- नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति से गुप्त रूप से मुलाकात कर ईरान को लेकर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की
- कुछ रिपोर्टों में दावा है कि UAE के शेख मोहम्मद बिन ज़ायद ने नेतन्याहू को हमास के हमले से पहले चेतावनी दी थी
- नेतन्याहू के विरोधियों ने इस चेतावनी को चुनावी मुद्दा बनाया है और उनके नेतृत्व पर गंभीर आलोचना की है
इज़रायली सूत्र ने बताया कि इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का गुप्त दौरा किया और वहां के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद से मुलाकात की. सूत्र ने बताया कि बातचीत का मुख्य मुद्दा ईरान था; यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां दोनों देशों ने अपना सहयोग बढ़ाया है, जिसमें मौजूदा ईरान युद्ध के दौरान का सहयोग भी शामिल है.
चुनाव में अमेरिकी रिपोर्ट बने मुद्दा
इज़रायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस दौरे की पुष्टि नहीं की. CNN ने इस पर टिप्पणी के लिए UAE के विदेश मंत्रालय से भी संपर्क किया. अगर इस दौरे की पुष्टि हो जाती है, तो यह इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से ठीक एक महीने पहले हुआ है. साथ ही, यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब इज़रायल में 'हारेट्ज़' और 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्टों को लेकर काफी राजनीतिक विवाद चल रहा है. इन रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बिन ज़ायद ने 7 अक्टूबर, 2023 के हमले से कुछ दिन पहले ही नेतन्याहू को हमास के एक बड़े ऑपरेशन के बारे में चेतावनी दी थी.
'द अटलांटिक' ने अलग से रिपोर्ट दी कि मिस्र के इंटेलिजेंस चीफ अब्बास कामेल 26 सितंबर, 2023 को इजरायल गए थे ताकि चेतावनी दे सकें कि गाज़ा में हालात "विस्फोटक" हो सकते हैं और रविवार को 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने रिपोर्ट दी कि गाजा को लेकर इज़रायल को मिस्र की तरफ से कम से कम तीन चेतावनियां दी गई थीं; इनमें से आखिरी चेतावनी हमले से कुछ दिन पहले नेतन्याहू को फोन कॉल के ज़रिए दी गई थी.
नेतन्याहू का इनकार
नेतन्याहू के ऑफ़िस ने बार-बार किसी भी तरह की चेतावनी मिलने से इनकार किया है और इन रिपोर्टों को मनगढ़ंत झूठ बताया है, जिनका मकसद उन्हें चुनावी तौर पर नुकसान पहुंचाना है. लेकिन उनके विरोधियों ने इन आरोपों का इस्तेमाल 7 अक्टूबर, 2023 के हमले को रोकने में हुई नाकामी के लिए जवाबदेही तय करने को अपने चुनावी अभियान का मुख्य मुद्दा बनाने के लिए किया है.
बिन जायद की चेतावनी की शुरुआती खबरों के बाद, UAE के विदेश मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में कहा कि वह "सरकारी नेताओं के बीच बातचीत के बारे में मीडिया की खबरों या अटकलों पर कोई टिप्पणी नहीं करता है." लेकिन उसने उस कॉल से इनकार नहीं किया. बयान में कहा गया, "जरूरत पड़ने पर, सभी संबंधित खुफिया जानकारी संबंधित संस्थाओं के बीच साझा की जाती रही है और आगे भी की जाती रहेंगी."
उस समय, मामले की जानकारी रखने वाले एक इज़रायली सूत्र ने बताया कि नेतन्याहू के कार्यालय ने UAE से इस रिपोर्ट का खंडन करवाने की कोशिश की थी, लेकिन UAE केवल खुफिया जानकारी साझा करने के बारे में बयान जारी करने पर सहमत हुआ. इसके बाद नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने प्रधानमंत्री के X अकाउंट पर एक बयान जारी किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि UAE में रहने वाले फ़िलिस्तीनी नेता मोहम्मद दहलान ने इज़रायल के चुनावों में "खुलेआम विदेशी दखल" दिया. पार्टी ने इस दावे के लिए कोई सबूत नहीं दिया. वहीं, नेतन्याहू के विरोधियों ने इस चेतावनी की खबर का इस्तेमाल करते हुए 7 अक्टूबर से पहले की घटनाओं को संभालने के उनके तरीके पर फिर से हमले शुरू कर दिए हैं.
विपक्ष के आरोप
इज़रायल में होने वाले अगले चुनावों में प्रधानमंत्री के मुख्य प्रतिद्वंद्वी माने जा रहे गादी आइज़ेनकोट ने शनिवार को कहा कि चेतावनी के बारे में हुए खुलासे से "कोई शक नहीं रह जाता: नेतन्याहू ने अंधेपन, अहंकार और गैर-ज़िम्मेदाराना रवैये के साथ इज़रायल को उसके इतिहास की सबसे बड़ी तबाही की ओर धकेल दिया." मई में, नेतन्याहू के दफ़्तर ने कहा था कि प्रधानमंत्री ने ईरान युद्ध के शुरुआती दिनों में, मार्च में UAE का गुप्त दौरा किया था, जिसे उन्होंने "ऐतिहासिक कामयाबी" बताया था. हालांकि, UAE के विदेश मंत्रालय ने उस समय उनके दावे को "पूरी तरह से बेबुनियाद" बताते हुए खारिज कर दिया था.
कहा जाता है कि युद्ध के दौरान इज़रायल ने UAE में 'आयरन डोम' मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी तैनात किया था और इज़रायली अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है. नेतन्याहू ने कभी भी UAE का कोई आधिकारिक दौरा नहीं किया है, जिसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया हो.
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