- इजरायल में छात्र की गिरफ्तारी के बाद हरदी समुदाय का आंदोलन, 25 हजार प्रदर्शनकारी मिलिट्री जेल के बाहर जमा हुए
- हरदी के नेता अपने समुदायों के लिए सेना में भर्ती से पूरी छूट जारी रखने की मांग कर रहे हैं
- जबकि कोर्ट ने इसके लिए बनाए गए नेतन्याहू सरकार के कानून को लागू करने पर रोक लगा दी है
इजरायल में छात्र की गिरफ्तारी के बाद एक खास समुदाय का आंदोलन शुरू हो गया. सोमवार, 20 जुलाई की रात हरदी नाम के इस अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के हजारों प्रदर्शनकारी इजरायल में एक मिलिट्री जेल और तेल अवीव में अटॉर्नी जनरल के घर के बाहर जमा हो गए. वे सेना में भर्ती से बचने के आरोप में हाल ही में गिरफ्तार किए गए एक येशिवा छात्र की गिरफ्तारी का गुस्से में विरोध कर रहे थे. येशिवा छात्र हरदी समुदाय के वे पुरुष होते हैं जो अपना पूरा समय पवित्र यहूदी धार्मिक ग्रंथों की पढ़ाई में लगाते हैं.
टाइम्स ऑफ इजरायल ने खबर छापी है कि बेइट लिड मिलिट्री जेल में हुए विरोध प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल हुए. एक समय पर, उन्होंने सेना के बेस (जहां जेल स्थित है) के चारों ओर लगी बाड़ को तोड़ दिया और मौके पर मौजूद मिलिट्री पुलिस के साथ भिड़ गए. यूनाइटेड तोराह जुडिज्म पार्टी के प्रमुख MK यित्जाक गोल्डनॉफ इस रैली में शामिल हुए, जिसमें मुख्य रूप से समुदाय के युवा थे. एक असामान्य कदम के तहत, गुर हसीदिक नेता, रब्बी याकोव आर्य एल्टर भी विरोध प्रदर्शन में मौजूद थे.
חסידי גור צועקים ליד בית היועצת המשפטית לממשלה: "אין לך חלק בעולם הבא, אין לך חלק בעולם הבא" https://t.co/qXK0R1DHu7 pic.twitter.com/ZToZOKRx9J
— יואלי ברים yoeli brim (@yoeli_brim) July 20, 2026
क्यों मचा बवाल?
इजरायल में एक समुदाय- हरदी को छोड़कर बाकि सभी समुदाय के पुरुषों के लिए मिलिट्री में सेवा देना अनिवार्य है. इसपर खूब विवाद होता है. खुद सेना के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने इसपर सवाल उठाया था. नेतन्याहू की लोकप्रियता कम हो रही है और इस चक्कर में उनकी गठंबधन सरकार ने कानून बनाकर सेना में भर्ती से बचने वाले हरदी लोगों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी. लेकिन पिछले सप्ताह वहां के हाई कार्ट ऑफ जस्टिस ने इस कानून के लागू होने पर रोक लगा दी थी. इसके बाद वहां एक युवक की गिरफ्तार किया गया जो सेना में भर्ती होने से छूट के लिए भर्ती केंद्र पहुंचा था. इसी के विरोध में यह प्रर्दशन किया गया.
हरदी समुदाय से जुड़े राजनीतिक दलों ने मांग की थी कि 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव को देखते हुए पिछले सप्ताह नेसेट (इजरायली संसद) के भंग होने से पहले यह कानून पारित किया जाए. इस मुद्दे ने इजरायलियों को बुरी तरह विभाजित कर दिया है और यह एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया है. लेकिन कानून पारित होने के ठीक एक दिन बाद, हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस ने 28 जुलाई को होने वाली सुनवाई से पहले एक अस्थायी आदेश के माध्यम से कानून के लागू होने पर रोक लगा दी.
समुदाय क्या चाहता है?
हरदी के नेता अपने समुदायों के लिए सेना में भर्ती से पूरी छूट जारी रखने की मांग कर रहे हैं. यह मांग तब से की जा रही है जब हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस ने 2024 में फैसला सुनाया था कि सरकार को अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स येशिवा छात्रों को सेना में भर्ती करना होगा, क्योंकि दशकों से चली आ रही छूट को जारी रखने को लेकर कोई कानूनी नहीं है.
इस कानून के समर्थकों का मकसद यह था कि 'हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस' के लिए हरदी समुदाय को सेना में अनिवार्य भर्ती से छूट देने को गैर-कानूनी और भेदभावपूर्ण बताने वाले फैसले देना मुश्किल हो जाए. वजह है कि यह कानून तोराह की पढ़ाई को देश के एक जरूरी हिस्से के तौर पर स्थापित करता है.
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