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क्या 'हॉर्मुज' से गुजरने वाले जहाजों से वसूली जा रही भारी-भरकम रकम? सुन लें ईरान का जवाब

Iran-Israel War: ईरान की ओर से यह संकेत दिया गया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के लिए खुला है, हालांकि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कुछ देशों के संदर्भ में अलग रुख अपनाया जा सकता है.

क्या 'हॉर्मुज' से गुजरने वाले जहाजों से वसूली जा रही भारी-भरकम रकम? सुन लें ईरान का जवाब
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का बड़ा बयान.
  • ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल और गैस के जहाज निकल नहीं पा रहे हैं
  • ईरानी दूतावास ने जहाजों से दो मिलियन डॉलर वसूलने के दावों को पूरी तरह झूठा और निराधार बताया है
  • ईरान ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर कोई भारी वसूली नीति लागू नहीं की गई है
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नई दिल्ली:

ईरान-इजरायल जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल और गैस के जहाज नहीं निकल पा रहे हैं, जिसकी वजह से वैश्विक संकट बढ़ गया है. युद्ध फिलहाल थमता नहीं दिख रहा. ट्रंप ने यूटर्न तो लिया लेकिन ईरान है कि मानने को तैयार नहीं. उसने इजरायल पर हमले लगातार जारी रखे हुए है. वहीं ईरान अब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को 'पूरी तरह से बंद' करने की भी धमकी दे रहा है. अगर ईरान में हॉर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया तो दुनिया में तेल और गैस के लिए हाहाकार मच जाएगा. ये दावा किया जा रहा है कि ईरान हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से भारी-भरकम राशि वसूल रहा है. 2 मिलियन डॉलर की वसूली का दावा किया गया था, जिसकी सच्चाई खुद ईरान ने कबूल की है. 

ईरान ने सभी दावों को बताया झूठा और निराधार

हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 2 मिलियन डॉलर वसूले जाने के दावे को लेकर फैल रही खबरों पर भारत स्थित ईरानी दूतावास ने स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया है. दूतावास ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इस तरह के सभी दावे पूरी तरह से झूठे, भ्रामक और निराधार हैं, और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है. ईरानी दूतावास ने यह भी साफ किया कि इस तरह की बातें कुछ व्यक्तियों के निजी विचार हो सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी भी स्थिति में ईरान सरकार की आधिकारिक नीति या रुख के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

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AFP फोटो.

AFP फोटो.

अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को लेकर कोई ऐसी नीति नहीं

 दूतावास ने जोर देकर कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को लेकर कोई ऐसी नीति घोषित नहीं की है, जिसमें जहाजों से इस तरह से भारी रकम वसूली जा रही हो. दरअसल, क्षेत्र में जारी संघर्ष और अनिश्चितता के माहौल में कई तरह की अपुष्ट खबरें और दावे सामने आ रहे हैं, जिनमें से कुछ को बिना आधिकारिक पुष्टि के ही व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है.

ईरान के दूतावास ने ऐसे ही दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि देश की आधिकारिक स्थिति को केवल आधिकारिक स्रोतों के आधार पर ही समझा जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत बयानों या अफवाहों के आधार पर. एक्स पोस्ट में जारी बयान में लिखा- "इस तरह की खबरें पूरी तरह निराधार हैं और इनका ईरान की आधिकारिक नीति से कोई संबंध नहीं है. इस तरह के दावे कुछ व्यक्तियों की निजी राय हैं, जो ईरान सरकार के आधिकारिक रुख को नहीं दर्शाते."

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जहाजों के लिए खुला है हॉर्मुज जलडमरूमध्य

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के लिए खुला है, हालांकि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कुछ देशों के संदर्भ में अलग रुख अपनाया जा सकता है.बता दें कि सोमवार को भारतीय झंडे वाले दो बड़े गैस टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट पार करते हुए ट्रैक किया गया. शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, जग वसंत और पाइन गैस नाम के ये टैंकर दोपहर बाद (स्थानीय समयानुसार) यूएई से निकलकर ईरान के तट के पास से गुजरते हुए आगे बढ़ते दिखे.

ईरान क्यों दे रहा हॉर्मुज को 'पूरी तरह से बंद' करने की धमकी?

हालांकि ईरान अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए पूरी तरह तत्पर हैं. उसने साफ कर दिया है कि अगर उसके पावर प्लांट्स या बुनियादी ढांचे पर कोई हमला होता है, तो वह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को 'पूरी तरह से बंद' कर देगा. बता दें कि ईरान की यह धमकी ट्रंप की 48 घंटों के भीतर हॉर्मुज स्ट्रेट नहीं खोले जाने ईरानी बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की धमकी के बाद सामने आई. आरान ने साफ किया कि ट्रंप अगर ऐसा करते हैं तो वह हॉर्मुज को पूरी तरह से बंद कर देगा. बता दें कि ट्रंप ने पहले ईरान को 48 घंटे में हॉर्मुज स्ट्रेट खोलने की चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा नहीं होता है तो वह ईरान के अहम बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचाएंगे. इस पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया था कि हॉर्मुज का रास्ता बंद नहीं है. जहाजों से वहां जाने से हिचकिचाने की वजह वे बीमा कंपनियां हैं, जो जंग से डर रही हैं. 
इनपुट- IANS के साथ

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