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This Article is From Jan 10, 2026

मुनीर का क्रिप्टो किरदार, पाकिस्तान के कितने वफादार?

मुनीर एक तरफ चीन की तकनीक और फौजी हथियारों के दम पर मुसलमान देशों का सेनापति बनना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर वो बिटक्वाइन बिजनेस के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए लाल कालीन बिछा रहे हैं.

मुनीर का क्रिप्टो किरदार, पाकिस्तान के कितने वफादार?
  • पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर चीन-अमेरिका के बीच दुधारी तलवार पर चलकर देश की सुरक्षा को जोखिम में डाल रहे हैं
  • मुनीर चीन की तकनीक से मिलिट्री हथियार बनाकर मुस्लिम देशों को धर्म के नाम पर बेचने का प्रयास कर रहे हैं
  • वहीं दूसरी ओर मुनीर बिटक्वाइन बिजनेस के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के लिए लाल कालीन बिछा रहे हैं

पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर... वह पाकिस्तान में रहें या फिर विदेश में, ऐसा काम जरूर करते हैं जो पाकिस्तान को तबाही की ओर आगे बढ़ा देता है. चाहे ट्रंप के साथ हों या अफ्रीकी देशों के राष्ट्रप्रमुख के साथ, फील्ड मार्शल मुनीर ऐसे करार या दावे करते हैं जो पाकिस्तान को कंगाली के दलदल में और ज्यादा दबा देता है. मुनीर एक तरफ चीन की तकनीक और फौजी हथियारों के दम पर मुसलमान देशों का सेनापति बनना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर वो बिटक्वाइन बिजनेस के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए लाल कालीन बिछा रहे हैं. मुनीर चीन और अमेरिका के बीच ऐसी दुधारी तलवार पर चल रहे हैं, जिसमें चूकने का सीधा जख्म पाकिस्तान को ही लगेगा. 

चीनी खैरात के हथियारों की दुकान

जनरल मुनीर पाकिस्तान के अघोषित CEO बन गए हैं. मिलिट्री बिजनेस से पाकिस्तान की तिजोरी भरना चाहते हैं. मुनीर खैरात में मिले मिलिट्री हथियारों की दुकान सजाकर बैठे हैं. जो तकनीक चीन के काम की नहीं रही, उसका पट्टा चीन ने पाकिस्तान के कटोरे में डाल दिया. अब पाकिस्तान चीन की दया से मिलिट्री हथियार बनाएगा और मुस्लिम देशों को धर्म के नाम पर बेचेगा. इस खैराती मिलिट्री कारखाने के दम पर मुनीर इतरा रहे हैं, जबकि सच्चाई ये है कि वो पाकिस्तान के हाथ-पैरों में चीन की बेड़ियां मजबूत कर रहे हैं.

ट्रंप से रेयर अर्थ मिनरल्स का सौदा

पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ कुछ समय पहले अमेरिका गए थे. साथ में जनरल मुनीर भी थे. अमेरिकी राष्ट्रपति से दोनों की मुलाकात हुई. तस्वीरें सामने आयीं जिसमें जनरल मुनीर के हाथ में लकड़ी का एक बॉक्स था जिसमें पाकिस्तान में मिलने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स रखे थे. सब जानते हैं कि पूरी दुनिया में इस वक्त रेयर अर्थ मिनरल्स पर कब्जे की होड़ चल रही है. चीन भविष्य की इस संपदा में नंबर वन है. अमेरिका हर उस देश पर दबाव बना रहा है, जिसके पास रेयर अर्थ मिनरल्स हैं. उस मुलाकात में मुनीर ने रेयर अर्थ मिनरल का खजाना अमेरिका के हाथों में सौंप दिया. बदले में पाकिस्तान में 500 मिलियन डॉलर के अमेरिकी निवेश का कागज लेकर आए. 

अमेरिका के साथ बिटक्वाइन डील

मुनीर और ट्रंप के बीच हुई कई मुलाकातों में एक डील की बहुत चर्चा है. ये डील उस समय हुई जबकि अप्रैल 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ऑपरेशन सिंदूर की तैयारी कर रहा था. तभी खबर आयी कि पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल और अमेरिका की  कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) के बीच एक लेटर ऑफ इंटेंट पर सहमति हुई है. करार का उद्देश्य पाकिस्तान में ब्लॉकचेन तकनीक और डिजिटल फाइनेंस को बढ़ावा देना है. वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के बारे में दावा है कि इस कंपनी का 60% हिस्सा डोनल्ड ट्रंप के बेटे और दामाद के पास है. पूरी दुनिया में इसे बिटक्वाइन डील के नाम से प्रचार मिला. दावा किया गया कि इससे पाकिस्तान का नुकसान हुआ और जनरल मुनीर का फायदा.

चीन और अमेरिका के बीच फंसे मुनीर

सारी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में चीन ने इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में काफी निवेश किया है. चीन पूरी दुनिया में डॉलर को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है. लेकिन जनरल मुनीर लगातार डॉलर को मजबूत करने वाले कदम उठा रहे हैं. इसका नतीजा हाल के दिनों में दुनिया ने देखा है, जब ट्रंप ने भारत पर टैरिफ बढ़ाया तो चीन और रूस भारत के समर्थन में खड़े देखे गए. तनाव इतना बढ़ा कि उसे इंडो- यूएस रिश्तों के संवेदनशील दौर का नाम दिया गया. ऐसी स्थिति में जनरल मुनीर का अमेरिका और चीन के बीच झूलना पाकिस्तान के लिए फायदेमंद नहीं माना जा सकता.

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