आज इजरायल के 73 लाख वोटर यह तय करने के लिए बाहर निकलेंगे कि देश की कमान किसके हाथ में जाएगी. आज की वोटिंग से यह फैसला हो जाएगा कि 34 पार्टियों में से कौन सी पार्टी संसद पर कंट्रोल पाने की स्थिति में होगी. यह चुनाव देश के मौजूदा पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा चुनाव होने जा रहा है. या तो वह बेताज बादशाह बन जाएंगे या फिर उनकी राजनीति पर फुलस्टॉप लग सकता है. नेतन्याहू किसी कीमत पर पीएम की कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते. नेतन्याहू हर पैंतरा आजमाते दिख रहे हैं- और सबसे बड़ा आरोप उन पर लग रहा है कि वह वोटिंग से ठीक पहले ईरान पर एक और नया हमला करके खुद के पक्ष में माहौल बनाना चाहते थे. एक बाहरी दुश्मन को दिखाकर वोट लामबंद करना चाहते थे.
7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद आज पहली बार वोटिंग हो रही है. नेतन्याहू 19 सालों से सत्ता के केंद्र में रहे हैं. वह अपने गठबंधन को पूरे 4 साल के कार्यकाल तक सत्ता में बनाए रखने में सफल रहे हैं - जो इजरायल की राजनीति में एक दुर्लभ बात है. अब उनके सामने एक बड़ी चुनौती इजरायली सेना के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ गादी आइसेनकोट और उनकी 'यशार' पार्टी के रूप में आई है. यह पार्टी फिलहाल अलग-अलग ओपिनियन सर्वे में सबसे आगे चल रही है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे नेतन्याहू ने ईरान पर हमले और इजरायल की न्यूक्लियर तबाही के डर को भुनाने की कोशिश की है.
1- चुनाव से पहले ईरान पर हमले के लिए सेना पर दबाव बना रहे थे नेतन्याहू
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कई हफ्तों तक ईरान पर एक और हवाई हमला करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें सेना के चीफ ऑफ स्टाफ के विरोध का सामना करना पड़ा. यह जानकारी इजरायल के तीन सीनियर रक्षा अधिकारियों और इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन अन्य लोगों के हवाले से इस रिपोर्ट में दी गई है.
रिपोर्ट के अनुसार इसके बाद, पिछले कुछ दिनों में चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर को चिंता हुई कि नेतन्याहू ईरान के खिलाफ कोई अलग तरह की कार्रवाई करने का दबाव बना रहे हैं - जो सीधे हवाई हमले से तो अलग है, लेकिन क्या कार्रवाई होगी, इसके बारे में किसी ने विस्तार से नहीं बताया. जनरल जमीर का मानना था कि यह एक गलत कदम साबित हो सकता है, जिससे ईरान भड़क सकता है और इजरायल पर हमला कर सकता है.
2- ट्रंप से भी ईरान पर हमला करने के लिए कहा
CNN की रिपोर्ट के अनुसार बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी ईरान पर नए हमले करने के लिए जोर दिया है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने उनसे अनुरोध किया है कि वे तब तक इंतजार करें जब तक कि ट्रंप सरकार संयुक्त अभियान चलाने के लिए तैयार न हो जाए. इजरायली सुरक्षा सूत्र ने CNN को बताया, "नेतन्याहू वास्तव में चाहते थे और उन्होंने चुनावों से पहले ईरान पर संयुक्त हमले के लिए ट्रंप को मनाने की कोशिश भी की, लेकिन ट्रंप ने इसके लिए हरी झंडी नहीं दी."
बता दें कि ट्रंप खुद अमेरिकी के मिडटर्म चुनाव में उलझे हैं और ईरान जंग, महंगाई जैसे मुद्दों की वजह से वह और उनकी पार्टी पिछड़ती दिख रही है. ट्रंप की खुद की अप्रूवल रेटिंग अबतक के सबसे निचले स्तर पर है.
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3- नेतन्याहू ने इजरायलियों को दिखाया न्यूक्लियर तबाही का डर
नेतन्याहू पर यह भी आरोप हैं कि वह इजरायल की जनता को न्यूक्लियर तबाही का डर दिखाकर वोट अपने पक्ष में करना चाहते हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर पोस्ट की, जो AI से बनाई गई थी. तस्वीर में परमाणु बम से तेल अवीव शहर तबाह हो रहा था. नेतन्याहू ने इस पोस्ट में वोटरों से कहा कि या तो उन्हें वोट दो, नहीं तो परमाणु हमले में सब मरोगे.
תקראו את הדברים החשובים של יובל בלומברג: מדינת ישראל נמצאת בסכנה קיומית אמיתית ומוחשית. אם האיראנים ישיגו גרעין, שום דבר כבר לא ישנה יותר. הכל כל כך טפל אל מול הסכנה הקיומית של איראן והציר השיעי. הסערות המבוימות והמומצאות חדשות לבקרים נועדו להסיט את תשומת הלב מהדבר האחד שהוא החשוב ביותר: סיום העבודה באיראן. זה נוגע בקיום הפיזי של כל אדם ואדם כאן. יש לנו עוד שנתיים של טראמפ לסיים את העבודה באיראן, ואין לדעת מה יהיה לאחר מכן, אם זו תהיה קמאלה האריס, או תואם מאמדני כלשהו. זה חלון הזמן שנותר לנו כדי להשלים את העבודה הנדרשת כדי להבטיח את הקיום הפיזי שלנו לשנים הבאות. כל משאבי המדינה הנדרשים, צריכים להיות מושקעים במשימה הזו. קטאר, חרדים, אוריך, גיוס, התראות. הכל מסך עשן ענקי כדי להסתיר את הנושא היחיד שניצב מעל כולם בפער. אם יפלו במרכז הארץ שתי פצצות אטום, את מי יעניינו כל סערות הסרק האלה? הדורות הבאים לא יסלחו לנו אם נפספס את חלון ההזדמנויות ההיסטורי שמאפשר לנו לנסות ולהשלים את המשימה הקריטית ביותר שעומדת בפני הדור שלנו. זה לא יקרה עם ראש ממשלה שמוחזק בצווארו על ידי האחים המוסלמים וסייעני הטרור. זה לא יקרה עם ראש ממשלה שלא מסוגל להרים את הטלפון ולנהל שיחה אינטימית רציפה עם טראמפ. זה לא יקרה עם ראש ממשלה שלא מסוגל לעמוד בלחץ של ראיון טלויזיה. השינאה לנתניהו, ככל שהיא עולם ומלואו עבור מחנה שלם, לא תעזור מול הגרעין האיראני. כל אחד שדואג לקיום הפיזי שלו, של משפחתו, ושל אהוביו, ידו צריכה לרעוד לפני שהוא בוחר במישהו שלא יהיה מסוגל להשלים את המשימה, ובכך לדון את עצמו ואת משפחתו לסכנה של שואה שניה, בגלל השינאה הפוליטית שלו או בגלל סערת דמה מטופשת וחסרת חשיבות.
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) October 25, 2026
उन्होंने ईरान के परमाणु प्रोग्राम पर पोस्ट करते हुए लिखा, “जिसे अपनी, अपने परिवार और अपने चाहने वालों की जान की परवाह है, वह किसी ऐसे व्यक्ति को वोट देने से पहले कांपेगा जो मिशन पूरा नहीं कर पाएगा, और अपनी राजनीतिक नफरत या किसी छोटी-मोटी झूठी अफवाह के कारण खुद को और अपने परिवार को दूसरे होलोकॉस्ट के खतरे में डाल देगा.
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