Iran US War: ईरान युद्ध के चलते जहां पूरी दुनिया पर आर्थिक संकट का खतरा मंडरा रहा है, वहीं जर्मनी के बिजनेस में अचानक जबरदस्त उछाल आया है. गुरुवार को आए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में जर्मनी का एक्सपोर्ट उम्मीद से उलट 0.9% बढ़कर 137.9 अरब यूरो (करीब 15.03 लाख करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है. इस बंपर मुनाफे के पीछे सबसे बड़ा हाथ अमेरिका और चीन का रहा, जिन्होंने जर्मनी से जमकर खरीदारी की है.
मंदी के बीच कैसे हुआ फायदा?
फाइनेंशियल डेटा फर्म FactSet के सर्वे में एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाया था कि युद्ध के हालातों को देखते हुए इस बार जर्मनी के एक्सपोर्ट में 1% की गिरावट आएगी. लेकिन जर्मनी की अर्थव्यवस्था ने इन सभी अनुमानों को गलत साबित करते हुए सबको चौंका दिया. यह लगातार चौथा महीना है जब जर्मनी का एक्सपोर्ट बढ़ा है. इससे साफ होता है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बावजूद यूरोप की यह सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था मुश्किल हालातों से बेहतर तरीके से निपट रही है.
अमेरिका-चीन ने कैसे बदली जर्मनी की किस्मत?
जर्मनी को मिले इस बड़े फायदे में सबसे बड़ा रोल अमेरिका का रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान जर्मनी के सामानों का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका ही बना रहा. मई के महीने में अमेरिका को होने वाला एक्सपोर्ट महीने-दर-महीने (MoM) के आधार पर 23.1% बढ़कर 14.1 अरब यूरो (करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये) पर पहुंच गया. दूसरी तरफ, चीन को होने वाले एक्सपोर्ट में भी 7.1% की बढ़त देखी गई, जो बढ़कर 6.2 अरब यूरो (करीब 68 हजार करोड़ रुपये) रहा. इन दोनों बड़े देशों की भारी डिमांड ने जर्मनी की चांदी कर दी.
चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने संसद में पेश किए आंकड़े
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने गुरुवार को संसद में इन आंकड़ों पर खुशी जताई. उन्होंने कहा, 'ये जर्मनी की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अच्छे और हौसला बढ़ाने वाले संकेत हैं, हालांकि कुछ सेक्टर्स अब भी गहरे संकट से जूझ रहे हैं.' इस हफ्ते की शुरुआत में आए आंकड़ों से यह भी पता चला था कि मई में जर्मनी का इंडस्ट्रियल आउटपुट और नए ऑर्डर्स भी बढ़े हैं, जो आर्थिक मजबूती का संकेत हैं.
यूरोपीय देशों से घटा व्यापार, फिर भी बढ़ा मुनाफा
एक तरफ जहां अमेरिका और चीन के साथ जर्मनी का बिजनेस चमका, वहीं दूसरी तरफ यूरोपीय यूनियन (EU) के बाकी देशों को होने वाले एक्सपोर्ट में 1.1% की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा, मई में जर्मनी का इम्पोर्ट भी 2.5% घटकर 118.8 अरब यूरो (करीब 12.95 लाख करोड़ रपये) रह गया. इम्पोर्ट घटने और एक्सपोर्ट बढ़ने की वजह से जर्मनी का ट्रेड सरप्लस बढ़कर 19.1 अरब यूरो (करीब 2.08 लाख करोड़ रुपये) हो गया है. हालांकि, सरकार का मानना है कि ईरान युद्ध के असर के चलते इस साल देश की ओवरऑल इकॉनमी ग्रोथ 0.5% के आसपास ही सिमट सकती है.
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