इजरायल में वोटिंग हो चुकी है और फाइनल नतीजों से पहले एक्जिट पोल आ गए हैं. एक्जिट पोल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी, पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट के खिलाफ आगे चल रहा है. हालांकि दोनों ही गठबंधनों को नेसेट यानी इजरायली संसद में बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं. ऐसे में इजरायल में राजनीतिक समीकरण ऐसा बैठ रहा है, जिसका डर नेतन्याहू को पहले से ही था. चुनाव वाले दिन नेतन्याहू ने अपना ज्यादातर समय अपने लोगों को यह कहकर डराने में लगाया कि अरब लोग बहुत बड़ी संख्या में वोट डालने आ रहे हैं. अब दिख रहा है कि उनकी यह बात सच भी थी. इजरायल चुनाव में अरब पार्टियां किंगमेकर बनती दिख रही हैं.
मंगलवार को आए एग्जिट पोल से पता चला है कि इजरायली अरब पार्टियों की संसद में सीटें लगभग दोगुनी होकर 18 तक पहुंच सकती हैं. यह अनुमानों से कहीं ज्यादा है. इन पार्टियों के नेताओं ने अपने समर्थकों को एकजुट किया है ताकि देश के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहे नेता यानी नेतन्याहू को हटाया जा सके. इससे ये पार्टियां 'किंगमेकर' की भूमिका में आ सकती हैं. अगली सरकार कौन और कैसे बनाएगा, इसे लेकर होने वाली बातचीत का दौर काफी मुश्किल भरा हो सकता है.
क्या नेतन्याहू अरब पार्टियों से हाथ मिलाएंगे?
विपक्षी गठबंधन के नेता गादी आइसेनकोट के बारे में यह उम्मीद की जा रही है कि वे अपनी संख्या बढ़ाने और बहुमत के आंकड़े के पास पहुंचने के लिए कम से कम एक अरब पार्टी के साथ बातचीत करेंगे. हालांकि अभी कई मुद्दों को सुलझाना बाकी है. पूर्व सैन्य प्रमुख ने वैसे साफ कहा है कि वे किसी ऐसी पार्टी को स्वीकार नहीं करेंगे जो इजरायल को एक यहूदी देश न माने, या जो हमास को एक ऐसे आतंकवादी संगठन के रूप में न पहचाने जिसे खत्म किया जाना चाहिए.
उनकी इस शर्त के चलते 'द जॉइंट लिस्ट' (The Joint List) नाम की इजराइली अरब पार्टी शायद उनके साथ न आए. हालांकि इसके नेताओं ने कहा है कि वे गठबंधन से बाहर रहकर किसी ऐसी सरकार का समर्थन कर सकते हैं जिसमें नेतन्याहू शामिल न हों.
अरब समर्थन हासिल करने के मामले में नेतन्याहू की स्थिति ज्यादा मुश्किल है, क्योंकि उनके कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगी किसी भी ऐसे समझौते को निश्चित रूप से खारिज कर देंगे. वैसे फाइनल रिजल्ट आने से पहले ही नेतन्याहू ने भी कह दिया है कि उन्होंने कहा कि किसी भी नेता को इजरायल की अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार नहीं चलानी चाहिए. यह कोशिश यहूदी पार्टियों को अपने पाले में लाने के लिए हो सकती है.
कमाल दिख रहा अरब पार्टियों का प्रदर्शन
इजरायल में अरबी लोग देश की आबादी का 20% हिस्सा हैं. उनकी अरब पार्टियों का प्रदर्शन इस साल काफी शानदार रहा है. इसकी तुलना 2022 में उनके द्वारा जीती गई 10 सीटों से की जा सकती है. इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 18 तक जाता दिख रहा है. दो प्रमुख अरब पार्टियां हैं- राअम और द जॉइंट लिस्ट.
इन दोनों पार्टियों की विचारधाराएं और राजनीतिक रणनीतियां अलग-अलग हैं, लेकिन चुनाव से पहले वे एक साथ आ गईं. उन्होंने एक जोरदार अभियान चलाया, जिसका मकसद नेतन्याहू और उनकी दक्षिणपंथी सरकार को सत्ता से हटाना था. उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर के बाद से उनके समुदायों के लिए जीवन लगभग असहनीय हो गया है, और बढ़ते अपराधों के बीच पुलिस की लापरवाही एक बड़ी समस्या बन गई है.
मंगलवार के पूरे दिन, नेतन्याहू ने बुर्का पहने अरब महिलाओं की तस्वीरें पोस्ट कीं और कहा कि इजरायली अरबों का बड़ी संख्या में मतदान करना जीवन-मरण का सवाल है.
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