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This Article is From Jun 06, 2012

भावी चीनी प्रधानमंत्री से मिले कृष्णा, द्विपक्षीय सम्बंधों पर चर्चा

बीजिंग: चीन में होने वाले नेतृत्व परिवर्तन के बीच विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने बुधवार को वहां के भावी प्रधानमंत्री ली केकियांग से मुलाकात कर कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। ली फिलहाल उप प्रधानमंत्री हैं और अगले वर्ष प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ का स्थान लेने वाले हैं।

दोनों देशों ने उम्मीद जताई कि चीन में बदलाव के बाद भी द्विपक्षीय सम्बंधों में मजबूती आएगी। वहीं, भारत ने आधारभूत संरचना में चीन के और अधिक निवेश के लिए आवाज उठाई।

कृष्णा और ली ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के दौरान ग्रेट हाल ऑफ द पीपुल में मुलाकात की। ली के साथ बातचीत के बाद कृष्णा ने भारतीय पत्रकारों से कहा, "हमारी चर्चा में मुख्य रूप से भविष्य में द्विपक्षीय सम्बंध शामिल थे। भारत, चीन के साथ सहयोग बढ़ाने को बहुत महत्व व शीर्ष वरीयता देता है।" उन्होंने कहा, "इस देश के साथ हमारे मजबूत सम्बंध हैं। भारत सरकार और भारतीय लोगों की इच्छा चीन के साथ बेहतर सम्बंध बनाने की है।"

ली को चीन की अर्थव्यवस्था के निर्धारण में महत्वपूर्ण व्यक्ति करार देते हुए कृष्णा ने कहा कि चीन के उप प्रधानमंत्री ने भारत-चीन सम्बंध और अगले दशक में दोनों देशों के आपसी सम्बंधों पर अपने विचार व्यक्त किए।

कृष्णा ने ली को भारत भी आमंत्रित किया, जो वर्ष 1985 में युवा कम्युनिस्ट कार्यकर्ता के रूप में नई दिल्ली पहुंचे थे।

चीन के साथ द्विपक्षीय सम्बंधों में व्यापार व निवेश को बेहद महत्वपूर्ण करार देते हुए कृष्णा ने भारत के आधारभूत संरचना के क्षेत्र में चीनी निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर भी चिंता जताई। द्विपक्षीय व्यापार 74 अरब डॉलर का है और भारत का व्यापार घाटा 27 अरब डॉलर का है। ली ने हालांकि कृष्णा को आश्वस्त किया कि चीन सरकार भारत में चीनी निवेश, खासकर आधारभूत संरचना के क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करेगी।

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