- इजरायल-अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए हैं.
- ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने और इसके माध्यम से गुजरने वाले जहाजों पर हमले की धमकी दी है.
- होर्मुज बंद होने से विश्व तेल सप्लाई प्रभावित होगी, जिससे भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा.
इजरायल-अमेरिका के हमले के बाद ईरान बुरी तरह से भड़का है. सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों और सैन्य कमांडरों की इस हमले में मौत हो गई. ईरान के कई शहर इस हमले में तबाह हो गए. अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार इजरायल-अमेरिका के इस हमले में ईरान में 787 से अधिक लोगों की मौत हो हुई है. इस हमले के बाद ईरान ने भी इजरायल सहित गल्फ के देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. ईरान के हमले में भी गल्फ के देशों भारी नुकसान पहुंचा है. मिडिल ईस्ट में जारी यह जंग थमने का नाम नहीं ले रही है. अब ईरान ने वर्ल्ड इकोनॉमी को प्रभावित करने वाला बड़ा सख्त फैसला ले लिया है. ईरान समुद्री तेल व्यापार के रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को सख्ती से बंद करने का ऐलान कर दिया है. ईरान का साफ कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट से एक बूंद तेल भी नहीं जाने देंगे.
IRGC का ऐलान- होर्मुज स्ट्रेट से जहाज गुजरा तो करेंगे आग के हवाले
सोमवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ऐलान किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब बंद है. IRGC के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल सरदार इब्राहिम जब्बारी ने चेतावनी दी कि अगर कोई जहाज यहां से गुजरने की कोशिश करेगा, तो गार्ड्स और नौसेना के जवान उसे आग के हवाले कर देंगे.
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की कथित अमेरिकी-इजरायली संयुक्त हमले में मौत के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है.

दुनिया के 20 फीसदी तेल व्यापार के होर्मुज स्ट्रेट अहम
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद घोषित कर जहाजों को जलाने की धमकी दी है. दूसरी ओर अमेरिका ने जलमार्ग के खुले होने का दावा किया है. लेकिन हकीकत यह है कि यह होर्मुज स्ट्रेट अभी बंद है. यह मार्ग दुनिया के 20% तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है, और किसी भी बाधा से वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकता है.
होर्मुज स्ट्रेट के पास 3 जहाजों पर हमला
हाल में होर्मुज के पास कम-से-कम तीन जहाजों पर हमले की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड आठ प्रतिशत से अधिक चढ़कर 78.72 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी कच्चा तेल 7.6 प्रतिशत बढ़कर 72.20 डॉलर पर पहुंच गया. वुड मैकेंज़ी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एलन गेल्डर ने कहा, “यदि ऊर्जा निर्यात का प्रवाह जल्दी बहाल नहीं हुआ तो कीमतों के ऊपर जाने का भारी जोखिम है.”
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