- ट्रंप ने कहा अगर रिपब्लिकन जीते तो हर अमेरिकी वयस्क को 5000 डॉलर डेविडेंड देंगे.
- 1.3 ट्रिलियन डॉलर का सवाल- इतनी बड़ी रकम जुटाने का स्रोत अभी साफ नहीं.
- कानूनी अड़चन ये है कि ट्रंप अपनी मर्जी से पैसा नहीं बांट सकते, कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 के मध्यावधि चुनाव से पहले ऐसा चुनावी वादा किया है, जिसने अमेरिका की राजनीति के साथ-साथ कानून और अर्थव्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. ट्रंप ने कहा है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी नवंबर के मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस पर अपना नियंत्रण बनाए रखती है, तो हर अमेरिकी वयस्क को 5,000 डॉलर का भुगतान किया जाएगा.
ट्रंप ने इसे ‘ट्रंप डिविडेंड' बताया है. लेकिन उन्होंने यह साफ नहीं किया कि इतना पैसा आएगा कहां से, इसे किस कानून के तहत दिया जाएगा और सरकार इसे कब और कैसे बांटेगी.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति अपने दम पर ऐसा भुगतान कर सकते हैं?
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति को सरकारी खजाने से 5000 डॉलर का चेक हर शख्स को बांटने के लिए अमेरिकी कांग्रेस यानी संसद की मंजूरी चाहिए होगी.
अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने लिखा कि ट्रंप भारत में चुनाव जीतने के फॉर्मूले को कॉपी कर रहे हैं. मगर अभी यह केवल एक घोषणा है. इसके लिए न कोई पूरा सरकारी कार्यक्रम सामने आया है, न भुगतान की अंतिम व्यवस्था और न ही यह बताया गया है कि इसके लिए कितने पैसे अलग रखे गए हैं.
तीन बड़े सवाल हैं
पहला- क्या राष्ट्रपति के पास ऐसा भुगतान करने का कानूनी अधिकार है?
दूसरा- अगर भुगतान कानूनी तरीके से किया जा सकता है, तो पैसा आएगा कहां से?
तीसरा- क्या चुनाव जीतने की शर्त से जुड़ा ऐसा वादा वोट खरीदने जैसा माना जा सकता है?
यहीं से ट्रंप के वादे की असली कानूनी और राजनीतिक पेचीदगी शुरू होती है.
आंकड़ों की नजर में
अमेरिका में करीब 270 मिलियन वयस्कों को भुगतान करने पर यह योजना लगभग 1.35 ट्रिलियन डॉलर की हो सकती है.
यानी यह छोटी राहत योजना नहीं होगी. इसका आकार अमेरिकी सरकार के लिए बेहद बड़ा होगा.
कुछ रिपोर्टों में पात्र लोगों की संख्या और संभावित लागत अलग-अलग बताई गई है, क्योंकि अभी यह भी साफ नहीं है कि सभी वयस्कों को पैसा मिलेगा या ज्यादा कमाई वाले लोगों को इससे बाहर रखा जाएगा.
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी संकेत दिया है कि अमीर अमेरिकियों को भुगतान से बाहर किया जा सकता है.
पैसा आएगा कहां से?
यही इस पूरे वादे की सबसे बड़ी आर्थिक पहेली है.
ट्रंप ने टैरिफ से होने वाली कमाई को संभावित स्रोत के तौर पर पेश किया है. लेकिन टैरिफ से मिलने वाली सरकारी आय और 1.3 ट्रिलियन डॉलर के संभावित भुगतान के बीच बड़ा अंतर है.
अगर सरकार के पास पर्याप्त पैसा नहीं है, तो उसे दूसरे स्रोतों से पैसा जुटाना पड़ेगा. इसका मतलब हो सकता है कि सरकार कर्ज ले या बजट के दूसरे हिस्सों से पैसा निकाले.
