- ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का दावा किया है और चेतावनी दी.
- अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के दावे को गलत बताया और जलमार्ग खुला होने की पुष्टि की है.
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से विश्व के तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है जो वैश्विक ऊर्जा के लिए जरूरी है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे अहम तेल रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का दावा किया है. ईरान की इस कार्रवाई ने पहले से ही उबलते भू-राजनीतिक हालात को और गंभीर बना दिया है.
IRGC का ऐलान: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद'
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को स्थानीय समयानुसार घोषणा की कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब बंद है. IRGC के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल सरदार इब्राहिम जब्बारी ने चेतावनी दी कि अगर कोई जहाज यहां से गुजरने की कोशिश करेगा, तो गार्ड्स और नौसेना के जवान उसे आग के हवाले कर देंगे. यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की कथित अमेरिकी-इजरायली संयुक्त हमले में मौत के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है.

अमेरिका का दावा: जलमार्ग खुला है
ईरानी दावों के विपरीत, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला है और सभी जहाज सामान्य रूप से आवाजाही कर रहे हैं. अमेरिकी पक्ष ने ईरान के दावे को गलत बताया है.
यह भी पढ़ें- जंग के बीच अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों के लिए उड़ानें शुरू, Air India, Indigo ने जारी की ये एडवाइजरी
क्यों है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना अहम?
यह दुनिया के तेल व्यापार का करीब 20% हिस्सा संभालता है. यहां से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, UAE और ईरान का तेल गुजरता है. यह जलसंधि सिर्फ 33 किमी चौड़ी है और वैश्विक व्यापार का अहम केंद्र है. ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यहां किसी भी प्रकार की बाधा से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा संकट छा सकता है और दाम तेजी से बढ़ सकते हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का ऐतिहासिक महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सदियों से एशिया और अरब दुनिया के बीच व्यापार का मार्ग रहा है. हाल के महीनों में ईरान ने सैन्य अभ्यासों के दौरान कुछ क्षेत्रों में जहाजों की आवाजाही सीमित की थी, जिससे तेल कीमतों में 6% तक उछाल आया था. ईरान ने 1980 के दशक की टैंकर वॉर के बाद इस जलमार्ग को कभी पूरी तरह बंद नहीं किया. उस दौर में ईरान और इराक दोनों एक-दूसरे के जहाजों को निशाना बनाते थे.
यह भी पढ़ें- ईरान ने सऊदी में अमेरिकी दूतावास पर किया ड्रोन अटैक, ट्रंप बोले अभी मेरा सबसे बड़ा हमला बाकी
ईरान-इजरायल-अमेरिका टकराव: अब तक का नुकसान
तेजी से बढ़ते संघर्ष में अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 6 अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं. खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं. सऊदी अरब, UAE और ओमान पर भी मिसाइलें चलाईं. विश्लेषकों के अनुसार, अगर यह टकराव जारी रहा तो इसका सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं