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सिर्फ 22 दिन और फिर... ईरान के पास कच्चा तेल रखने की जगह खत्म हो रही; US की नाकाबंदी ने बढ़ाई सबकी टेंशन

होर्मुज के आसपास अमेरिका की नाकाबंदी के कारण ईरान को अपना कच्चा तेल निर्यात करने में मुश्किलें आ रही है. अब आलम यह है कि उसके पास कच्चा तेल रखने की जगह भी धीरे-धीरे कम पड़ने लगी है.

सिर्फ 22 दिन और फिर... ईरान के पास कच्चा तेल रखने की जगह खत्म हो रही; US की नाकाबंदी ने बढ़ाई सबकी टेंशन
सांकेतिक तस्वीर.
  • अमेरिका-इजरायल के साथ दो महीने से जारी युद्ध में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकेबंदी का सामना किया है
  • होर्मुज की नाकेबंदी के कारण ईरान के पास तेल जमा करने की जगह केवल बारह से बाईस दिनों तक बची है
  • ईरान को मई के मध्य तक अपने दैनिक तेल उत्पादन में पंद्रह लाख बैरल तक कटौती करनी पड़ने की संभावना है

अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग को दो महीने हो चुके हैं. इन दो महीनों में युद्ध खत्म करने और शांति लाने की कोशिशें तो हुईं लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. न तो अमेरिका मानने को तैयार है और न ही ईरान झुकने को तैयार. ईरान को झुकाने के लिए अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी कर रखी है और अब इसका असर दिखने लगा है. 

खबर है कि ईरान के पास अपना क्रूड ऑयल जमा करने की जगह तेजी से खत्म हो जा रही है, क्योंकि होर्मुज के पास उसके बंदरगाहों पर अमेरिका की नाकेबंदी के कारण उसका ऑयल एक्सपोर्ट रुका हुआ है. अमेरिकी नाकेबंदी के कारण हर दिन लगभग 20 लाख बैरल ईरानी तेल एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा है. इस कारण ग्लोबल सप्लाई और भी कम हो गई है.

प्रोडक्शन में करनी पड़ेगी कटौती

Kpler के विश्लेषकों की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कुओं से उत्पादन जारी रहने के बावजूद, तेल की खेप न भेज पाने के कारण, ईरान के पास अब केवल 12 से 22 दिनों तक तेल जमा करने की जगह बची है. स्टोरेज की बढ़ती कमी से उत्पादन में और कटौती करने का खतरा पैदा हो गया है. Kpler का अनुमान है कि ईरान को मई के मध्य तक अपने डेली प्रोडक्शन में 15 लाख बैरल की और कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.

गोल्डमैन सैक्स ने पिछले हफ्ते बताया था कि अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद, ईरान ने पहले ही अपने डेली प्रोडक्शन में लगभग 25 लाख बैरल की कटौती कर दी है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित अन्य खाड़ी देशों ने भी 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अपने उत्पादन में कमी की है.

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अमेरिका के साथ डील का भी कुछ पता नहीं

भले ही ईरान का ऑयल प्रोडक्शन घट रहा हो, लेकिन फिर भी वह शायद अपनी 'सब्र वाली कूटनीति' जारी रखेगा और अमेरिका के साथ किसी भी जल्दबाजी वाली डील नहीं करेगा.

यूरोपियन काउंसिल फॉर फॉरेन रिलेशंस में मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका प्रोग्राम की सीनियर पॉलिसी फेलो और डिप्टी डायरेक्टर एली गेरानमायेह ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, 'ईरान के साथ बातचीत के लिए बहुत ज्यादा सब्र, समय और कड़ी मेहनत वाली कूटनीति की जरूरत होती है. इसके लिए यह समझने की भी जरूरत है कि एक बार जब ईरान किसी कूटनीतिक प्रक्रिया में शामिल हो जाता है, तो सफलता के लिए सम्मान और गरिमा का दिखना बहुत जरूरी होता है.'

हालांकि, Kpler के अनुसार, ईरानी सरकार को शायद कई महीनों तक स्टोरेज की कमी की वजह से होने वाली आर्थिक तंगी का पूरी तरह से एहसास नहीं होगा. 

ईरान ने होर्मुज में अपने सैन्य अभियान रोकने का प्रस्ताव दिया है लेकिन अमेरिका की इस पर ठंडी प्रतिक्रिया रही है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो अपने सलाहकारों से होर्मुज में नौसेना की लंबी नाकाबंदी की तैयारी करने को भी कह दिया है.

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ईरान का ऑयल एक्सपोर्ट कितना गिरा?

इस बीच, जैसे-जैसे युद्ध अपने तीसरे महीने में प्रवेश कर रहा है, अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश तेज कर दी है. अप्रैल की शुरुआत से ही ईरानी कच्चे तेल का निर्यात तेजी से गिरा है. Kpler ने बताया कि ईरान अब हर दिन सिर्फ लगभग 5.67 लाख बैरल तेल की निर्यात कर पा रहा है. जबकि मार्च में हर दिन औसतन 18.5 लाख बैरल तेल निर्यात किया था.

फिर भी, Kpler ने कहा कि नाकाबंदी से ईरान के मुनाफे पर इतनी जल्दी असर नहीं पड़ेगा, और राजस्व पर इसका असर पड़ने में लगभग तीन से चार महीने लगेंगे.

युद्ध से पहले, ज्यादातर ईरानी तेल निर्यात चीन को भेजा जाता था. ईरानी कच्चे तेल की खेप को आमतौर पर चीन के कुछ बंदरगाहों तक पहुंचने में लगभग दो महीने लगते हैं, और वे अक्सर ऐसे गुप्त रास्तों से पहुंचती हैं जो प्रतिबंधों से बचने के लिए बनाए गए होते हैं. Kpler के अनुसार, इसके बाद खरीदारों के पास भुगतान निपटाने के लिए और दो महीने का समय होता है.

इसलिए, युद्ध शुरू होने से पहले भेजे गए कच्चे तेल का भुगतान अब तक हो जाना चाहिए था. इसके अलावा, युद्ध शुरू होने के बाद, अमेरिका ने प्रतिबंधों में छूट की घोषणा की थी, जिससे अन्य खरीदारों को भी ईरानी तेल आयात करने की अनुमति मिल गई थी. लेकिन जब से अमेरिका की नाकाबंदी शुरू हुई है, तब से टैंकरों में ईरानी कच्चे तेल की लोडिंग में लगभग 70 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है.

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लेखक के बारे में
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प्रियंक द्विवेदी
चीफ सब एडिटर
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