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ट्रंप की जंग से ईरान की हुई चांदी, होर्मुज घेरकर हर दिन 1300 करोड़ की हो रही कमाई- रिपोर्ट

US Iran War and Oil Crisis: ईरानी कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज अभी भी खार्ग द्वीप टर्मिनल पर तेल लोड कर रहे हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते बाहर जा रहे हैं. वहीं दूसरे तेल उत्पादक देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत नहीं है.

ट्रंप की जंग से ईरान की हुई चांदी, होर्मुज घेरकर हर दिन 1300 करोड़ की हो रही कमाई- रिपोर्ट
US Iran War and Oil Crisis: जंग के बीच तेल बेचकर कमाई कर रहा ईरान
  • अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध के बीच ईरान ने होर्मुज के जरिए तेल निर्यात बढ़ाकर बड़ी कमाई की है- रिपोर्ट
  • ईरान का मुख्य कच्चा तेल ग्रेड चीन को ब्रेंट तेल के मुकाबले पिछले दस महीनों में सबसे कम छूट पर बिक रहा है
  • युद्ध के कारण ब्रेंट तेल की कीमत सौ डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई जिससे ईरान की तेल बिक्री में लाभ हुआ है
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US Israel War against Iran: अमेरिका और इजरायल की छेड़ी जंग ईरान के लिए आपदा में कमाई का अवसर बन गई है. ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद से तेल बेचकर संभवतः हजारों करोड़ रुपए की अतिरिक्त कमाई की है. इसकी वजह यह है कि उसके कच्चे तेल की कीमत बढ़ गई, क्योंकि वह एकमात्र बड़ा निर्यातक देश बन गया जो होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल कर पा रहा है. यह रिपोर्ट ब्लूमबर्ग ने छापी है. बता दें कि होर्मुज दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है.

रिपोर्ट के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद कीमतों में हुए बदलाव से इस्लामिक गणराज्य ईरान को दो तरह से फायदा हो रहा है. पहला तो उसका मुख्य कच्चा तेल ग्रेड, जिसे ज्यादातर चीन के ग्राहकों को बेचा जा रहा है, अब ब्रेंट तेल के मुकाबले पिछले 10 महीनों में सबसे कम छूट (डिस्काउंट) पर बिक रहा है. दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट तेल की कीमत भी बमबारी शुरू होने के बाद 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई है. यहां भी ईरान की खूब कमाई हो रही है.

अनुमान है कि इस महीने ईरान का तेल निर्यात युद्ध से पहले के स्तर, यानी लगभग 16 लाख बैरल प्रति दिन, के करीब ही बना हुआ है. ईरानी कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज अभी भी खार्ग द्वीप टर्मिनल पर तेल लोड कर रहे हैं और फारस की खाड़ी से होते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते बाहर जा रहे हैं. खास बात है कि हाल के दिनों में यह गतिविधि और तेज हुई है. वहीं दूसरी तरफ ईरान अन्य खाड़ी तेल उत्पादकों के शिपमेंट को होर्मुज से गुजरने नहीं दे रहा है.

अमेरिका ही ईरान से तेल बेचने की गुहार लगा रहा- एक्सपर्ट

भले ही अमेरिका और इजरायल हर दिन ईरान पर हवाई हमला कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ तेल बेचकर ईरान अपनी वित्तीय जीवनरेखा बनाए रखने में सक्षम रहा है. ईरान की इस क्षमता के कारण अमेरिका और इजरायल के सैन्य प्रयास कमजोर पड़ गए हैं. ब्लूमबर्ग की इस रिपोर्ट के अनुसार ईरानी सरकार को और ज्यादा फायदा हो सकता है क्योंकि अमेरिका खुद युद्ध के तेल की कीमतों पर असर को कम करना चाहता है. अमेरिकी सरकार ने एक आश्चर्यजनक कदम उठाते हुए उन ईरानी तेल के भंडार पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया जो पहले से ही टैंकरों में समुद्र में मौजूद थे.

इस रिपोर्ट के अनुसार कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑन ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी में सीनियर रिसर्च स्कॉलर रिचर्ड नेफ्यू ने कहा कि “ट्रंप सरकार तो लगभग ईरान से तेल बेचने की गुहार लगा रही है. मुझे लगा था कि अमेरिका के लिए ईरानी तेल की बिक्री को रोकना प्राथमिकता होगी.”  रिचर्ड नेफ्यू पहले अमेरिकी विदेश विभाग में ईरान के लिए उपदूत और प्रतिबंध लगाने की नीति के समन्वयक (कॉर्डिनेटर) रह चुके हैं.

रिपोर्ट में लिखा गया है कि टैंकरट्रैकर्स डॉट कॉम के निर्यात अनुमान और ईरान के मुख्य तेल ग्रेड ईरानियन लाइट की कीमतों के आधार पर, ईरानी सरकार ने मार्च में अब तक अपने मुख्य ईरानियन लाइट कच्चे तेल की बिक्री से लगभग 139 मिलियन डॉलर प्रतिदिन कमाए होंगे. फरवरी में यह लगभग 115 मिलियन डॉलर प्रतिदिन था.

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तेल की बढ़ी कीमत ईरान के लिए जंग में बड़ी राहत

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट के मुकाबले ईरान के तेल की अब ज्यादा मांग हो रही है. इस सप्ताह की शुरुआत में इसका डिस्काउंट घटकर 2.10 डॉलर प्रति बैरल रह गया, जो लगभग एक साल में सबसे कम है. युद्ध से पहले यह अंतर 10 डॉलर से ज्यादा था. हर बैरल पर मिलने वाली ज्यादा कीमत ईरान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों से देश को भारी नुकसान हुआ है और अपनी बुरी तरह प्रभावित अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए उसे बड़े निवेश की जरूरत होगी. ईरान ने जवाबी हमलों में भी बहुत सारे हथियार इस्तेमाल किए हैं, जिन्हें अब फिर से भरना पड़ेगा.

इनपुट- ब्लूमबर्ग रिपोर्ट

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