- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सरकार को हिंसक कार्रवाई पर सैन्य हमले की चेतावनी दी थी
- अब ट्रंप ने कहा कि ईरान अब उनसे बातचीत करना चाहते है, लेकिन मीटिंग के पहले अमेरिका कार्रवाई कर सकता है
- ईरान पर अमेरिकी हमला मध्य-पूर्व में बड़े युद्ध की संभावना को जन्म दे सकता है, इजरायल भी शामिल हो सकता है
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम लीडर सैय्यद अली होसैनी खामेनेई की सरकार को एक बड़ी धमकी दी थी. ट्रंप ने कहा था कि अगर खामेनेई सरकार पैमाने पर जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर कोई हिंसक कार्रवाई करती है तो अमेरिका सैन्य हमला कर सकता है. अब ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी धमकियों के बाद ईरान की सरकार उनसे बातचीत करना चाहती है. ट्रंप ने रविवार, 11 जनवरी को अपने प्लेन, एयर फोर्स वन में मीडिया से बात करते हुए कहा, "ईरान के नेताओं ने कल फोन किया. एक बैठक आयोजित की जा रही है... वे बातचीत करना चाहते हैं."
हालांकि यहां ट्रंप ने यह भी कहा कि "हमें बैठक से पहले कार्रवाई करनी पड़ सकती है." यानी अमेरिकी सेना इस बड़ी बैठक से पहले ही ईरान पर हमला कर सकती है.
ट्रंप ने कहा, "ऐसा लगता है कि वे ऐसा करना शुरू कर रहे हैं और ऐसा लगता है कि कुछ ऐसे लोग मारे गए हैं जिन्हें नहीं मारा जाना चाहिए. यदि आप उन्हें नेता कहते हैं तो ये हिंसक हैं. मुझे नहीं पता कि वे नेता हैं या वे सिर्फ हिंसा के जरिए शासन करते हैं."
अमेरिका के कमांडर-इन-चीफ यानी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना स्थिति पर करीब से नजर रख रही है. उन्होंने कहा, "हम इसे बहुत गंभीरता से देख रहे हैं. सेना इस पर विचार कर रही है, और हम कुछ बहुत मजबूत विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. हम दृढ़ संकल्प लेंगे."
ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान के अंदर की स्थिति पर "हर घंटे" अपडेट मिल रहा है, और "हम एक दृढ़ संकल्प लेने जा रहे हैं." प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि कुछ मौतें भगदड़ से जुड़ी थीं. उन्होंने कहा, "कुछ प्रदर्शनकारी भगदड़ के कारण मारे गए. मेरा मतलब है, आप जानते हैं, उनमें से बहुत सारे लोग थे, और कुछ को गोली मार दी गई थी."
खामेनेई का प्लान क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को ईरान हल्के में नहीं ले सकता. खासकर जब से अमेरिका वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल कर दिया है, उन्हें पकड़कर अमेरिका के जेल में डाल दिया है, ट्रंप की धमकियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता. सवाल यह उठ रहा है कि ईरान ने क्या सचमुच ट्रंप के सामने बातचीत का ऑफर रखा है. अगर यह सच है तो कहीं खामेनेई अमेरिका से बात करके उसके सैन्य हमले को टालने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं.
ईरानी सरकार पहले से ही ईरानियों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि देश को विदेशों से पैदा की जा रही अराजकता से बचाने की जिम्मेदारी उनके ही हाथ में है. रविवार को एक टीवी इंटरव्यू में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बार-बार राष्ट्रीय एकता की अपील की, देश से दंगाइयों को प्रोत्साहित करने वाले बाहरी दुश्मन के खिलाफ "हाथ में हाथ मिलाकर" आगे बढ़ने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि 80% प्रदर्शनकारियों की शिकायतें वैध थीं लेकिन मस्जिदों और दुकानों को जलाने वाले दंगाई और आतंकवादी थे.
उन्होंने अमेरिका पर ईरान को झुकाने के लिए अर्थव्यवस्था को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "मैं देश से कह रहा हूं: कृपया, बने रहें और हमारा समर्थन करें."
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