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एक ट्रेन, 24 घंटे का सफर, 8 फ्रेंच और 8 जापानी राइटर, और एक 'Mission Impossible'

जापान की एक शानदार लग्जरी मिजुकाजे ट्रेन में 16 लेखक सवार हुए हैं और उन्हें 24 घंटे के सफर में आपस में मिलकर एक मिशन को अंजाम देना है. आधे लेखक फ्रेंच हैं तो आधे जापानी. आधे को आधे की बात समझ नहीं आती लेकिन मिलकर काम नहीं किया तो मिशन पूरा ही नहीं होगा.

एक ट्रेन, 24 घंटे का सफर, 8 फ्रेंच और 8 जापानी राइटर, और एक 'Mission Impossible'
जापान की एक शानदार मिजुकाजे ट्रेन में 16 लेखक सवार हुए हैं (फोटो- AFP)

16 लेखक गुरुवार को जापान के फेमस शहर क्योटो में एक लग्जरी ट्रेन में सवार हुए. इनमें से 8 फ्रेंच भाषा के लेखक हैं और 8 जापानी भाषा के. इनके सामने एक अनोखा काम है. उन्हें 24 घंटे से भी कम समय में मिलकर एक उपन्यास (नोबेल) लिखना है. खुद इसमें सवार लेखक इसे बिल्कुल पागलपन भरा प्रोजेक्ट बता रहे हैं. हर लेखक के पास एक किरदार है और उस किरदार के बारे में हर दूसरा लेखक जानता है. चलिए आपको बताते हैं इस मिशन इम्पॉसिबल के बारे में.

200 पन्नों की कहानी और 24 घंटे का सफर

यह प्रोजेक्ट 'एल'एक्रित्यूर एन मूवमों' यानी 'राइटिंग इन मोशन' नाम के एक फ्रेंच संगठन का है, जो साहित्यिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है. इन लेखकों में म्यूरियल बारबेरी भी शामिल हैं. यह सभी लेखक शानदार, गहरे हरे रंग की मिजुकाजे ट्रेन में सवार हैं जो 'आर्ट डेको' शैली में बनी है. यह ट्रेन ज शुक्रवार को जापान के पश्चिमी शहर मात्सुए पहुंचेगी, तब तक यह सभी लेखक 200 पन्नों की एक कहानी पूरी कर लेने की उम्मीद कर रहे हैं.

जापानी लेखक तोह एनजो क्योटो से मात्सुए तक चलने वाली ट्वाइलाइट एक्सप्रेस मिज़ुकेज़ पर काम करते हुए (फोटो- AFP)

जापानी लेखक तोह एनजो क्योटो से मात्सुए तक चलने वाली ट्वाइलाइट एक्सप्रेस मिज़ुकेज़ पर काम करते हुए (फोटो- AFP)

न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार बारबेरी ने कहा, "यह एक बिल्कुल पागलपन भरा प्रोजेक्ट है. एक मशहूर ट्रेन में एक साथ आना, जहां 16 अलग-अलग आवाजों को मिलकर एक सुसंगत और अर्थपूर्ण कहानी बनानी है."

बारबेरी अंग्रेजी भाषी दुनिया में मुख्य रूप से अपने 2006 के उपन्यास 'द एलिगेंस ऑफ द हेजहॉग' के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने आगे बताया, "हममें से हर एक को एक किरदार की जीवनी दी गई थी- एक ऐसा व्यक्ति जिसे बाकी सभी किरदार जानते हैं, और उसी की वजह से वे सभी एक ही ट्रेन में सवार हुए हैं."

'राइटिंग इन मोशन' द्वारा आयोजित यह इस तरह का दूसरा प्रोजेक्ट है. पहला प्रोजेक्ट 2015 में कनाडा में हुआ था, जिसमें स्थानीय कनाडाई लेखकों और फ्रेंच लेखकों को एक साथ लाया गया था.

कैसे लिखा जाएगा उपन्यास

यात्रा शुरू होने से पहले ही कहानी की मुख्य थीम और रूपरेखा पर चर्चा कर ली गई थी. कहानी का प्लॉट खुद मिजुकाजे ट्रेन के अंदर ही सेट है. यह प्लॉट जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे आकार लेता जाएगा. फ्रेंच लेखक क्रिस्टोफ ओनो-दित-बियोट ने कहा कि ट्रेन के बाहर के नजारे, जहां धान के खेत और जापान की खास वास्तुकला दिखाई देती है, स्वाभाविक रूप से उनकी लिखी जा रही कहानी का हिस्सा बन जाएंगे.

फ्रांसीसी उपन्यासकार म्यूरियल बारबेरी ट्रेन पर काम करती हुईं (फोटो- AFP)

फ्रांसीसी उपन्यासकार म्यूरियल बारबेरी ट्रेन पर काम करती हुईं (फोटो- AFP)

आधे लेखक फ्रेंच बोलते हैं और आधे जापानी. तो ऐसे में उनके बीच बातचीत सही से हो सके, यह सुनिश्चित करने के लिए दुभाषिए मौजूद हैं.

यह प्रोजेक्ट "ओलिपो" की परंपरा के हिसाब से है. ये 1960 में शुरू हुआ एक ग्रुप था जिसमें ज्यादातर फ्रेंच लेखक थे जो नई तरह की लिखावट के लिए अपने ऊपर कुछ नियम लगाते थे. इस ग्रुप के सबसे जाने-माने सदस्यों में जॉर्ज पेरेक और इटली के लेखक इटालो काल्विनो शामिल हैं. ओलिपो के अध्यक्ष हर्वे ले टेलियर ने कहा, "अकेले जिमनास्टिक करना और सबके साथ मिलकर करना एक जैसा नहीं है. हम जो कर रहे हैं वो थोड़ा सिंक्रोनाइज्ड स्विमिंग जैसा है."

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