मेक्सिको में साल 2026 में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) के बीच देश की शिक्षा विभाग को अपने एक बड़े फैसले से कदम पीछे खींचने पड़े हैं. वर्ल्ड कप की तैयारियों और चिलचिलाती गर्मी को देखते हुए स्कूलों को जल्दी बंद करने का जो प्लान बनाया गया था, उसे अब भारी विरोध के बाद रद्द कर दिया गया है. यानी अब मेक्सिको के छात्र फुटबॉल के दीवानेपन के बीच अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं करेंगे और स्कूल कैलेंडर पहले की तरह ही चलेगा.
इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि वर्ल्ड कप के दौरान भी स्कूलों में क्लासेज सामान्य रूप से चलती रहेंगी. अभिभावकों और शिक्षाविदों की नाराजगी के बाद सरकार ने यह फैसला पलटा है.
क्या था सरकार का शुरुआती प्लान?
दरअसल, शिक्षा मंत्री मारियो डेलगाडो ने पहले प्रस्ताव रखा था कि साल 2025-26 के शैक्षणिक सत्र को निर्धारित समय से काफी पहले यानी 5 जून को ही खत्म कर दिया जाए. मूल रूप से स्कूल 15 जुलाई को बंद होने थे.
हालांकि, जैसे ही यह खबर बाहर आई, अभिभावकों में हलचल मच गई. परिवारों का तर्क था कि अचानक स्कूल कैलेंडर बदलने से उनका डेली रूटीन और बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होगी. कई लोगों ने इसे खेल के लिए शिक्षा की बलि चढ़ाने जैसा बताया.
राष्ट्रपति के दखल के बाद बदला फैसला
विवाद बढ़ता देख मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने इस मामले में दखल दिया. शिक्षा मंत्री मारियो डेलगाडो ने सोमवार को घोषणा की कि राष्ट्रपति की अपील और लाखों परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अब कैलेंडर में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. संघीय शिक्षा मंत्रालय और राज्य अधिकारियों ने सर्वसम्मति से फैसला किया है कि 185 दिनों का वर्किंग कैलेंडर बरकरार रहेगा और स्कूल अपनी तय तारीख यानी 15 जुलाई को ही खत्म होंगे.
सरकार ने साफ किया कि इस फैसले से परिवारों को अनिश्चितता के माहौल से राहत मिलेगी. जो लोग वर्ल्ड कप और स्कूल की छुट्टियों के बीच तालमेल बिठाने को लेकर चिंतित थे, अब वे अपना रूटीन पहले की तरह प्लान कर सकते हैं.
राज्यों को दी गई थोड़ी ढील
भले ही पूरे देश के लिए कैलेंडर को यथावत रखा गया है, लेकिन सरकार ने एक "बैकअप प्लान" भी रखा है. अधिकारियों ने कहा है कि अगर वर्ल्ड कप के दौरान किसी विशेष शहर में भीड़ बहुत बढ़ जाती है या फिर गर्मी बर्दाश्त से बाहर हो जाती है, तो राज्य सरकारें स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे बदलाव कर सकती हैं. इसे 'असाधारण परिस्थिति' माना जाएगा और इसके लिए केंद्र से विशेष अनुमति की जरूरत नहीं होगी.
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