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This Article is From Jan 12, 2026

चीन को जवाब देने के लिए समंदर के बहुत भीतर जा रहा जापान, समझिए मेगा प्लान

Japan Rare-Earths Program: चीन ने लंबे समय से भू-राजनीतिक लाभ के लिए रेयर अर्थ मेटल्स के उत्पादन में अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल किया है. जापान इसी निर्भरता से बाहर आना चाहता है.

चीन को जवाब देने के लिए समंदर के बहुत भीतर जा रहा जापान, समझिए मेगा प्लान
Japan Rare-Earths Program: जापान ने अपना मिशन रेयर अर्थ्स शुरू किया
  • जापान ने चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए 6 KM गहराई तक रेयर अर्थ मेटल्स निकालने वाला रिसर्च जहाज भेजा है
  • चिक्यू नाम का जहाज शिज़ुओका के शिमिज़ु बंदरगाह से मिनामी तोरीशिमा के लिए रवाना हुआ, जहां खनिज भंडार मौजूद हैं
  • जापान का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाकर सबसे बड़े सप्लायर चीन पर निर्भरता कम करना है

जापान को चीन की अब मेहरबानी नहीं चाहिए और अब वह अपने लिए रेयर अर्थ मेटल्स को खुद निकालेगा. इसी प्लान के तहत जापान ने अपना एक रिसर्च जहाज समंदर में उतार दिया है जो 6 किलो मीटर की गहराई तक गहरे समुद्र में रेयर अर्थ मेटल्स की खुदाई करेगा. सोमवार को इस वैज्ञानिक ड्रिलिंग जहाज की ऐतिहासिक यात्रा शुरू हुई जिसका नाम चिक्यू है. स्थानीय समयानुसार सुबह 9:00 बजे के आसपास शिज़ुओका के शिमिज़ु बंदरगाह से यह जहाज प्रशांत क्षेत्र के सुदूर द्वीप मिनामी तोरीशिमा के लिए रवाना हुआ. माना जाता है कि इस द्वीप के आसपास के पानी में मूल्यवान खनिजों का एक समृद्ध भंडार है.

आगे की बात बताने से पहले आपको आसान भाषा में बताते हैं कि आखिर रेयर अर्थ मेटल्स होते क्या हैं. रेयर अर्थ मेटल्स धरती के अंदर पाए जाने वाले दुर्लभ धातु हैं. आज के टेक्नोलॉजी के जमाने में रेयर अर्थ मेटल्स ऐसा फैक्टर है जिससे कंट्रोल अपने हाथ में बनाया रखा जा सकता है. दरअसल हथियारों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, गाड़ी बनाने से लेकर एयरोस्पेस बनाने तक, सेमीकंडक्टर बनाने से और उपभोक्ता वस्तुओं बनाने तक, हर जगह रेयर अर्थ के कंपोनेंट अहम हैं. अभी चीन रेयर अर्थ मिनरल्स की वैश्विक आपूर्ति पर हावी है. दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन का 60-70 प्रतिशत हिस्सा चीन का है.

जापान ने अपना यह रिसर्च जहाज ऐसे समय में भेजा है जब चीन और जापान में तल्खी दिखी है. दरअसल जापान ने कहा था कि अगर चीन ने ताइवान हमला किया तो जापान सैन्य रूप से प्रतिक्रिया कर सकता है. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव देखने को मिला था. 

जापान का प्लान क्या है?

चीन ने लंबे समय से भू-राजनीतिक लाभ के लिए रेयर अर्थ मेटल्स के उत्पादन में अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के साथ व्यापार युद्ध के वक्त भी यह देखने को मिला. जापान चीन पर अपनी इसी निर्भरता को खत्म करना चाहता है. 

खराब मौसम के कारण जापान की इस चिक्यू जहाज की यात्रा में एक दिन की देरी हुई. जहाज जब रवाना होने के लिए तैयार था, तब इस प्रोग्राम के डायरेक्टर ने बंदरगाह पर मीडिया से कहा, "हम (रेयर अर्थ मेटल्स के) खरीद स्रोतों में विविधता लाने और खास देशों पर अत्यधिक निर्भरता से बचने पर विचार कर रहे हैं." उन्होंने कहा, "मेरा मानना ​​है कि इसके लिए यह दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है कि रेयर अर्थ मेटल्स के घरेलू उत्पादन के लिए एक प्रक्रिया स्थापित किया जाए."

जापान एजेंसी फॉर मरीन-अर्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (JAMSTEC) ने इतनी गहराई पर किए जा रहे इस परिक्षण को दुनिया का पहला ऐसा परिक्षण बताया है. मिनामी तोरीशिमा के आसपास का जल क्षेत्र जापान के आर्थिक जल क्षेत्र में आता है और अनुमानतः यहां 16 मिलियन टन से अधिक रेयर अर्थ मेटल्स हैं.  निक्केई बिजनेस की रिपोर्ट के अनुसार यह वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा भंडार है.

निक्केई के अनुसार इन समृद्ध भंडारों में अनुमानित 730 साल पुराना डिस्प्रोसियम है, जिसका इस्तेमाल फोन और इलेक्ट्रिक कारों में उच्च शक्ति वाले मैग्नेट में किया जाता है, और 780 साल पुराना येट्रियम है, जिसका इस्तेमाल लेजर में किया जाता है. द इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के रिसर्च फेलो ताकाहिरो कामिसुना ने न्यूज एजेंसी AFP को बताया, "अगर जापान लगातार मिनामी तोरीशिमा के आसपास रेयर अर्थ मेटल्स को सफलतापूर्वक निकाल सकता है, तो यह जापान के प्रमुख उद्योगों के लिए घरेलू सप्लाई को सुरक्षित करेगा."

यह रिसर्च जहाज 14 फरवरी तक चलने वाला है और इन 32 दिनों में वह जापान से लगे समंदर के अंदर रेयर अर्थ मेटल्स खोजेगा.

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