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अयातुल्ला अली खामेनेई को मौत के 50 दिनों बाद भी ईरान ने क्यों नहीं दफनाया? जानें एक्सपर्ट ने क्या बताया कारण

फाउंडेशन फॉर द डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के बेहनम तालेब्लू ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि मोजतबा खामेनेई सरकार डर के साए में है और अयातुल्‍ला अली खामेनेई का अंतिम संस्‍कार का कार्यक्रम आयोजित करने की हालत में नहीं है.

अयातुल्ला अली खामेनेई को मौत के 50 दिनों बाद भी ईरान ने क्यों नहीं दफनाया? जानें एक्सपर्ट ने क्या बताया कारण
  • ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को करीब 50 दिनों के बाद भी दफनाया नहीं जा सका है.
  • अमेरिका और इजरायल के खतरों के कारण ईरान की सरकार अंतिम संस्कार स्थल को लेकर निर्णय नहीं ले पा रही है.
  • सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, डर के कारण खामेनेई को दफनाने में ईरान के शासन की ओर से देरी हुई है.

ईरान की सांस्‍कृतिक और राजनीतिक परंपराओं के बिलकुल उलट देश के पूर्व सर्वोच्‍च नेता अयातुल्‍ला अली खामेनेई को अभी तक दफनाया नहीं गया है. अमेरिका और ईरान के संयुक्‍त हमले में 86 साल के खामेनेई की मौत हो गई थी. हालांकि इस घटना को करीब 50 दिन का वक्‍त बीच चुका है, लेकिन ईरान की सरकार ने उनके अंतिम संस्‍कार स्‍थल तक को लेकर अंतिम रूप नहीं दिया है. यह बताता है कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार अमेरिका और इजरायल के कारण पैदा खतरों से निपटने की कोशिश में जुटी है. हालांकि, एक सुरक्षा विशेषज्ञ का दावा है कि युद्ध में व्यस्तता नहीं, बल्कि डर के कारण खामेनेई के अंतिम संस्कार में इतनी देरी हुई है. 

फाउंडेशन फॉर द डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के बेहनम तालेब्लू ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि मोजतबा खामेनेई सरकार डर के साए में है और अमेरिका के साथ अस्थिर युद्धविराम के बावजूद अंतिम संस्‍कार का कार्यक्रम आयोजित करने की हालत में नहीं है. अयातुल्‍ला अली खामेनेई के पूर्ववर्ती अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के 1989 में अंतिम संस्कार के वक्‍त लाखों लोगों की भीड़ उमड़ी थी. हालांकि, अली खामेनेई के लिए वैसा अंतिम संस्कार आयोजित नहीं किया जा सका क्योंकि इजरायल ने कई हफ्तों तक ईरान पर बमबारी जारी रखी. 

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डरा हुआ है ईरानी शासन, जोखिम नहीं उठा सकता: तालेब्‍लू

बेहनम तालेब्लू ने कहा, "सीधे शब्दों में कहें तो शासन इतना डरा हुआ और इतना कमजोर है कि जोखिम नहीं उठा सकता है."

ईरान के भव्य समारोह से बचने के कई कारण हैं. विशेषज्ञ के अनुसार, देश इजरायल की ओर से संभावित हवाई हमलों और राष्ट्रवादी विरोध प्रदर्शनों की आशंका से डरा हुआ है. 

इस पहेली का एक और पहलू नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई हैं, जो अपनी अनुपस्थिति को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. अयातुल्‍ला अली खामेनेई के निधन को कई सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन मोजतबा सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं. यदि मुजतबा के पिता को दफनाने का निर्णय लिया जाता है तो उन्‍हें उसे अपनी अनुपस्थिति को लेकर भी स्पष्टीकरण देना होगा. 

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50 दिनों का इंटरनेट बंद ने सबकुछ कह दिया: तालेब्‍लू

तालेब्लू ने कहा कि यह बात बहुत कुछ कहती है कि 1989 में शासन को स्‍थापित करने वाले शख्‍स के अंतिम संस्कार में इतनी भारी भीड़ उमड़ी थी और फिर एक पीढ़ी बाद उनके उत्तराधिकारी का अंतिम संस्कार एक महीने से अधिक समय बाद भी नहीं हो सका है. 

उन्होंने आगे कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक सड़कों पर अपना दबदबा दिखाने की बड़ी-बड़ी बातें करता है, लेकिन 50 दिनों का इंटरनेट बंद ही सब कुछ साफ कर देता है. शासन को सच सामने आने के परिणामों का डर है.”

रिपोर्ट के मुताबिक, शासन पूर्वोत्तर शहर मशहद में दफनाने के लिए स्‍थान तलाश रहा है. यह खामेनेई का गृह नगर है और ईरान की तुर्कमेनिस्तान सीमा पर स्थित है, जो इजरायल से काफी दूर है. 
 

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अभिषेक पारीक
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