विज्ञापन

'मिस्टर सिंह' विवाद से हर भारतीय परेशान, अमेरिकी पत्रकार ने दर्द शेयर किया तो छिड़ा महाभारत

विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ के संदर्भ की ‘हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन’ (एचएएफ) और ‘सिख कोएलिशन’ सहित प्रमुख अधिकार समूहों ने कड़ी आलोचना की है. एचएएफ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सिंह हिंदू हैं, वे सिख हैं, वे अमेरिकी हैं.'

'मिस्टर सिंह' विवाद से हर भारतीय परेशान, अमेरिकी पत्रकार ने दर्द शेयर किया तो छिड़ा महाभारत
ये तस्वीर एआई जेनरेटड है. इसमें एक सिख पग बांध रहे हैं.
  • अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह को देश छोड़ते हुए दिखाना विवाद पैदा कर रहा है
  • अमेरिका में मूल अमेरिकी आबादी लगभग 1.1 प्रतिशत है और यूरोपीय आक्रमणों के बाद उनकी संख्या में भारी गिरावट आई है
  • सिख समुदाय और अधिकार समूहों ने इस विज्ञापन की कड़ी आलोचना की और मामले की जांच की मांग की है

अमेरिका में मिस्टर सिंह विवाद बढ़ता जा रहा है. अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग के उस विज्ञापन पर विवाद बढ़ गया है, जिसमें ‘मिस्टर सिंह' को खुद देश छोड़ते दिखाया गया है. अब इस पर एक अमेरिकी भारतीय वंशज पत्रकार ने ट्वीट कर अपना दर्द शेयर किया तो सोशल मीडिया पर भी महाभारत छिड़ गया.

किस ट्वीट पर विवाद

Fox7Austin चैनल के एंकर एलेक नोलन ने आज ट्वीट कर बताया, 'मेरे दादाजी का नाम दान सिंह था. उनके पिता कथा सिंह बेहतर जिंदगी की तलाश में दशकों पहले भारत से अमेरिका आए थे. वे कैलिफ़ोर्निया में किशमिश उगाने वाले किसान बन गए. बाद में मेरे दादाजी ने परिवार का कारोबार संभाला और ट्रक ड्राइवर के तौर पर भी काम किया.' फिर उन्होंने अमेरिकी गृह विभाग का ट्वीट शेयर करते हुए लिखा, 'यह पोस्ट नस्लवादी है और 'सिंह' सरनेम वाले किसी भी व्यक्ति का अपमान करती है.'

एलेक के इस ट्वीट पर हजारों ट्वीट आ चुके हैं और लगभग गाली-गलौज कर रहे हैं. भारतवंशियों से अमेरिका छोड़कर जाने को कहा जा रहा है. कई तो उससे भी गंदी भाषा में एलेक और उनके जैसे तमाम भारतवंशियों को मूल अमेरिकियों की नौकरी खाने वाला बता रहे हैं. यह अलग बात है कि अमेरिका में खुद को मूल अमेरिकी बताने वाले भी मूल अमेरिकी नहीं हैं और वो भी यूरोप के अन्य देशों से अमेरिका में रहने आए थे.

पर असली अमेरिकी तो कोई और

1492 में स्पेन की ओर से क्रिस्टोफर कोलंबस अमेरिका पहुंचा, तो उसे लगा कि वह भारत पहुंच गया है. इसी भ्रम के कारण उसने वहां के स्थानीय लोगों को 'इंडियंस' कहा, जिन्हें बाद में 'रेड इंडियंस' भी कहा जाने लगा.ये लोग हज़ारों साल पहले (बर्फ युग के दौरान बेरिंग स्ट्रेट के रास्ते) एशिया से आकर उत्तर और दक्षिण अमेरिका महाद्वीपों में बसे थे. उत्तर अमेरिका में चेरोकी, नवाहो, सिउक्स, अपाचे और दक्षिण अमेरिका में माया, इंका और एज़्टेक जैसी समृद्ध सभ्यताएं फल-फूल रही थीं. फिर कोलंबस के आने के बाद 1500 से 1600 के बीच मध्य व दक्षिण अमेरिका में एज़्टेक और इंका साम्राज्यों को जीतकर स्पेन और पुर्तगाल ने अपना गुलाम बना लिया. फिर 1607 में ब्रिटेन भी पहुंचा.

फिर 1754-1763 के बीच अमेरिका पर कब्जे को लेकर ब्रिटेन और फ्रांस में युद्ध भी हुआ.  यूरोपीय लोगों के साथ आई चेचक, खसरा और फ्लू जैसी बीमारियों से मूल निवासियों की लगभग 80% से 90% आबादी खत्म हो गई, क्योंकि उनमें इन बीमारियों के प्रति रोग-प्रतिरोधक क्षमता नहीं थी. बंदूक और बारूद की ताकत तथा भूमि समझौतों के जरिए मूल निवासियों को उनकी पैतृक जमीनों से खदेड़कर पश्चिमी बंजर इलाकों में सीमित कर दिया गया.आज भी ये अमेरिका में हैं, लेकिन इनकी आबादी कुल अमेरिका की लगभग 1.1 प्रतिशत है. 

