- मिडिल ईस्ट में 74 दिनों से जारी युद्ध के कारण होर्मुज के जरिये कच्चे तेल की सप्लाई में भारी बाधा आई है.
- यूएई के इंडस्ट्री मंत्री के अनुसार इस अवधि में लगभग 100 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई ब्लॉक हो चुकी है.
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से वैश्विक बाजार में पहले से ही एक अरब बैरल की तेल की कमी उत्पन्न हो गई है.
मिडिल ईस्ट में पिछले 74 दिनों से जारी युद्ध और गतिरोध का असर अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार पर गहराता जा रहा है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के इंडस्ट्री और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी मंत्री Dr. Sultan Al Jaber के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की वजह से पिछले 74 दिनों के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिये कार्गो जहाजों की आवाजाही बाधित होने की वजह से 100 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई ब्लॉक हुई है.
सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर जारी एक बयान में UAE के इंडस्ट्री मंत्री Dr. Sultan Al Jaber ने मंगलवार को यह चौंकाने वाले आंकड़े जारी करते हुए कहा, "होर्मुज़ के बंद होने के कारण दुनिया में पहले से ही 1 बिलियन बैरल की कमी है. 1 अरब बैरल. यही है जबरन वसूली का गणित. हर दिन जलडमरूमध्य को बंधक बना लिया जाता है, लागत बढ़ जाती है... परिवारों, खेतों, दुनिया भर में कारखाने और अर्थव्यवस्थाएँ. नेविगेशन की स्वतंत्रता लौटाएँ. कोई शर्त नहीं. देरी नहीं".
इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने कहा था की मध्य पूर्व एशिया में युद्ध के पहले 50 दिनों के दौरान लगभग 60 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई ब्लॉक हुई थी. UAE सरकार ने मांग की है कि अमेरिका और ईरान तत्काल प्रभाव से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को पूरी तरह से खोल दें. उसके मुताबिक स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ खतरे के माहौल में काम नहीं कर सकता. इसके ज़रिये जहाजों को सेफ पैसेज देने के लिए पेमेंट माँगना "protection racket" के समान है. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पूरी दुनिया का है. इसे दुनिया को वापस लौटाया जाना चाहिए. ठीक उसी रूप में जैसा वह पहले था.
दरअसल, मध्यपूर्व एशिया में जारी संकट के दौरान ना सिर्फ कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है, बल्कि उसकी कीमतें बढ़ी है और उसका प्रोडक्शन भी घट गया है. इसकी वजह से गल्फ देशों की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ रहा है.
ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स के लिए सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ बाधित होने से अंतर्राष्ट्रीय तेल और गैस मार्किट में अनिश्चितता फिर बढ़ने लगी है. मंगलवार को ब्रेंट ऑयल futures की कीमत ट्रेडिंग के दौरान करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के कुछ ऊपर पहुंच गयी. पिछले 24 घंटे में कच्चे तेल की कीमत करीब 3.50% तक बढ़ गई है.
इस रूट से दुनिभर के तेल बाज़ारों में 20% कच्चा तेल पहुँचता है, लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को लेकर जारी टकराव की वजह से तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह से बाधित हो रही है. इसका सबसे ज्यादा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है जो अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चे तेल के आयात पर निर्भर हैं.
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