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मिडिल ईस्ट संकट से 100 साल पुराना कानून बदलने पर मजबूर हुआ अमेरिका, तेल की कीमतें काबू करने की कोशिश

मिडिल ईस्ट संकट और महंगे तेल के कारण अमेरिका को 100 साल पुराने ‘जोंस एक्ट’ कानून में अस्थायी छूट देनी पड़ी. यह कानून घरेलू तेल ढुलाई महंगी बनाता है. छूट के बाद विदेशी जहाज भी अमेरिकी बंदरगाहों के बीच तेल ला सकेंगे.

मिडिल ईस्ट संकट से 100 साल पुराना कानून बदलने पर मजबूर हुआ अमेरिका, तेल की कीमतें काबू करने की कोशिश
  • जोंस एक्ट के तहत अमेरिका में एक बंदरगाह से दूसरे तक तेल केवल अमेरिकी जहाजों से ही ले जाया जा सकता है.
  • इस कानून के कारण अमेरिका में जहाज निर्माण और तेल शिपिंग अन्य देशों की तुलना में चार गुना महंगा होता है.
  • मिडिल ईस्ट तनाव और होर्मुज की खाड़ी पर असर से तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं.
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नई दिल्ली:

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान‑इजरायल‑अमेरिका टकराव के बीच अमेरिका को अपना 100 साल पुराना 'जोंस एक्ट' (Jones Act) कानून अस्थायी रूप से बदलना पड़ा है. यह वही कानून है जिसकी वजह से अमेरिका के भीतर ही तेल ढोना बेहद महंगा पड़ता है.

क्या है जोंस एक्ट?

जोंस एक्ट के मुताबिक, अमेरिका के एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक तेल या सामान लाने‑ले जाने के लिए सिर्फ अमेरिकी जहाज ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं. यानी जहाज अमेरिका में बना हो. मालिक अमेरिकी हो और क्रू भी अमेरिकी ही हो. यही वजह है कि अमेरिका में जहाज बनाना और ऑयल शिपिंग दूसरे देशों की तुलना में लगभग चार गुना महंगा है.

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टेक्सास से न्यूयॉर्क तेल भेजना महंगा, अफ्रीका से सस्ता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में होने के बावजूद अमेरिका के सामने बड़ी समस्या यह है कि घरेलू तेल ढोना बहुत महंगा पड़ता है. ऐसा कई बार होता है कि न्यूयॉर्क में टेक्सास की तुलना में पश्चिमी अफ्रीका से तेल खरीदना सस्ता होता है. यह सारी समस्या Jones Act की वजह से ही है. 

मिडिल ईस्ट युद्ध ने दबाव बढ़ाया

ईरान‑इजरायल तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल की सप्लाई बाधित हुई है. होर्मुज की खाड़ी पर असर पड़ा है और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं हैं. इससे अमेरिका में पेट्रोल 60 सेंट तक महंगा हो गया. ऐसे में ट्रंप प्रशासन को मजबूरी में Jones Act को 30 दिनों के लिए ढीला करना पड़ा, ताकि विदेशी जहाज अमेरिका के भीतर भी तेल ढो सकें. इससे सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर लगाम लगाने में ट्रंप प्रशासन को कुछ राहत मिलेगी. 

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इस फैसले से क्या होगा?

Jones Act में छूट मिलते ही अमेरिकी बाजार में विदेशी जहाजों की एंट्री होगी. शिपिंग का खर्च कम होगा. समय तेजी से बचेगा और तेल की कीमतों को काबू में लाने में मदद होगी.

अमेरिका में ही विरोध शुरू

हालांकि जोन्स एक्ट पर ढील देने का फैसला अमेरिका के भीतर भी इतना स्वागतयोग्य नहीं है. अमेरिका के जहाज बनाने वाले उद्योग और समुद्री यूनियनों ने इस फैसले का विरोध किया है. उनका कहना है कि इससे अमेरिकी नौकरियों को नुकसान होगा. घरेलू शिपिंग उद्योग कमजोर पड़ेगा. लेकिन अभी प्रशासन की प्राथमिकता महंगाई पर काबू पाना है, क्योंकि युद्ध के बीच तेल की कीमतें अमेरिका में लोगों की जेब पर सीधा असर डाल रही हैं.

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