तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में 16 जून को लोग उस समय आश्चर्य में पड़ गए जब आसमान में एक सैन्य हेलीकॉप्टर को उड़ते देखा.सीमाई इलाकों में हेलिकॉप्टर का उड़ना आम बात होती है, लेकिन दूसरे इलाकों में आज भी हेलिकॉप्टर लोगों में कौतूहल भर देता है. आपको बता दें कि तिरुनेलवेली में सेना का हेलिकॉप्टर NEET परीक्षा का पेपर पहुंचाने गया था. दरअसल इस साल मई के पहले हफ्ते में NEET की परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन उसका पेपर आउट हो गया था. इसके बाद NEET की परीक्षा 21 जून को दोबारा कराई जा रही है. सरकार ने इस बार पेपर को स्ट्रांगरूम तक सुरक्षित पहुंचाने का जिम्मा वायुसेना को सौंपा है. भारतीय वायुसेना ने इसके लिए C-17 Globemaster और Mi-17 हेलिकॉप्टर को लगाया है. आइए हम आपको बताते हैं कि NEET के पेपर पहुंचाने के इस बार कैसे इंतजाम किए गए हैं.
सरकारी अधिकारी इस बार परीक्षार्थियों और उनके माता-पिता और अभिभावकों को भरोसा दिला रहे हैं कि इस बार परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाएगी. यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं.सरकार ने NEET के 22 लाख परीक्षार्थियों, उनके माता-पिता और अभिभावकों का भरोसा जीतने के लिए सुरक्षा का एक बड़ा प्लान तैयार किया है.
कैसे हैं NEET परीक्षा के लिए सुरक्षा इंतजाम
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भारत और विदेशों में पांच लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. परीक्षा केंद्रों पर तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है. अधिकारियों ने परीक्षा केंद्रों पर कई चेकप्वाइंट बनाए हैं. छात्रों को हाल में प्रवेश करने के लिए सुरक्षा की तीन परतों से गुजरना होगा. इस बार सुचारु रूप से परीक्षा कराने के लिए स्मार्ट टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल हो रहा है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कहा है कि हर परीक्षा केंद्र में फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और बायोमेट्रिक (अंगूठे के निशान) अटेंडेंस की सुविधा होगी. हाई-डेफिनेशन CCTV कैमरे सीधे दिल्ली में स्थित एनटीए के कंट्रोल रूम को लाइव वीडियो फीड भेजेंगे.इसके साथ ही सरकार ने परीक्षा से पहले ही टेलीग्राम पर रोक लगा दी है. इसका मकसद लीक और गलत जानकारी को फैलने से रोकना है. टेलीग्राम पर यह रोक 22 जून तक लगी रहेगी.

सरकार NEET की परीक्षा में किसी भी तरह की धांधली को रोकने के लिए मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर 22 जून तक के लिए रोक लगा दी है. पेपर लीक में इस ऐप का अधिक इस्तेमाल होने की खबरें मिलती रही हैं.
NEET परीक्षा की सुरक्षा में इस बार नया क्या है
शिक्षा मंत्रालय ने पिछली बार सामने आई कमियों को दूर करने के लिए क्वेश्चन पेपर संभालने के पुराने तरीकों को बदल दिया है. मंत्रालय ने शुरुआत से ही लीक को रोकने के लिए NEET का पेपर बनाने वाले, उनका अनुवाद करने वाले और उन्हें जांचने वाले शिक्षकों और विशेषज्ञों को एक सुरक्षित और गुप्त जगह पर रखा है. ये लोग परीक्षा खत्म होने तक मोबाइल फोन-इंटरनेट से दूर और पूरी तरह अलग-थलग रहेंगे.
इससे पहले क्वेश्चन पेपर को शहर के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) या केनरा बैंक की मुख्य शाखा के स्ट्रांगरूम में रखा जाता था. लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा. इस बार क्वेश्चन पेपर भारी सुरक्षा में सीधे परीक्षा केंद्र तक पहुंचाए जाएंगे.क्वेश्चन पेपर के ट्रांसपोर्टेशन चेन को हर स्तर पर सुरक्षित रखने के लिए सीआरपीएफ और सीआईएसएफ के जवानों को तैनात किया गया है.
सिग्नल जैमर से AI कैमरे तक
सरकार ने मोबाइल डेटा, ब्लूटूथ और वाई फाई सिग्नल को पूरी तरह ब्लॉक करने के लिए सेंटर्स पर हाई पावर वाले 5G जैमर लगाए हैं. इसके साथ ही, AI-इनेबल्ड कैमरे लगातार क्लासरूम की निगरानी करेंगे. इसका मकसद किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी सेंट्रल कमांड हेडक्वार्टर को देना है. परीक्षा खत्म होने के बाद एनटीए सभी सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से फोरेंसिक जांच करेगा. इससे ऐसी छोटी-मोटी गड़बड़ी या गलत हरकत का पता लगाया जाएगा, जो रियल-टाइम में निगरानी में पकड़ में न आ पाई हों.
NEET के क्वेश्चन पेपर परीक्षा केंद्रों तक कैसे पहुंचेंगे
एनटीए के लिए क्वेश्चन पेपर को सुरक्षित पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है. इसके लिए अधिकारियों ने पेपर को सुरक्षित रखने के लिए एक चरण-दर-चरण रूटप्लान तैयार किया है. इसी योजना के तहत भारतीय वायु सेना के C-17 ग्लोबमास्टर और Mi-17 हेलीकॉप्टर जैसे भारी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल कर क्वेश्चन पेपर के पैकेट देश भर में बने 18 से 20 क्षेत्रीय हबों तक पहुंचा रहे हैं. दूर-दराज और मुश्किल इलाकों में क्वेश्चन पेपर को पहुंचाने के लिए वायुसेना एमआई-17 हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर रही है. क्वेश्चन पेपर को क्षेत्रीय हब तक हवाई मार्ग से पहुंचाने के बाद पेपर को कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था के साथ आगे भेजा जा रहा है. क्वेश्चन पेपर को सड़क मार्ग से ले जाने में राज्य पुलिस की मदद के लिए सीआरपीएफ और सीआईएसएफ को तैनात किया गया है.
क्वेश्चन पेपर को सड़क मार्ग से ले जाते समय जीपीएस सक्षम ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है. वहीं जिस बॉक्स में पेपर रखा जा रहा है, उसे डिजिटल लॉक से सील किया जाता है. इसे इस तरह से प्रोग्राम किया गया है कि वे केवल विशिष्ट केंद्र पर परीक्षा के निर्धारित समय पर ही खुलें.
किन राज्यों में परीक्षार्थियों के लिए मुफ्त बस सेवा
दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और हरियाणा जैसी सरकारों ने परीक्षार्थियों को बिना किसी परेशानी या आर्थिक बोझ के यात्रा करने में मदद करने के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधाएं देने की घोषणा की है. इसी के तहत रेलवे ने एक खास कंट्रोल रूम बनाया है. रेलवे ने परीक्षार्थियों को उनके परीक्षा वाले शहरों तक पहुंचाने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने की व्यवस्था की है.
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