन से नहीं, बल्कि गैलीलियो मिशन के दशकों पुराने डेटा को फिर से गहराई से जांचने पर मिली है. वैज्ञानिकों का मानना है कि अमोनिया का मिलना इस बात का इशारा है कि यूरोपा की बर्फीली सतह के नीचे जो समंदर है, वहां जीवन पनपने के लिए सही माहौल हो सकता है. अमोनिया जीवन शुरू करने के लिए एक जरूरी चीज मानी जाती है. क्या हम इस खोज के साथ धरती के बाहर जीवन खोजने के सबसे करीब पहुंच गए हैं?
जवाब हां है पर..
इसका जवाब हां है, पर ये कहना जल्दबाजी हो सकती है कि जल्द ही इसके बारे में कुछ पक्की खबर आए. इसे नासा के बयान से समझा जा सकता है. नासा ने कहा, "अमोनिया एक नाइट्रोजन युक्त अणु है, और नाइट्रोजन - कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की तरह - जीवन के लिए महत्वपूर्ण है. यूरोपा पर इस तरह की पहली खोज के रूप में, इस बर्फीले ग्रह और इसके विशाल भूमिगत महासागर की भूविज्ञान और संभावित जीवन के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं." इस जांच में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि 1995 और 2003 के बीच, नासा के गैलीलियो अंतरिक्ष यान ने बृहस्पति सिस्टम का अध्ययन किया, और दक्षिणी कैलिफोर्निया में एजेंसी की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला के रिसर्चर अल इमरान के एक हालिया पेपर ने मिशन के नियर-इन्फ्रारेड मैपिंग स्पेक्ट्रोमीटर से प्राप्त डेटा की दोबारा जांच की.
कैसे आया अमोनिया
इसके बारे में नासा के बारे में बताया गया है, "आंकड़ों में चंद्रमा की जमी हुई सतह पर दरारों के पास अमोनिया के धुंधले संकेत छिपे हुए थे, जिनके माध्यम से घुले हुए अमोनिया यौगिकों वाले तरल पानी के ऊपर उठने की उम्मीद थी. ये यौगिक भूवैज्ञानिक रूप से हाल ही में हुए क्रायो-ज्वालामुखी विस्फोट के माध्यम से सतह तक पहुंचे होंगे. ऐसा इसलिए है क्योंकि अमोनिया पानी के हिमांक को काफी कम कर देता है, एक प्रकार के एंटीफ्रीज के रूप में कार्य करता है. अंतरिक्ष वातावरण में अमोनिया का जीवनकाल भी कम होता है. ये गुण, यूरोपा की सतह पर बड़ी दरारों और गड्ढों के पास इसकी उपस्थिति के साथ मिलकर, यह संकेत देते हैं कि अमोनिया युक्त यौगिकों को या तो चंद्रमा के उपसतह महासागर या इसकी उथली उपसतह से वहां सक्रिय रूप से पहुंचाया गया है."
क्या नीचे छिपी है 'एलियन' दुनिया?
नासा के बयान के अनुसार, इस खोज ने पूर्व अंतरिक्ष अभियानों द्वारा एकत्र किए गए पुराने डेटासेट के महत्व को बताता है. इसका उपयोग रिसर्चर्स आधुनिक विश्लेषण तकनीकों के माध्यम से नई खोजों के लिए कर सकते हैं. नासा की विज्ञान संपादकीय टीम द्वारा गुरुवार को जारी बयान में कहा गया है कि इसने यूरोपा क्लिपर मिशन के लिए एक आकर्षक लक्ष्य भी प्रदान किया है, जो अप्रैल 2030 में बृहस्पति सिस्टम पर पहुंचेगा. जाहिर है इसका मतलब अब इस पर खोज और गंभीरता से जारी होगी. नासा ये पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या बर्फीली सतह के नीचे जीवन है? क्या कोई और रहस्य वहां छिपा हुआ है? क्या उसके नीचे ही छिपी है 'एलियन' दुनिया?
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