- दुबई से तेल अवीव आ रही फ्लाइट को हाईजैक करने और क्रैश करने की आतंकी साजिश फेल
- चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गुट आगे दिख रहा है लेकिन बहुमत से दूर है
- लेकिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 19 सीटें और विपक्षी गादी आइजेनकोट की पार्टी को 21 सीटें मिलने का अनुमान है
दुनिया में कहीं भी आतंकी हमला होता है या आतंकी हमला करने की कोशिश होती है, तो उससे सिर्फ आतंक फैलाने की कामना कर रहे आतंकवादियों को ही फायदा होता है. इजरायल में इस समय दहशत के बाद की राहत है. राहत इस बात की है कि दुबई से तेल अवीव आ रही फ्लाइट को हाईजैक करने और उसे क्रैश करने का आतंकी मंसूबा फेल हो चुका है. एक भारतीय पायलट और कुछ इजरायली आम लोगों ने जान पर खेलकर हमलावर को-पायलट के नापाक इरादों को विफल कर दिया है. इजरायल में इसी महीने आम चुनाव हैं. सरकार किसकी बनेगी, यह फैसला होना है. लेकिन आतंकी हमले की कोशिश के बाद वहां सवाल उठ रहा है कि यह पूरा मामला इजरायल की राजनीति के समीकरणों को कैसे बदलेगा. प्लेन हाइजैक साजिश के बाद इजरायल में एक ओपिनियन पोल आया है. क्या चुनाव में पीछे दिख रहे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए बाजी पलट सकती है?
एक्जिट पोल में क्या सामने आया?
इजरायली के न्यूज चैनल- चैनल 13 ने इस मामले के सामने आने के बाद अपना वीकली (हर सप्ताह) टेलीविजन पोल जारी किया. इस पोल से पता चलता है कि चुनावों से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गुट अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकल गया है. हालांकि वे अभी भी नेसेट (इजरायली संसद) में बहुमत से काफी दूर हैं.
सर्वे में इजरायली सेना के पूर्व प्रमुख और नेतन्याहू के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी गादी आइजेनकोट की 'यशार' पार्टी को 21 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी दिखाया गया है. हालांकि यह पिछले हफ्ते की तुलना में एक सीट कम है. इसके बाद नेतन्याहू की 'लिकुड' पार्टी है जिसके पास 19 सीटें हैं. ब्याचाद पार्टी 11 सीट जीतती दिख रही है. डेमोक्रेट्स को भी 11 सीटें मिलने का अनुमान है. जबकि यिसराएल बेतेनु को 9, जॉइंट लिस्ट को 9, ओत्जमा येहुदित को 8, यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म को 8, शास को 7, रिलिजियस जायोनिज़्म-जेहुत को 7, रा'अम को 5 और पीपल ऑफ इजराइल पार्टी को 5 सीटें मिलने का अनुमान है.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
नॉर्वे में भारत के राजदूत पद से रिटायर और अभी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (IICA) में प्रोफेसर, डॉ बी बाला भास्कर का मानना है कि इस पूरे मामले से नेतन्याहू को फायदा नहीं मिलेगा, बल्कि यह उनके खिलाफ जा सकता है. एनडीटीवी से बात करते हुए डॉ बी बाला भास्कर ने कहा कि दोनों के बीच सीधा संबंध नहीं निकाला जा सकता, अगर कुछ असर होगा भी तो वह नेतन्याहू के खिलाफ जाएगा. इजरायल की जनता जंग के बीच जीने से तंग आ चुकी है, वह नहीं चाहती कि अगली सरकार के अंदर भी उन्हें ऐसे आतंकी हमलों के डर के साए में जीना पड़े. विपक्षी पार्टी भी इसी मामले को लेकर नेतन्याहू को घेर सकती है.
डॉ बी बाला भास्कर के अनुसार चुनाव तो इजरायल में सरकार बनाने का आधा भर हिस्सा है, असली कहानी तो चुनाव के बाद शुरू होगी जब बहुमत जुटाने और सरकार बनाने के लिए जोड़-तोड़ होगा.
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