- मई और जून में अब तक शिमला के तीन एंट्री पॉइंट्स से 15 लाख से ज्यादा गाड़ियों की आवाजाही हुई.
- शिमला में पुलिस ने 220 पुलिस-होमगार्ड, 50 से ज्यादा वालंटियर्स और 32 ट्रैफिक बाइक राइडर्स तैनाती की है.
- साथ ही वैकल्पिक रास्ते, सीसीटीवी, वनवे सिस्टम और क्रेनों की मदद से ट्रैफिक पर दबाव कम करने की मुहिम चल रही है.
गर्मियों की छुट्टियों के साथ हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला एक बार फिर पर्यटकों से गुलजार हो गई है. पहाड़ों की रानी कहलाने वाले इस शहर में इस बार पर्यटकों की संख्या ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं. हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि मई और जून के केवल 45 दिनों में करीब 15 लाख वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई है. इतनी बड़ी संख्या के बावजूद शिमला पुलिस का दावा है कि विशेष ट्रैफिक प्रबंधन व्यवस्था के कारण शहर में यातायात को काफी हद तक सुचारु बनाए रखा गया है.
शिमला जिले में मई-जून के 45 दिनों के दरम्यान करीब 15 लाख गाड़ियों का आवागमन हुआ है.

शिमला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस) IPS गौरव सिंह
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शिमला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस) IPS गौरव सिंह ने NDTV को बताया, "मई 2026 में शोगी, बिलासपुर और किन्नौर की ओर से आने वाले प्रमुख प्रवेश मार्गों पर करीब 8.5 लाख वाहनों की आवाजाही दर्ज हुई. वहीं जून माह में अब तक लगभग 6.5 लाख वाहन इन एंट्री पॉइंट्स से शहर और आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंचे हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि इस बार पर्यटन सीजन में शिमला पर वाहनों का दबाव पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक है."

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जाम न लगे इसके लिए क्या उपाय कर रही है शिमला ट्रैफिक पुलिस?
उन्होंने विस्तार से बताया कि बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए पुलिस ने पांच सूत्रीय रणनीति लागू की है. इसमें अतिरिक्त पुलिस बल और होमगार्ड की तैनाती, ट्रैफिक बाइक राइडर्स की संख्या में वृद्धि, इंटरसेप्टर वाहनों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और वैकल्पिक मार्गों को बढ़ावा देने जैसे कई कदम उठाए गए हैं.

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सबसे बड़ा बदलाव पुलिस बल की संख्या में देखने को मिला है. वर्ष 2025 में जहां ट्रैफिक प्रबंधन के लिए 136 पुलिस और होमगार्ड कर्मी तैनात थे, वहीं इस वर्ष उनकी संख्या बढ़ाकर 220 कर दी गई है. इसके अलावा 50 से अधिक सिविल वालंटियर्स, एनसीसी और एनएसएस के छात्र-छात्राएं भी यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सहयोग कर रहे हैं.
तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए ट्रैफिक बाइक राइडर्स की संख्या 7 से बढ़ाकर 32 कर दी गई है. ये बाइक राइडर्स ट्रैफिक जाम, दुर्घटना या किसी अन्य आपात स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचकर व्यवस्था संभाल रहे हैं. साथ ही इंटरसेप्टर वाहन भी विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किए गए हैं ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखी जा सके.

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पांच सेक्टर में बांटा गया शिमला शहर
शहर में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पूरे शिमला को पांच सेक्टरों में बांटा गया है. सभी सेक्टर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हैं और प्रत्येक सेक्टर की जिम्मेदारी एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है. इससे ट्रैफिक की स्थिति पर रियल टाइम नजर रखना आसान हुआ है.
शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम करने के लिए पुलिस लगातार वैकल्पिक मार्गों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है.

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कौन से वैकल्पिक मार्ग इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है?
एसएसपी गौरव सिंह ने बताया कि मशोबरा, कुफरी, नारकंडा, ठियोग और किन्नौर जाने वाले पर्यटकों को शोगी-मेहली बाईपास मार्ग का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है. वर्तमान में प्रतिदिन औसतन लगभग 800 वाहनों को इस मार्ग की ओर डायवर्ट किया जा रहा है.
इसी तरह नारकंडा, रामपुर और किन्नौर की तरफ से चंडीगढ़ और दिल्ली जाने वाले वाहनों को ढली बाईपास के जरिए भेजा जा रहा है ताकि वे अनावश्यक रूप से शहर के भीतर प्रवेश न करें और ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा न हो.
पुलिस ने कई छोटे मार्गों को वन-वे बनाकर उनका बेहतर उपयोग शुरू किया है. इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से ट्रैफिक जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है.

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शिमला पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए जा रहे सूचनात्मक और शैक्षिक वीडियो लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं और यात्रियों को ट्रैफिक नियमों तथा वैकल्पिक मार्गों की जानकारी दे रहे हैं.
सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए ट्रैवलर, अर्बेनिया, स्कैनिया और अन्य सार्वजनिक वाहनों को कार्ट रोड और प्रमुख पर्यटन स्थलों तक संचालित करने की अनुमति दी गई है. जाखू मंदिर, मॉल रोड, लिफ्ट और लक्कड़ बाजार जैसे क्षेत्रों तक सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देकर निजी वाहनों की संख्या कम करने का प्रयास किया जा रहा है.

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ट्रैफिक मैनेजमेंट में क्रेन भी शामिल
शिमला की संकरी सड़कों पर यदि कोई वाहन खराब हो जाए तो पूरा ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है. ऐसी स्थिति से तुरंत निपटने के लिए पुलिस ने विभिन्न सेक्टरों में तीन क्रेन तैनात की हैं. ये क्रेन तत्काल मौके पर पहुंचकर खराब वाहनों को हटाती हैं और यातायात को सामान्य बनाने में मदद करती हैं.
पर्यटन शिमला और हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है. ऐसे में लाखों पर्यटकों का स्वागत करना और साथ ही स्थानीय लोगों की सुविधा का ध्यान रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है.

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फिलहाल पुलिस का दावा है कि नई रणनीति, अतिरिक्त संसाधनों और तकनीक की मदद से इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा रहा है.
शिमला पुलिस ने सभी पर्यटकों का स्वागत करते हुए अपील की है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें, निर्धारित पार्किंग स्थलों का उपयोग करें और पुलिस द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक मार्गों को अपनाएं, ताकि पर्यटन सीजन के दौरान भी पहाड़ों की रानी की रफ्तार बनी रहे.
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