- अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान युद्ध को लेकर अंदरूनी मतभेद और रणनीतिक असहमति सामने आई है.
- अमेरिकी अधिकारी जेडी वेंस की भूमिका को इजरायल कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, विशेष रूप से वार्ताओं में.
- वेंस को सीजफायर वार्ताओं में अहम भूमिका निभाने वाला और सबसे व्यावहारिक समाधान के रूप में माना जा रहा है.
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस हफ्ते फोन कॉल के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि इजरायल, वेंस की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है.
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, वेंस ने नेतन्याहू से ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावना को लेकर किए गए दावों पर सीधा दबाव बनाया. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि युद्ध से पहले नेतन्याहू ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह विश्वास दिलाया था कि हालात आसान रहेंगे और ईरान में शासन परिवर्तन की संभावना कहीं ज़्यादा है, जबकि जमीनी सच्चाई अलग निकली. अधिकारी के मुताबिक, वेंस ने इन दावों को लेकर स्पष्ट और यथार्थवादी रुख अपनाया.
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'ईरान में सत्ता परिवर्तन आसानी से हो जाएगा'
एक अमेरिकी अधिकारी ने Axios को बताया, 'युद्ध शुरू होने से पहले बिबी (नेतन्याहू) ने राष्ट्रपति ट्रंप को यह बहुत आसान बता दिया था. उन्होंने कहा था कि ईरान में रिजीम चेंज की संभावना वास्तविकता से कहीं ज्यादा है. जबकि उपराष्ट्रपति वेंस नेतन्याहू के इन बयानों को लेकर पूरी तरह सतर्क और स्पष्ट थे.'
सीजफायर की कोशिश में जुटे वेंस
फोन कॉल के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि इजरायल, वेंस की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. वेंस इस समय ईरान के साथ युद्धविराम वार्ताओं में एक अहम चेहरा बनकर उभरे हैं और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ व जेरेड कुशनर के साथ बातचीत में शामिल हैं. एक अधिकारी ने दावा किया कि यह संदेश फैलाने की कोशिश की गई कि ईरान, वेंस से इसलिए बात करना चाहता है क्योंकि वह समझौते के लिए ज़्यादा तैयार हो सकते हैं. अधिकारी ने इसे 'जेडी वेंस के खिलाफ इज़रायली ऑपरेशन' बताया.
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हालांकि, एक अन्य वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि मौजूदा हालात में वेंस ही बातचीत के जरिS युद्ध खत्म करने का सबसे व्यावहारिक रास्ता हैं. अधिकारी के अनुसार, अगर ईरान वेंस के साथ समझौता नहीं कर पाया, तो किसी के साथ नहीं कर पाएगा.
ईरान युद्ध में संतुलन साधते वेंस
2028 के राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में संभावित दावेदार माने जा रहे जेडी वेंस ने ईरान युद्ध के दौरान अपेक्षाकृत कम सार्वजनिक बयान दिए हैं. अमेरिका के पूर्व मरीन और इराक युद्ध में सेवा दे चुके वेंस ने अपनी राजनीतिक पहचान गैर‑हस्तक्षेपवादी नेता के रूप में बनाई है, जो अमेरिका को लंबे विदेशी युद्धों से दूर रखना चाहते हैं.
खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी स्वीकार किया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को लेकर वेंस और उनके विचार पूरी तरह एक जैसे नहीं थे. ट्रंप ने कहा कि वेंस दार्शनिक तौर पर उनसे कुछ अलग थे और शुरुआत में सैन्य कार्रवाई को लेकर उतने उत्साहित नहीं थे.
अमेरिका के पास सक्षम नेतृत्व
हालांकि, सार्वजनिक रूप से वेंस ने ट्रंप की ईरान नीति का समर्थन किया है और इसे किसी भी हाल में अमेरिका का एक और अंतहीन युद्ध न बनने देने पर जोर दिया है. हाल ही में उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात और पिछली सरकारों के फैसलों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि इस बार अमेरिका के पास एक सक्षम नेतृत्व है.
ईरान युद्ध ने जहां पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है, वहीं वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच रणनीतिक मतभेद भी अब धीरे‑धीरे सतह पर आने लगे हैं.
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