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इजरायल को अब अमेरिका की खैरात नहीं चाहिए- नेतन्याहू 

इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि हमारी अर्थव्यवस्था अब छोटी नहीं रही, इजरायल अमेरिका की आर्थिक मदद के बिना भी कुछ को संभाल सकता है.

इजरायल को अब अमेरिका की खैरात नहीं चाहिए- नेतन्याहू 
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ विरोध करती ईरानी जनता (फाइल फोटो- AFP)

अब इजरायल को अमेरिका की खैरात नहीं चाहिए. यह बात खुद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कह रहे हैं, जिन्होंने ईरान के खिलाफ जंग तो अमेरिका के साथ मिलकर शुरू की थी, लेकिन जंग खत्म होते और डील फाइनल होते-होते ट्रंप के साथ उनके रिश्तों में खटास आ गई है. अब देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए, इजरायल के प्रधानमंत्री ने अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक मदद को खत्म करने के मकसद से एक बड़े नीतिगत बदलाव की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि इजरायल की अर्थव्यवस्था अब इतनी मजबूत हो गई है कि उसे विदेशी सब्सिडी की जरूरत नहीं है.

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार, 30 जून को ये बातें कहते हुए, नेतन्याहू ने सुरक्षा और भू-राजनीतिक मोर्चों पर अपनी सरकार की व्यापक रणनीति की रूपरेखा बताई. ऐसे में अमेरिकी सरकार के साथ इजरायल के वित्तीय संबंधों पर बात करते हुए नेतन्याहू ने कहा, "मैं अमेरिकी मदद बंद करना चाहता हूं. यह कल्याणकारी मदद (वेलफेयर) की तरह है, मुझे यह नहीं चाहिए."

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल की मौजूदा आर्थिक मजबूती के कारण बाहरी फंडिंग न के बराबर मायने रखती है. उन्होंने आगे कहा, "हमारी अर्थव्यवस्था अब छोटी नहीं रही... हम अपनी GDP के उस छोटे से हिस्से (जो हमें अमेरिका से मिलता है) के बिना भी खुद को आर्थिक रूप से संभाल सकते हैं. मैं चाहता हूं कि यह प्रक्रिया इसी साल शुरू हो."

फिलिस्तीन को देश का दर्जा देने पर फिर साधा निशाना

इसके अलावा क्षेत्रीय और संप्रभुता से जुड़े अहम मुद्दों पर आते हुए, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने फिलिस्तीन को देश का दर्जे देने को लेकर अपनी सरकार के कड़े विरोध को फिर से दोहराया. उन्होंने फिर कहा, "इजरायल यहूदी लोगों का देश है. यहां कोई फिलिस्तीनी देश नहीं बनेगा."

साथ ही नेतन्याहू ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर आक्रामक रुख अपनाते हुए बताया कि सेना बाहरी दुश्मनों के खिलाफ सक्रिय रुख अपनाएगी. उन्होंने कहा कि हम एक सक्रिय सुरक्षा नीति अपनाएंगे. हम बस बाड़ के पीछे बैठकर इंतजार नहीं करेंगे. जब उनसे गाजा पट्टी में इजरायली बस्तियों को फिर से बसाने की संभावना के बारे में पूछा गया, तो प्रधानमंत्री ने सोची-समझी कूटनीतिक चुप्पी साधे रखी. उन्होंने कहा, "जहां तक गाजा में बस्तियां फिर से बसाने की बात है, तो आपको पहले कदम उठाने और बाद में बात करने के लिए तैयार रहना होगा. कभी-कभी दोनों को अलग रखना बेहतर होता है. इसीलिए मैं इस विषय पर और कुछ नहीं कहूंगा."

देश के अंदर शासन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर अपने नजरिए को समझाते हुए, नेतन्याहू ने कहा कि रणनीतिक अस्पष्टता बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा, कि आपको यह समझना होगा कि शासन करने की कला (स्टेटक्राफ्ट) सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है. मुझे हर समय हर बात पूरी दुनिया को बताने की जरूरत नहीं है."

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