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'अमेरिका-ईरान का युद्ध हिंद महासागर तक फैल सकता है', तेहरान की चेतावनी में भारत के लिए बड़ा जोखिम

अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी की आखिरी तारीख को शुरु जंग फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से लाल सागर तक फैल गई है. अब ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार ने हिंद महासागर तक जंग फैलने की चेतावनी दी है.

'अमेरिका-ईरान का युद्ध हिंद महासागर तक फैल सकता है', तेहरान की चेतावनी में भारत के लिए बड़ा जोखिम
US Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान की नई चेतावनी
  • ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार ने अमेरिका और इजरायल को दोबारा हमला करने पर कड़ी चेतावनी दी है
  • उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व का युद्ध हिंद महासागर तक फैल सकता है यदि फिर से कोई संघर्ष होता है
  • फार्स न्यूज एजेंसी ने इस बयान का वीडियो जारी किया है, जिसमें युद्ध के विस्तार की संभावना जताई गई है

ईरान ने अमेरिका की आंखों में देखकर बड़ी चेतावनी दी है. ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के सलाहकार ने गुरुवार, 23 दिसंबर को कहा कि अगर अमेरिका या इजरायल ने दोबारा हमला किया, हम मिडिल ईस्ट के युद्ध को हिंद महासागर तक बढ़ा सकते हैं.

ईरान की फार्स समाचार एजेंसी द्वारा जारी एक वीडियो में याह्या रहीम सफवी ने कहा, "चूंकि संघर्ष फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से लाल सागर तक फैल गया है, इसलिए यह संभव है कि और युद्ध होने पर यह मोर्चा और भी आगे बढ़े और हिंद महासागर और शायद उससे भी आगे तक पहुंच जाए."

भारत के लिए बढ़ेगा जोखिम

ईरान की इस चेतावनी पर भारत करीबी नजर रखेगा. लगभग 8 महीने से जारी यह टकराव अगर हिंद महासागर तक फैलता है, तो लड़ाई भारत के समुद्री पड़ोस के करीब आ जाएगी. इससे भारत को मिडिल ईस्ट, यूरोप और अफ्रीका से जोड़ने वाले समुद्री रास्तों पर होने वाली कमर्शियल शिपिंग पर असर पड़ सकता है.

इस इलाके में किसी भी तरह की रुकावट से भारत पर खास तौर पर असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से ही मंगाता है. फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और आस-पास के समुद्री इलाकों में शिपिंग पर पहले से ही खतरा है. इससे तेल की कीमतें, माल ढुलाई का खर्च और समुद्री बीमा का प्रीमियम बढ़ा हुआ है. अगर हिंद महासागर में ही युद्ध का दायरा बढ़ता है तो परेशानी और बढ़ेगी.

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार इस चेतावनी में पहली बार ईरान की ओर से हिंद महासागर का साफ तौर पर जिक्र किया गया है. इसी महासागर में मौजूद डिएगो गार्सिया पर अमेरिका और ब्रिटेन का एक अहम सैन्य अड्डा है, जो ईरान से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर है.

इस संघर्ष को खत्म करने की एक और कोशिश की गई है. इस हफ्ते न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली के दौरान दोनों देशों के अधिकारियों ने बातचीत की. ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अपनी शर्तें रखी हैं, जिनमें उसकी अर्थव्यवस्था पर लगी पाबंदियां हटाना और विदेशों में फ्रीज की गई उसकी संपत्ति को बिना किसी शर्त के जारी करना शामिल है. इससे पहले मंगलवार को AFP के साथ एक खास इंटरव्यू में, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने यमन में युद्ध खत्म करने का भी जिक्र शर्त के रूप में किया.

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