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अफ्रीका का यह गरीब मुस्लिम देश 14 साल से रोज मर रहा, तख्तापलट, जिहादी अटैक और अब रक्षा मंत्री की मौत

Mali Violence History: कार ब्लास्ट में रक्षा मंत्री की हत्या के बाद संकट में माली की सैन्य सरकार, प्रमुख शहर पर भी तुआरेग विद्रोहियों का 'कब्जा'

अफ्रीका का यह गरीब मुस्लिम देश 14 साल से रोज मर रहा, तख्तापलट, जिहादी अटैक और अब रक्षा मंत्री की मौत
Mali Violence History: माली में विद्रोहियों और सैन्य सरकार के बीच हिंसा चरम पर पहुंची

Mali junta crisis after Defence Minister killed: अफ्रीका के बेहद गरीब मुस्लिम देश माली की सैन्य सरकार के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है. यहां जिहादी लड़ाकों और अलगाववादी विद्रोहियों के देशभर में एक साथ किए गए हमलों में रक्षा मंत्री की मौत हो गई है. इतना ही नहीं खबर यह भी है कि उत्तरी माली का एक अहम शहर विद्रोहियों के कब्जे में चला गया है. इन हमलों के बाद से सेना के प्रमुख जनरल असिमी गोइता की तरफ से कोई बयान नहीं आया है और उन्हें शनिवार सुबह से शुरू हुए हमलों के बाद से कहीं देखा भी नहीं गया है.

चलिए आपको बताते हैं कि हमला किसने किया है और यह देश कैसे पिछले 14 साल से संकट से जूझ रहा है?

अभी माली में क्या चल रहा?

यह हमला तुआरेग विद्रोहियों के संगठन अज़ावाद लिबरेशन फ्रंट (FLA) और जिहादी संगठन ग्रुप फॉर द सपोर्ट ऑफ इस्लाम एंड मुसलिम्स (JNIM) ने मिलकर किया है. इन लोगों ने देश के कई इलाकों को निशाना बनाया. एक्सपर्सट्स का कहना है कि ये एक साथ किए गए हमले 2012 के मार्च के हमलों के बाद सबसे बड़ी चुनौती हैं, जिन्हें उस समय फ्रांस की सेना की मदद से रोका गया था. बाद में फ्रांसीसी सेना वहां से चली गई थी. सरकारी सेना अभी भी देश के कुछ हिस्सों में लड़ाई कर रही है, लेकिन शनिवार को रक्षा मंत्री सादियो कामारा की मौत सरकार के लिए बड़ा झटका है.

सादियो कामारा, उनकी दूसरी पत्नी और उनके दो पोते उनके घर पर हुए कार बम हमले में मारे गए. यह जानकारी उनके परिवार और एक अधिकारी ने दी है. रविवार को भी कई जगहों पर लड़ाई जारी रही, जिनमें काती, उत्तर के शहर किदाल और गाओ, और मध्य माली का सेवेरे शामिल हैं.

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14 साल से संकट से जूझता माली

 माली एक दशक से ज्यादा समय से सुरक्षा संकट से जूझ रहा है. माली 2012 से अलकायदा और इस्लामिक स्टेट ग्रुप से जुड़े समूह और कम्युनिटी बेस्ड आपराधिक समूह और अलगाववादियों के हमलों की वजह से सुरक्षा संकट से जूझ रहा है. अलगाववादी उत्तरी माली में एक स्वतंत्र देश बनाने के लिए सालों से लड़ रहे हैं, जबकि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट-गठबंधन वाले आतंकवादी एक दशक से अधिक समय से सरकार से लड़ रहे हैं.

माली में सेना ने 2020 और 2021 में दो बार तख्तापलट करके यहां की सत्ता पर कब्जा कर लिया. यह सैन्य सरकार अपने पड़ोसी देशों, नाइजर और बुर्किना फासो की तरह ही रूस के साथ राजनीतिक और सैन्य संबंध मजबूत कर रही है, लेकिन उसने अपने पूर्व औपनिवेशिक शासक फ्रांस और कई पश्चिमी देशों से दूरी बना ली है.

रूस का वैगनर ग्रुप 2021 से इस्लामिक स्टेट ग्रुप के खिलाफ लड़ाई में माली की सेना की मदद कर रहा था. वैगनर ग्रुप ने जून 2025 में अपना मिशन खत्म करने का ऐलान किया. इसके बाद अफ्रीका कॉर्प्स ने वैगनर की जगह ली. अफ्रीका कॉर्प्स रूसी रक्षा मंत्रालय के सीधे कंट्रोल में एक संगठन है. जुंटा ने आलोचकों पर कार्रवाई की और राजनीतिक पार्टियों को खत्म कर दिया. जुंटा का अर्थ सैन्य अधिकारियों के एक ऐसे समूह से है जो तख्तापलट या जबरन सत्ता हथियाने के बाद किसी देश पर शासन करता है.

माली के जुंटा ने मार्च 2024 तक आम लोगों को सत्ता सौंपने का वादा किया था, लेकिन जुलाई 2025 में, इसने गोइटा को बिना चुनाव के पांच साल का राष्ट्रपति का कार्यकाल दिया. वह जितनी बार चाहें इसे रिन्यू कर सकते हैं.

एक बड़े शहर पर विद्रोहियों का कब्जा

तुआरेग विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने समझौता किया है, जिसके तहत माली की सेना का समर्थन कर रही रूसी अफ्रीका कॉर्प्स की सेना किदाल शहर से हट गई है. विद्रोहियों ने दावा किया कि अब किदाल पूरी तरह उनके नियंत्रण में है. माली की सेना ने नवंबर 2023 में रूसी वैगनर समूह की मदद से किदाल शहर को विद्रोहियों से वापस लिया था. यह शहर लंबे समय तक तुआरेग विद्रोहियों के कब्जे में था.

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