- अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर हमला इजरायल के हमले की तैयारी की जानकारी मिलने के बाद किया
- अमेरिका को डर था कि ईरान इजरायली हमले के जवाब में अमेरिकी सेनाओं पर हमला करेगा इसलिए उसने भी हमले में भाग लिया
- रुबियो ने बताया कि ईरान ने अपने फील्ड कमांडरों को अमेरिकी सेनाओं के खिलाफ तुरंत जवाब देने का आदेश दिया था
क्या अमेरिका ने इजरायल की जल्दबाजी के चक्कर में ईरान पर हमला कर दिया? यह बात हम नहीं खुद अमेरिका के विदेश मंत्री बोल रहे हैं. अमेरिका ने ईरान पर हमला तभी किया जब उसे पता चला कि उसका सहयोगी इजरायल खुद पहले हमला करने वाला है. ऐसे में अमेरिका को डर था कि ईरान इसके जवाब में अमेरिकी सेनाओं पर हमला करेगा. इसी हमले से बचने के लिए उसने भी इजरायल के साथ हमले में शामिल होने का फैसला किया. यह बात सोमवार, 2 फरवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कही.
रुबियो ने कहा, “हमें पता था कि इजरायल कोई कार्रवाई करने वाला है. हमें यह भी पता था कि इसके बाद अमेरिकी सेनाओं पर हमला हो सकता है. और हमें पता था कि अगर हमने उनके हमले करने से पहले उन पर हमला नहीं किया, तो हमें ज्यादा जान-माल का नुकसान उठाना पड़ता.”
क्या ट्रंप ने संविधान की सीमा लांघी?
रुबियो से पूछा गया कि क्या अमेरिका को ईरान से तुरंत खतरा (imminent threat) था, क्योंकि अमेरिका में संविधान के अनुसार युद्ध घोषित करने का अधिकार कांग्रेस के पास है और तुरंत खतरा होने पर ही राष्ट्रपति सैन्य अभियान का आदेश दे सकता है. इस सवाल पर रुबियो ने फिर से इजरायल की योजना की तरफ इशारा किया.
रुबियो ने कहा, “बिलकुल तुरंत खतरा था. हमें पता था कि अगर ईरान पर हमला हुआ, और हमें लगता था कि हमला होगा, तो वे तुरंत हमारे पीछे पड़ेंगे.” रुबियो ने कहा कि हम वहां बैठकर पहला वार झेलने वाले नहीं थे. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान पहले अमेरिकी सेनाओं पर हमला करता, तो “हम सब यहां यह सवालों का जवाब दे रहे होते कि हमें यह पता था और हमने कार्रवाई क्यों नहीं की.”
इससे पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा था कि शनिवार को तेहरान में हुआ हमला, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई और कई अन्य बड़े अधिकारी मारे गए, वह हमला इज़राइल ने किया था. यह हमला तब किया गया जब खुफिया जानकारी मिली कि वे सभी एक बैठक में मौजूद थे.
उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि ईरान के लोग इस सरकार को हटा कर अपने देश के लिए एक नया भविष्य बना सकेंगे. हम चाहेंगे कि ऐसा हो सके. लेकिन इस मिशन का उद्देश्य उनकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और उनकी नौसैनिक क्षमता को नष्ट करना है.”
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