कहां से शुरू हुआ विवाद

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने बिना लाइसेंस वाले कमर्शियल ड्राइवरों के खिलाफ अपने अभियान के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स' पर कृत्रिम मेधा (एआई) से तैयार तस्वीरों का इस्तेमाल किया जिसमें भूरी दाढ़ी वाले एक व्यक्ति को दिखाते हुए संदेश लिखा गया है-‘‘हमारी सड़कों से दफा हो जाओ, ‘मिस्टर सिंह' आपको वाहन चलाना नहीं आता.'' ‘एक्स' पर पोस्ट किए गए एक अन्य वीडियो में ‘ट्रांसफॉर्मर्स' (जानी मानी अमेरिकन-जापानी फिल्म) के मुख्य खलनायक किरदार ‘मेगाट्रॉन' को ‘एलियंस' की रिहाई के लिए बातचीत करते दिखाया गया है. अमेरिकी प्रशासन विदेशी नागरिकों के लिए “एलियंस” शब्द का इस्तेमाल करता है. वीडियो में ‘मेगाट्रॉन' सड़क दुर्घटनाओं और अन्य अपराधों में शामिल ट्रक चालकों हरजिंदर सिंह, राजविंदर कुमार, बेकझान बेशेकीव, अखरोर बोजोरोव और जसवीर सिंह की रिहाई की मांग करता नजर आ रहा है.

गृह सुरक्षा विभाग ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अगर आप इस देश में शत्रुतापूर्ण इरादे से कदम रखते हैं, तो यह जान लें कि हम अपनी रक्षा करेंगे. हम अमेरिकी मूल्यों की रक्षा करेंगे. हम अपने देश की रक्षा करेंगे.” एक अन्य पोस्ट में ‘ट्रांसफॉर्मर्स' के मुख्य नायक ‘ऑप्टिमस प्राइम' को गृह सुरक्षा विभाग का पहचान-चिह्न बाजू पर पहने हुए दिखाया गया है. वह भूरे रंग की दाढ़ी वाले व्यक्ति से कहता है- ‘खुद देश छोड़कर चले जाओ, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो.' 

सिख समुदाय हुआ एकजुट

विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह' के संदर्भ की ‘हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन' (एचएएफ) और ‘सिख कोएलिशन' सहित प्रमुख अधिकार समूहों ने कड़ी आलोचना की है. एचएएफ ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सिंह हिंदू हैं, वे सिख हैं, वे अमेरिकी हैं और वे गाड़ी चलाते हैं. गृह सुरक्षा विभाग की ओर से की जा रही नस्लीय और भारतीय-विरोधी पहचान के आधार पर निशाना बनाने और उपहास की इस कोशिश के खिलाफ देश को एक साथ खड़े होना चाहिए और आवाज उठानी चाहिए.'' एचएएफ ने सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों और एफबीआई निदेशक काश पटेल को सलंग्न करते हुए कहा, ‘‘यह एक संघीय एजेंसी की ओर से की गई भेदभावपूर्ण पोस्ट है, जो महज राजनीतिक संदेशबाजी से कहीं आगे की बात है. हम चाहते हैं कि इस मामले की जांच की जाए.''

‘सिख कोएलिशन' ने ‘एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ‘‘9/11 के 25 साल बाद भी, सिखों को उनके पहनावे और रूप-रंग के कारण निशाना बनाया जा रहा है.'' सिख संगठन ने कहा, ‘‘अमेरिका में रहने वाले लाखों सिखों का उपनाम ‘सिंह' है, जिसका अर्थ शेर होता है। हम सिख के रूप में अपनी पहचान जाहिर करने से नहीं डरते-भले ही हमारी अपनी सरकार हमें दुश्मन के रूप में पेश करे.'' यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब गृह सुरक्षा विभाग अपने ‘सीबीपी होम' कार्यक्रम के प्रचार अभियान में जुटा है। इस कार्यक्रम के तहत वे प्रवासी स्वेच्छा से अमेरिका से जाने के लिए अपना पंजीकरण करा सकते हैं जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं. गृह सुरक्षा विभाग के मुताबिक, स्वेच्छा से देश छोड़ने के लिए पंजीकरण कराने वाले लोगों को यात्रा की व्यवस्था में सहायता के साथ 2,600 अमेरिकी डॉलर की प्रोत्साहन राशि भी दी जा सकती है.

यह भी पढ़ें-

पुतिन सुबह आ रहे दिल्ली, सुखोई 57 पर डील की कितनी संभावना-EX मेजर जनरल ने बताया

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Mr Singh, Mr Singh Advertisement US, US Indian, Us Indian Relations, US Indian Deportation
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com