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ईरान से जुड़े हैकर ग्रुप का दावा- 'FBI के ड्रोन हैक कर लिए, अमेरिका में FIFA मैच को बनाएंगे निशाना'

अमेरिकी न्याय विभाग ने पहले ही ईरानी लोगों द्वारा साइबर हमलों की संभावना के बारे में चेतावनी दी थी. ये चेतावनी फरवरी में तेहरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद दी गई थी.

ईरान से जुड़े हैकर ग्रुप का दावा- 'FBI के ड्रोन हैक कर लिए, अमेरिका में FIFA मैच को बनाएंगे निशाना'
नई दिल्ली:

एक मॉनिटरिंग ग्रुप ने शुक्रवार को बताया कि ईरान से जुड़े हैकर ग्रुप ने FBI के ड्रोन को हैक करने का दावा किया है और इस हफ़्ते शुरू हुए फुटबॉल वर्ल्ड कप को निशाना बनाने की धमकी दी है. जिहादी ग्रुप्स पर नज़र रखने वाली संस्था 'SITE इंटेलिजेंस ग्रुप' ने 'हंडाला' का एक बयान जारी किया. इसमें कहा गया है कि उन्हें FBI के इस्तेमाल किए जाने वाले 'फर्स्ट-पर्सन व्यू' (FPV) ड्रोन से ली गई हर तस्वीर और हर संदिग्ध तक महीनों से पहुंच हासिल थी.

एएफपी की खबर के मुताबिक, हैकरों ने कहा कि इन ड्रोन में आतंकवाद-रोधी कार्रवाई के लिए फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने की तकनीक) और लाइसेंस प्लेट की जांच करने की सुविधा थी.

SITE के हवाले से हंडाला ने बयान में कहा, "वर्ल्ड कप की सुरक्षा बेहतर कर लें, हमें उनमें से कुछ टीमें बिल्कुल पसंद नहीं हैं. भूलें नहीं- FPV हर जगह है, आप कभी नहीं जानते कि कब कोई आपकी टीम की बस के अंदर आ जाए."

FBI अनधिकृत विमानों से सुरक्षा के लिए वर्ल्ड कप स्टेडियमों के आस-पास ड्रोन तैनात कर रही है. मैच की मेज़बानी करने वाले अमेरिकी स्टेडियमों और गुरुवार से शुरू हुए टूर्नामेंट से जुड़े फैन इवेंट्स के ऊपर ड्रोन उड़ाने पर रोक रहेगी.

न्याय विभाग ने पहले ही ईरानी लोगों द्वारा साइबर हमलों की संभावना के बारे में चेतावनी दी थी. यह चेतावनी फरवरी में तेहरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद दी गई थी, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध छिड़ गया था.

हंडाला ने ऐसी तस्वीरें और फुटेज जारी किए जिनके बारे में उनका दावा था कि वे हैक किए गए ड्रोन से लिए गए थे, लेकिन SITE ने इस दावे को गलत बताया.

SITE ने कहा कि कथित हैक का एक वीडियो असल में दिसंबर 2024 में एक सॉफ्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म ने बनाया था. इसे अमेरिकी पुलिस विभाग द्वारा अपनी तकनीक का इस्तेमाल करके बवंडर से हुए नुकसान का सर्वे करने के प्रचार के लिए बनाया गया था.

हंडाला ने मार्च में FBI डायरेक्टर काश पटेल का ईमेल अकाउंट हैक करने और उनकी निजी तस्वीरें और अन्य सामग्री ऑनलाइन जारी करने का दावा किया था.

अमेरिकी विदेश विभाग ने इस ग्रुप के सदस्यों की पहचान करने में मदद करने वाली जानकारी के लिए 10 मिलियन डॉलर तक के इनाम की पेशकश की है.

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