अगर बेंजामिन नेतन्याहू को फिर से इजरायल का प्रधानमंत्री बनना है, तो उन्हें अरब पार्टियों के साथ गठबंधन तो करना ही पड़ेगा. इजरायल के चुनाव में 90 प्रतिशत वोटों की गिनती हो चुकी है और एक बात साफ दिख रही है- बहुमत के आंकड़े के पास न नेतन्याहू का गठबंधन है और न मुख्य प्रतिद्वंद्वी, पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट का विपक्षी गठबंधन. अरब पार्टियों के हाथ में सत्ता की चाबी है और परेशान नेतन्याहू की पार्टी आरोप लगा रही है कि चुनाव को उन अरब पार्टियों ने चुरा लिया है, जो आतंकवाद और यहूदी राज्य के विनाश का समर्थन करती हैं.
इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा रात 11:35 बजे (स्थानीय समय) जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, 90 प्रतिशत वोटों की गिनती हो गई है. नेतन्याहू समर्थक गुट के पास 53 सीटें हैं, जबकि विपक्षी गुट के पास 48 सीटें हैं. दो अरब पार्टियां 19 सीटों के रिकॉर्ड नतीजे की ओर बढ़ रही हैं. इजरायल की 120 सीटों वाली संसद में बहुमत का आंकड़ा 61 सीटों का है.
जिसे चोर बोल रहे, उससे हाथ कैसे मिलाएंगे नेतन्याहू?
बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी 'लिकुड' ने अरब पार्टियों पर देश का चुनाव चुराने का आरोप लगाया है. इन अरब पार्टियों का आधार वे लोग हैं, जिनकी जड़ें फिलिस्तीनी हैं, लेकिन वे इजरायल के नागरिक हैं. अरब इजरायली देश की आबादी का 21% हैं और अब वही तय कर सकते हैं कि सरकार किसकी बनेगी.
बुधवार को लिकुड पार्टी ने एक बयान में कहा कि चुनाव "आतंकवाद और यहूदी देश को खत्म करने का समर्थन करने वाली अरब पार्टियों ने चुराया है". पार्टी ने उन पर "भ्रष्टाचार, धमकी, हिंसा, झूठ और वोटिंग बढ़ाने के लिए बैन सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल" का आरोप लगाया. पार्टी ने आगे कहा कि वह सबूत और गवाही अधिकारियों को सौंप रही है. पार्टी का आरोप है कि "हजारों लिफाफों में कैश और राम पार्टी के बैलेट भरे थे, पोलिंग बूथ के अधिकारियों को धमकाया और उनके साथ हिंसा की गई" और कई दूसरी गड़बड़ियां भी हुईं. लेकिन बड़ी बात यह है कि पार्टी ने सार्वजनिक तौर पर कोई सबूत सामने नहीं रखा है.
इन 4 तरीकों से बन सकती है सरकार
1- नेतन्याहू के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय एकता सरकार
सवाल है कि क्या नेतन्याहू अपने प्रतिद्वंद्वी आइसेनकोट को अपने साथ एक राष्ट्रीय एकता सरकार में शामिल होने के लिए मना पाएंगे? राष्ट्रीय एकता सरकार मतलब जब देश में बड़ा संकट हो, तो सभी बड़ी पार्टियां अपना झगड़ा छोड़कर मिल-जुलकर सरकार बना लेती हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए आइसेनकोट को अपने मुख्य एजेंडे को छोड़ना पड़ेगा. उन्होंने खुद को नेतन्याहू के एकमात्र विकल्प के रूप में पेश किया है और उनका पूरा चुनाव अभियान ही नेतन्याहू को सत्ता से हटाने पर केंद्रित रहा है. कल रात ही, अपने चुनाव अभियान मुख्यालय में मंच से उन्होंने नेतन्याहू से कहा कि वे आज ही राजनीतिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा करें. उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा कि इजरायल के लोग नेतन्याहू की झूठ की संस्कृति, समाज में बंटवारा पैदा करने और उकसावे की राजनीति से तंग आ चुके हैं.
2- अरब पार्टियों के साथ आइसेनकोट हाथ मिला लें
ऐसा होगा तो ऐतिहासिक होगा. यह इजरायली राजनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव होगा. अब तक केवल एक स्वतंत्र अरब पार्टी ही औपचारिक रूप से किसी गठबंधन का हिस्सा रही है- 2021 में, और वह भी ज्यादा दिन नहीं चली. एक बात और कि आइसेनकोट और उनके गुट की अन्य सभी यहूदी पार्टियों (एक को छोड़कर) ने पहले ही अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने से इनकार कर दिया है. लेकिन फिलहाल, विपक्ष के पास बहुमत हासिल करने का यही एकमात्र रास्ता है. अरब पार्टी 'राआम' के अभी लगभग 7 सीटें जीतने का अनुमान है. उसने कहा है कि वह विपक्षी सरकार में शामिल होगी. जबकि दूसरी अरब पार्टी जॉइंट लिस्ट, जिसके 12 सीटें जीतने का अनुमान है, उसने कहा है कि वह बाहर से समर्थन देगी.
3- नेतन्याहू विपक्षी गठबंधन को फोड़ दें
क्या नेतन्याहू आइसेनकोट के गुट की दक्षिणपंथी पार्टियों को तोड़कर अपनी सरकार में ला सकते हैं? बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए दो नाम सबसे आगे हैं- बेयाचद गठबंधन के नेता नफ्ताली बेनेट और इजरायल बेइतेनु पार्टी के नेता अविग्दोर लिबरमैन. दोनों ही सुरक्षा के मुद्दे पर कट्टर दक्षिणपंथी हैं और कई मामलों में नेतन्याहू से मिलते-जुलते हैं.
4- एक नया चुनाव
अगर ऊपर बताई गई स्थितियों में से किसी पर भी सहमति नहीं बन पाती है, तो इसका नतीजा नए चुनाव होंगे. कई लोग इसे नेतन्याहू की एक तरह की जीत मानेंगे, क्योंकि नए चुनाव होने तक वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे- और उन्हें शायद यह भी लगता हो कि इन चुनावों में उनके जीतने के बेहतर मौके हैं.
बता दें कि सैनिकों, राजनयिकों और अस्पताल में भर्ती मरीजों जैसे समूहों के 430,000 से 480,000 'एब्सेंटी बैलेट' की गिनती अभी बाकी है, इसलिए चुनाव के अंतिम नतीजे आने में एक-दो दिन और लग सकते हैं. इनके नतीजे पक्के होने के बाद, राष्ट्रपति इसाक हर्जोग सभी राजनीतिक गुटों से बातचीत करेंगे और उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, जिसके सफल होने की सबसे अधिक संभावना है- इस प्रक्रिया में कई हफ्ते लग सकते हैं. अगर कोई गुट बहुमत नहीं जुटा पाता, तो आखिर में एक और चुनाव कराना पड़ सकता है.
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