इजरायल और यूरोपीय देश एक बार फिर आमने-सामने हैं. वेस्ट बैंक में इजरायल के कब्जे वाले सेटलमेंट एरिया में इजरायली लोगों ने उत्पात मचा रखा हैं, हिंसा की हर सीमा लांघ दी है और जब यूरोपीय देश उसपर एक्शन ले रहे हैं तो इजरायल बिफर पड़ा है. इजरायल ने मंगलवार को यरुशलम में ब्रिटेन के वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया. इजरायल ने यह कदम बदले की कार्रवाई के तौर पर उठाया है. ब्रिटेन ने ही कब्जे वाले वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायली सेटलर्स (जिन्हें यहां बसाया गया है) की हिंसा को लेकर पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए नए प्रतिबंधों की अगुवाई की थी.
इजरायल ने यह भी कहा कि वह गाजा में अमेरिका की मध्यस्थता वाली सीजफायर योजना की निगरानी करने वाले एक केंद्र में काम कर रहे ब्रिटिश प्रतिनिधियों को भी बाहर करेगा. इसके अलावा, ब्रिटेन को फिलिस्तीनी प्राधिकरण की सुरक्षा बलों को ट्रेनिंग देने से रोका जाएगा और 12 ब्रिटिश नागरिकों के इजरायल आने पर रोक लगा दी जाएगी. इनमें ज्यादातर सांसद हैं.
इजरायल का क्या कहना है?
गिदोन सार ने कहा कि ब्रिटेन का यह कदम नैतिक रूप से गलत है और यह एक स्वतंत्र देश के मामलों और उसकी चुनावी प्रक्रिया में सीधा दखल है. यह बयान ऐसे समय आया है जब 27 अक्टूबर को इजरायल में कड़ा मुकाबला वाला चुनाव होना है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों का समर्थन कर रहे हैं.
सार ने कहा कि इजरायल पूर्वी यरुशलम में मौजूद ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद कर रहा है. पूर्वी यरुशलम ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीनी इलाका रहा है. इजरायल ने इसे 1967 के छह दिवसीय युद्ध के दौरान कब्जे में लिया था. बाद में इजरायल ने पूर्वी यरुशलम को अपने में मिला लिया और पूरे यरुशलम को अपनी राजधानी मानता है. सार ने कहा कि एकजुट यरुशलम इजरायल की राजधानी है और पूरी तरह इजरायल के अधिकार में है.
उन्होंने कहा कि इस इलाके में किसी भी विदेशी गतिविधि को तय और स्वीकार किए गए तरीकों से ही किया जाना चाहिए और इजरायल की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए. भले पूर्वी यरुशलम पर इजरायल का नियंत्रण है, लेकिन ब्रिटेन समेत ज्यादातर देश पूरे यरुशलम पर इजरायल के अधिकार को नहीं मानते. इस मामले में अमेरिका अलग है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका ने अपना दूतावास तेल अवीव से यरुशलम ले गया था. ब्रिटेन और इजरायल को मान्यता देने वाले ज्यादातर देशों के दूतावास अब भी तेल अवीव में हैं.
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