- जंग से पहले अमेरिका के पास 2,200 पैट्रियट इंटरसेप्टर और लगभग 452 THAAD मिसाइलें थीं.
- लेकिन अब भंडार घटकर 827 से कम पैट्रियट इंटरसेप्टर और 278 से कम THAAD बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर रह गया है
- CSIS की यह रिपोर्ट बताती है कि अगर किसी और मोर्चे पर जंग छिड़ती है तो अमेरिकी सेना परेशानी में आ सकती है
क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आधे हथियारों के साथ ईरान जंग जीतने का सपना देख रहे हैं... अगर अभी चीन या नॉर्थ कोरिया के साथ तनाव बढ़ गया तो अमेरिका की सेना क्या करेगी... क्या सब भगवान भरोसे चल रहा है... एक ऐसी जानकारी सामने आई है जो अमेरिका जनता को परेशान कर सकती है. ईरान के साथ अमेरिका की जंग पांचवें महीने में पहुंच चुकी है और सच्चाई यह है कि अमेरिकी सेना के मुख्य एयर-डिफेंस मिसाइल का भंडार बहुत कम हो गया है. इससे अमेरिकी सेना की इस क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं क्या वह मिडिल ईस्ट में अपने ऑपरेशन को जारी रखते हुए अन्य क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर सकती है?
क्या जानकारी सामने आई है?
थिंक टैंक 'सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' यानी CSIS के एक आकलन से पता चला है कि फरवरी के अंत में जंग शुरू होने के बाद से अमेरिका ने बड़ी संख्या में 'पैट्रियट' और 'टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस' (THAAD) इंटरसेप्टर को तैनात है, जिससे उसके रिजर्व स्टॉक में भारी कमी आई है. CSIS के अनुमानों के अनुसार, जंग शुरू होने से पहले, अमेरिका के पास अपने दो सबसे एडवांस मॉडलों में लगभग 2,200 पैट्रियट इंटरसेप्टर और लगभग 452 THAAD मिसाइलें थीं. लेकिन अब मौजूदा भंडार घटकर 827 से कम पैट्रियट इंटरसेप्टर और 278 से कम THAAD बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर रह गया है.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भंडार में कमी अमेरिका और उसके सहयोगियों को एयर-डिफेंस मिशन के दौरान अधिक ऑपरेशनल जोखिम उठाने के लिए मजबूर कर सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है, "भंडार कम होने से अमेरिका और उसके गठबंधन सहयोगियों को इंटरसेप्शन (मिसाइल को हवा में नष्ट करने) के मामले में अधिक जोखिम उठाना पड़ सकता है. बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस के लिए पैट्रियट और THAAD का कोई अच्छा विकल्प नहीं है."
ट्रंप तो कुछ और ही दावे कर रहे हैं
ये निष्कर्ष राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों के विपरीत हैं. ट्रंप ने हथियारों के भंडार में कमी को लेकर जताई जा रही चिंताओं को खारिज करते हुए कहा था कि अमेरिका का भंडार बहुत अच्छी स्थिति में है. वैसे अमेरिका-ईरान की लड़ाई बिना किसी साफ समाधान के जारी ही है और ऐसे में अमेरिका के हथियारों के भंडार में कमी का मुद्दा बहुत संवेदनशील हो गया है. जानकारों का कहना है कि अगर यह टकराव और लंबा खिंचता है, तो अमेरिका के लिए दूसरी जगहों पर आपातकालीन स्थितियों से निपटना मुश्किल हो सकता है.
CNN की रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले अमेरिका के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने ट्रंप के साथ एक ब्रीफिंग में मिसाइल सप्लाई कम होने पर चिंता जताई थी. इस दौरान रक्षा अधिकारियों ने ईरान के साथ बड़े संघर्ष के खतरों के बारे में विस्तार से बताया था. उस चर्चा के बाद, ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमलों को कुछ समय के लिए रोकने का आदेश दिया था, लेकिन इलाके में तनाव फिर से बढ़ गया है. ईरान के हमले के बाद अमेरिकी सेना ने वापस ईरान पर हमला बोला है. इसके अलावा हाल के दिनों में अमेरिकी और सऊदी सेनाओं ने इराक में ईरान-समर्थक गुटों को निशाना बनाते हुए मिलकर हवाई हमले किए हैं.
चीन या नॉर्थ कोरिया ने हमला कर दिया तो?
CSIS रिपोर्ट के सह-लेखक और रिटायर्ड मरीन कॉर्प्स कर्नल मार्क कैंसियन ने चेतावनी दी कि लगातार लड़ाई से अमेरिकी मिसाइल रिजर्व इतने कम हो सकते हैं कि मिडिल ईस्ट के बाहर रक्षा तैयारियों पर असर पड़ सकता है. कैंसियन ने CNN से कहा कि ईरान के साथ लंबे युद्ध से चीन या नॉर्थ कोरिया से जुड़ी संभावित आपातकालीन स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की अमेरिकी सेना की क्षमता कम हो सकती है.
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