इससे पहले भी ट्रंप टैरिफ से मिलने वाले पैसे को अमेरिकी लोगों तक पहुंचाने की बात कर चुके हैं. लेकिन वह योजना लागू नहीं हुई.

क्या ट्रंप का यह वादा गैरकानूनी है?
यह सवाल थोड़ा पेचीदा है.
अमेरिकी कानून किसी व्यक्ति को पैसे देकर उससे किसी खास उम्मीदवार के पक्ष में वोट कराने या वोट रोकने की कोशिश को अपराध बनाता है. अमेरिकी कानून की धारा 18 यूएससी 597 में वोट के बदले पैसा देने की पेशकश अपराध है.
लेकिन ट्रंप का मौजूदा बयान सीधे यह नहीं कहता कि ‘आप रिपब्लिकन को वोट देंगे तो आपको 5000 डॉलर मिलेंगे.'
उनकी घोषणा यह है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी चुनाव जीतती है, तो पात्र अमेरिकी व्यस्कों को पैसा दिया जाएगा.
यानी भुगतान को किसी व्यक्ति के अपने वोट से सीधे नहीं जोड़ा गया है.
इसी वजह से केवल इस घोषणा को तुरंत ‘वोट खरीदना' या सीधे तौर पर अवैध कहना सही नहीं होगा. लेकिन अगर भविष्य में योजना को इस तरह बनाया जाता है कि पैसा किसी व्यक्ति के वोट देने या किसी खास उम्मीदवार को वोट देने से सीधे जुड़ जाए, तो कानूनी समस्या कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती है.
फिर सबसे बड़ा कानूनी सवाल क्या है?
सबसे बड़ा सवाल सरकारी पैसे को लेकर है.
अमेरिकी संविधान के आर्टिकल I में साफ है कि सरकारी खजाने से पैसा तभी निकाला जा सकता है जब कांग्रेस ने उसके लिए कानून के जरिए मंजूरी दी हो.
इसका मतलब है कि ट्रंप अकेले आदेश देकर 1.3 ट्रिलियन डॉलर नहीं बांट सकते.
उन्हें कांग्रेस से कानून पारित करवाना होगा, जिसमें यह तय किया जाएगा कि पैसा किसे मिलेगा, कितना मिलेगा और सरकार इसे किस स्रोत से देगी.
दिलचस्प बात ये है...
ट्रंप ने इस भुगतान को ‘डिविडेंड' कहा है.
कंपनी में डिविडेंड आम तौर पर उस मुनाफे का हिस्सा होता है जो शेयर धारकों को दिया जाता है. लेकिन सरकार कोई कंपनी नहीं है और अमेरिकी नागरिक किसी कंपनी के शेयर धारक नहीं हैं.
इसलिए ‘डिविडेंड' शब्द यहां राजनीतिक संदेश देने के लिए ज्यादा इस्तेमाल होता दिखता है, न कि किसी सामान्य सरकारी भुगतान की तकनीकी परिभाषा के तौर पर.
इसके दूसरे पहलू क्या हैं?
इतनी बड़ी रकम सीधे लोगों के हाथ में पहुंचने से खर्च बढ़ सकता है.
अगर अर्थव्यवस्था में पहले से महंगाई का दबाव हो, तो अतिरिक्त सरकारी खर्च कीमतों पर और दबाव डाल सकता है.
दूसरी चिंता सरकारी कर्ज की है. अगर भुगतान के लिए नया कर्ज लिया जाता है, तो अमेरिकी सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है.
असलियत क्या है?
फिलहाल 5000 डॉलर देने की बात ट्रंप का चुनावी वादा है.
इसे लागू करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी चाहिए और इसके लिए ठोस कानून बनाना होगा.
अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि हर वयस्क को समान रकम मिलेगी या अमीर लोगों को इससे बाहर रखा जाएगा.
इसलिए फिलहाल अमेरिकी नागरिकों के खाते में 5000 डॉलर आने की कोई गारंटी नहीं है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं