ईशा सिंह ने महिलाओं की 25 मीटर एयर पिस्टल में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है. क्या शानदार फ़ाइनल था,ईशा सिंह ने कमाल की शूटिंग की, पहले चौथे स्थान पर रहने से बचीं, फिर सिल्वर मेडल के लिए शूट-ऑफ़ के रोमांचक मुकाबले से गुज़रीं, और आखिर में गोल्ड मेडल के लिए टाई-ब्रेकर खेला. चीन की शियाओ ने आखिरी शॉट के साथ गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहीं. ईशा ने एशियाई गेम्स के रिकॉर्ड की बराबरी भी की है. मेडल टैली
Silver for India! 🇮🇳🥈
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) September 28, 2026
Esha Singh delivers a superb performance to win silver in the women's 25m pistol event at the Asian Games 2026.
Composed under pressure and fighting right till the end, she earns another proud moment for Indian shooting.
Congratulations, Esha! 🇮🇳… pic.twitter.com/LLJKWIcHBM
SILVER MEDAL FOR INDIA 🥈
— India_AllSports (@India_AllSports) September 28, 2026
Esha Singh wins Silver in 25m Pistol event. #AG2026withIAS #AichiNagoya2026 pic.twitter.com/bOb8f9ORHr

कौन है ईशा सिंह
ईशा सिंह भारत की बेहतरीन पिस्टल शूटर्स में से एक हैं और वह तेलंगाना के हैदराबाद से हैं. 1 जनवरी 2005 को जन्मी ईशा 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल इवेंट्स में हिस्सा लेती हैं और उन्होंने एशियन गेम्स, ISSF वर्ल्ड कप और वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीते हैं.
ईशा सिंह के संघर्ष की कहानी
ईशा का सफर आसान नहीं था, शूटिंग में आने से पहले उन्होंने बैडमिंटन, टेनिस, स्केटिंग और गो-कार्टिंग जैसे कई खेल आजमाए, लेकिन किसी ने भी उन्हें सच में प्रेरित नहीं किया. सब कुछ तब बदल गया जब वह अपने पिता के साथ हैदराबाद के गाचीबोवली स्टेडियम में एक शूटिंग रेंज गईं. उस एक विजिट ने उनमें ऐसा जुनून जगाया जिसने उनके भविष्य को आकार दिया. उनके पिता सचिन सिंह, जो एक रैली ड्राइवर हैं, उन्होंने उनके आगे बढ़ने में अहम भूमिका निभाई. उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए, उन्होंने घर पर ही पेपर-टारगेट शूटिंग रेंज बनाई ताकि ईशा रेगुलर प्रैक्टिस कर सकें. सीमित सुविधाओं के बावजूद, ईशा ने जी-तोड़ मेहनत की और बाद में पुणे में ओलंपिक मेडलिस्ट गगन नारंग की 'गन फॉर ग्लोरी एकेडमी' से जुड़ीं.

उनकी टीनएज (किशोरावस्था) के दौरान एक बहुत मुश्किल पल आया, साल 2017 में, एक कॉम्पिटिशन से पहले वह गंभीर रूप से बीमार थीं, फिर भी उन्होंने हिस्सा लिया और पोडियम तक पहुंचने में कामयाब रहीं. ईशा ने बाद में उस परफॉर्मेंस को अपनी जिन्दगी बदलने वाला पल बताया, जिसने उन्हें मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत और मानसिक मज़बूती दी.
सिर्फ 13 साल की उम्र में, ईशा ने मनु भाकर और हीना सिद्धू जैसे स्टार्स को हराकर सीनियर नेशनल टाइटल जीता और भारतीय शूटिंग जगत को चौंका दिया। वह इस इवेंट में सबसे कम उम्र की सीनियर नेशनल चैंपियन बनीं. उन्हें निराशा का भी सामना करना पड़ा, भारत के कोर ट्रेनिंग ग्रुप में होने के बावजूद वह टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने से बहुत कम अंतर से चूक गईं. हार मानने के बजाय, उन्होंने और कड़ी मेहनत की और मजबूती से वापसी की. उन्होंने कई इंटरनेशनल मेडल जीते और पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया.
ये भी पढ़ें- विराट कोहली नंबर 1, रोहित शर्मा नंबर 2, सफल रन-चेज में सबसे ज्यादा वनडे शतक लगाने वाले टॉप 5 बल्लेबाज
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं