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ब्रिटिश संसद में गूंजा 'कामसूत्र'... प्रधानमंत्री स्टार्मर के मुंह से निकली ऐसी बात कि सन्न रह गए सांसद

हाउस ऑफ कॉमन्स में हुए इस वाकयुद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्टार्मर सरकार पर अपनी विश्वसनीयता साबित करने का भारी दबाव है. नीतिगत विफलताओं और विवादास्पद बयानों के बीच, मतदाताओं में सरकार की कार्यक्षमता को लेकर संदेह बढ़ रहा है.

ब्रिटिश संसद में गूंजा 'कामसूत्र'... प्रधानमंत्री स्टार्मर के मुंह से निकली ऐसी बात कि सन्न रह गए सांसद
  • ब्रिटेन के PM कीर स्टार्मर ने हाउस ऑफ कॉमन्स में विपक्ष की पद बदलने वाली नीतियों पर विवादास्पद टिप्पणी की.
  • प्रधानमंत्री के कटाक्ष से सदन में असहजता और सन्नाटा छा गया, जिसे पद की गरिमा के खिलाफ माना गया.
  • आलोचक और राजनीतिक विश्लेषक इस टिप्पणी को स्टार्मर के नेतृत्व की कमजोरियों और जनता से दूरी का संकेत मानते हैं.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर  स्टार्मर को हाउस ऑफ कॉमन्स में एक विवादास्पद टिप्पणी के कारण भारी राजनीतिक विरोध और आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. प्रधानमंत्री प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी नेता केमी बैडेनोच द्वारा नीतिगत उलटफेरों पर घेरे जाने पर स्टारमर ने मजाक में कहा कि "विपक्ष ने 14 वर्षों में कामसूत्र से भी अधिक पद बदले हैं." प्रधानमंत्री का यह कटाक्ष सदन में भारी सन्नाटे और असहजता का कारण बन गया, जिसे आलोचकों ने पद की गरिमा के प्रतिकूल और असंवेदनशील करार दिया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि  स्टार्मर की यह टिप्पणी उनके नेतृत्व की गहरी खामियों और जनता की मनोदशा से उनके कटे होने को दर्शाती है. जहां देश आर्थिक चिंताओं और सार्वजनिक सेवाओं की बदहाली से जूझ रहा है, वहां प्रधानमंत्री द्वारा इस तरह के हल्के-फुल्के अंदाज का सहारा लेने को विपक्ष ने उनकी "निराशा" का प्रतीक बताया है. सोशल मीडिया पर भी इस घटना के वीडियो वायरल होने के बाद स्टारमर की निर्णय लेने की क्षमता और संचार शैली पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं.

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब लेबर सरकार अपनी ही नीतियों, विशेष रूप से डिजिटल आईडी और आवास क्षेत्र के वादों को लेकर जांच के दायरे में है. जुलाई में सत्ता संभालने के बाद  स्टार्मर ने सालाना 3 लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बढ़ती लागत और श्रम की कमी जैसी चुनौतियों ने सरकार की राह मुश्किल कर दी है. इसके अलावा, न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि और नए "रोजगार कर" जैसे कदमों ने निर्माण कंपनियों और उद्योगों के बीच असंतोष पैदा कर दिया है.

हाउस ऑफ कॉमन्स में हुए इस वाकयुद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्टार्मर सरकार पर अपनी विश्वसनीयता साबित करने का भारी दबाव है. नीतिगत विफलताओं और विवादास्पद बयानों के बीच, मतदाताओं में सरकार की कार्यक्षमता को लेकर संदेह बढ़ रहा है. अब लेबर पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी नेतृत्व शैली को देश की वास्तविक अपेक्षाओं के अनुरूप ढालने और वादों को जमीन पर उतारने की है.

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