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जर्मनी से US Army के वापस लौटने पर नाटो में खलबली, जर्मन डिफेंस मिनिस्टर बोले- ये तो होना ही था...

US Troops In Germany: अमेरिका के इस कदम से 32 सदस्यीय नाटो गठबंधन में खलबली मच गई है. नाटो की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने कहा कि गठबंधन इस फैसले के ब्योरे को समझने के लिए वाशिंगटन के साथ संपर्क में है.

जर्मनी से US Army के वापस लौटने पर नाटो में खलबली, जर्मन डिफेंस मिनिस्टर बोले- ये तो होना ही था...
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और राष्ट्रपति ट्रंप की आखिरी बार मार्च में व्हाइट हाउस में आमने-सामने मुलाकात हुई थी.
Reuters

US Army in Germany: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मनी के बीच जुबानी जंग अब सैन्य तनाव में बदल गई है. ईरान के मुद्दे पर जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की तीखी टिप्पणी से नाराज ट्रंप ने जर्मनी से अपने 5,000 सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश दे दिया है. इस फैसले ने नाटो (NATO) गठबंधन की चिंता  भी बढ़ा दी है. इसके साथ ही यूरोप की सुरक्षा रणनीति पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं.

जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने अमेरिका के इस फैसले को 'पूर्वानुमानित' यानी पहले से ही अपेक्षित बताया है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यूरोप और खासकर जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी न केवल जर्मनी बल्कि खुद अमेरिका के हित में भी है. फिलहाल जर्मनी में 36,000 से अधिक अमेरिकी सक्रिय सैनिक तैनात हैं, जो यूरोप में किसी भी देश की तुलना में सबसे बड़ी संख्या है. इसके मुकाबले इटली में 12,000 और ब्रिटेन में 10,000 सैनिक ही तैनात हैं.

ट्रंप ने शनिवार रात सैनिकों की कटौती पर मुहर लगाते हुए संकेत दिया कि यह तो बस शुरुआत है. उन्होंने कहा, "हम सेना की संख्या काफी कम करने जा रहे हैं और यह कटौती 5,000 सैनिकों से भी कहीं ज्यादा होगी." ट्रंप ने यह भी संकेत दिए हैं कि वे इटली और स्पेन से भी अपने सैनिकों को वापस बुला सकते हैं.

नाटो की बढ़ती चिंता

अमेरिका के इस कदम से 32 सदस्यीय नाटो गठबंधन में खलबली मच गई है. नाटो की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने कहा कि गठबंधन इस फैसले के ब्योरे को समझने के लिए वाशिंगटन के साथ संपर्क में है. पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड तौस्क ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "ट्रांसअटलांटिक समुदाय (यूरोप-अमेरिका गठबंधन) के लिए सबसे बड़ा खतरा बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि हमारे अपने गठबंधन का बिखरना है."

सिर्फ यूरोपीय नेता ही नहीं, बल्कि ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस फैसले से असहमत दिख रहे हैं. सीनेटर रोजर विकर और प्रतिनिधि माइक रोजर्स ने एक संयुक्त बयान में कहा कि यूरोप से सैनिकों को हटाने के बजाय वहां मजबूत सैन्य पकड़ बनाए रखना अमेरिका के हित में है.

चांसलर मर्ज़ की टिप्पणी से भड़के ट्रंप

इस पूरे तनाव की जड़ जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ का वह बयान है, जिसमें उन्होंने अमेरिका की विदेश नीति की आलोचना की थी. मर्ज़ ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका के पास कोई ठोस रणनीति नहीं है. उन्होंने दावा किया कि ईरानी वार्ताकार बहुत चतुर हैं और वे अमेरिका को 'अपमानित' कर रहे हैं. मर्ज़ के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी इस्लामाबाद (पाकिस्तान) तक का सफर तय करते हैं और बिना किसी नतीजे के लौट आते हैं.

मर्ज़ की इस टिप्पणी पर ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पलटवार किया. उन्होंने लिखा कि मर्ज़ को कुछ नहीं पता और शायद वे चाहते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों. इस तीखी नोकझोंक के तुरंत बाद पेंटागन ने जर्मनी से सैन्य वापसी की घोषणा कर दी. पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल के अनुसार, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के आदेश पर अगले 6 से 12 महीनों में यह वापसी पूरी कर ली जाएगी.

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