ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के आगे पूरी तरह झुकने के मूड में नहीं है. ईरान के एक आला अधिकारी के मुताबिक, दोनों देशों के बीच जारी बातचीत में ईरान के एनरीच्ड यूरेनियम को लेकर कोई चर्चा ही नहीं हो रही है. इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी जिद छोड़नी पड़ेगी?
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी अली बकेरी ने मॉस्को में आयोजित 'फर्स्ट इंटरनेशनल सिक्योरिटी फॉरम' के दौरान पत्रकारों से बातचीत में यह बड़ा दावा किया. उन्होंने दो टूक लफ्जों में कहा कि ईरान के यूरेनियम भंडार को लेकर बातचीत का कोई एजेंडा तय नहीं है, यानी इस मसले पर अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है. लेकिन इस बीच अमेरिका ने होर्मुज से अपनी सेना पीछे हटाने के लिए ईरान को एक प्रस्ताव भेजा है.
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अमेरिका की तरफ से क्या प्रस्ताव आया है?
ईरान की सरकारी टीवी IRIB के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को समझौते का एक मसौदा भेजा है जिसमें ये कहा गया है कि अमेरिका सेना होर्मुज और फारस की खाड़ी से वापस जाएगी. इसके बाद ईरान को युद्ध से पहले वाली स्थिति पर आना होगा और जहाजों को होर्मुज से गुजरने देना होगा.
अपने हितों को देख लें तब आगे बढ़ेंगे: ईरान
ईरानी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 60 दिनों के भीतर किसी समझौते पर पहुंचने की खबरों के बारे में पूछा, तो उन्होंने साफ किया कि इस मियाद के भीतर सिर्फ एक मेमोरेंडम (सहमति पत्र) और कुछ खास पहलुओं पर ही चर्चा होनी है. उन्होंने खुलासा किया कि इस 14 सूत्रीय मेमोरेंडम का मुख्य मकसद क्षेत्र में जारी जंग को खत्म करना है, न कि परमाणु मुद्दे पर बात करना है.
ईरान ने दो टूक कहा है कि वह इस मोड़ पर परमाणु कार्यक्रम की बारीकियों को लेकर अमेरिका से कोई चर्चा नहीं कर रहा है. ईरान का पूरा ध्यान सिर्फ इस बात पर है कि ऐसा नतीजा निकले जिससे तेहरान के अधिकारों की हिफाजत हो सके और उसके राष्ट्रीय हितों को कोई नुकसान न पहुंचे.
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