- दुबई से इजरायल जा रही फ्लाइट को हाईजैक करके क्रैश करने की कोशिश के मामले में अब साजिशों वाले आरोप लगाए जा रहे
- ईरान के सरकारी मीडिया ने इस घटना को नेतन्याहू की चुनावी साजिश करार दिया है, कहा- ट्रंप को हमले के लिए उकसा रहे
- अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट में सैनिकों की तैनाती बढ़ा रही है, जिसमें दो विमान वाहक समूह और हजारों सैनिक शामिल हैं
दुबई से इजरायल जा रही फ्लाइट में जिस तरह आतंकी साजिश को अंजाम देने की कोशिश हुई, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. चाकुओं के हमले में घायल होने के बावजूद भारतीय पायलट ने हमलावर को-पायलट के मंसूबों को नाकाम कर दिया. उनका साथ कुछ इजरायली पैसेंजरों ने दिया. अब दुनिया सवाल कर रही है कि आखिर इस आतंकी साजिश के पीछे कौन था? कौन चाहता था कि इजरायली लोगों के भरी फ्लाईदुबई की फ्लाइट को हाईजैक करके क्रैश कर दिया जाए? इस बीच ईरान में एक ऐसी रिपोर्ट छपी है जिसमें अजीबोगरीब दावा किया गया है. इसके पीछे नेतन्याहू की ही साजिश बता दी गई है. दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप इस आतंकी हमले की कोशिश के पीछे ईरान का हाथ होने की आशंका जता रहे हैं और कह रहे हैं कि अगर यह साबित होता है तो ईरान को उड़ा देंगे.
ईरान की रिपोर्ट में क्या लिखा?
ईरान के सरकारी द प्रेस टीवी ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना के पीछे नेतन्याहू की साजिश का दावा किया है. इस रिपोर्ट के अनुसार घटना की जानकारी रखने वाले सूत्र ने दावा किया है कि नेतन्याहू की योजना आगामी चुनाव जीतने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ एक नई मुश्किल स्थिति में फंसाने की है.
प्रेस टीवी से बात करते हुए, एक रिजनल सूत्र ने बताया- UAE से इजरायल की ओर जा रहे UAE के प्लेन के अपहरण और फिर सऊदी अरब में उसके उतरने की अजीब घटना बुधवार को हुई. यह घटना नेतन्याहू के UAE दौरे के तीन दिन बाद हुई, जिसमें उनके साथ सेना और खुफिया विभाग के कई सीनियर अधिकारी भी गए थे. सूत्र ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर दौरे के दौरान चर्चा हुई और इसे अंतिम रूप दिया गया.
रिपोर्ट के अनुसार सूत्र ने कहा कि नेतन्याहू को इस बात की गहरी चिंता है कि अगर मौजूदा हालात में नेसेट (इजरायली संसद) के चुनाव होते हैं, तो उनका गठबंधन बहुमत हासिल करने और सरकार बनाने में नाकाम रहेगा. सूत्र ने बताया, "नेतन्याहू की बेतुकी और पहले से तय प्लेन हाईजैक की योजना के बहाने एक और मूर्खतापूर्ण हरकत करने की तैयारी चल रही है."
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अमेरिका और इजरायल किसका हाथ मान रहे?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि फ्लाईदुबई के प्लेन के साथ हुए घटना का ईरान से संबंध हो सकता है. उन्होंने कहा कि जो जानकारी उन्हें मिल रही है, उसके आधार पर इसका जवाब हां है, हालांकि अभी इसकी जांच चल रही है. एक रिपोर्टर ने ट्रंप से पूछा कि क्या उन्हें फ्लाईदुबई हमले के हमलावर और ईरान के बीच किसी संभावित संबंध के बारे में जानकारी दी गई है. ट्रंप ने कहा, "हम अभी इस पर काम कर रहे हैं. हम इस बारे में पूरी तरह खुलकर बात करेंगे. जो जानकारी मुझे मिल रही है, उसके आधार पर मैं कहूंगा कि जवाब 'हां' है, लेकिन हम अभी इस पर काम कर रहे हैं."
इस सवाल पर कि अगर ईरान इस हमले के लिए जिम्मेदार पाया जाता है तो क्या अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा, ट्रंप ने कहा, "अरे, उनपर बहुत जोरदार हमला, चिंता मत कीजिए. आप बस उनसे पूछिए. उन्हें पता है कि क्या हुआ था. उन्हें बहुत जोरदार झटका लगेगा."
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार UAE के अधिकारियों ने भी मीडिया को संकेत दिया है कि इस घटना के लिए ईरान जिम्मेदार हो सकता है. इन सबके बीच इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू कह रहे हैं कि को-पायलट 'कट्टरपंथी' था और सुसाइड मिशन पर था. इससे एक दिन पहले बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था कि अभी यह बताना बहुत जल्दीबाजी होगी कि ईरान हाईजैकिंग की असफल कोशिश में शामिल था या नहीं.
क्या अमेरिका फिर से ईरान पर हमले की तैयारी में है?
न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार एक अमेरिकी अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट में जहाजों के एक बेड़े के जरिए लगभग 9,000 सैनिक भेज रही है. अमेरिकी सेना की मौजूदगी को यह मजबूती ऐसे समय में दी जा रही है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से चेतावनी दी है कि ईरान पर नए हमले हो सकते हैं.
इससे अलग अगर ईरान पर अमेरिका के आर्थिक हमले की बात करें तो ट्रंप सरकार ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. इनमें ईरान के रेल और ऑटोमोटिव समूहों तथा इन क्षेत्रों के इंटरनेशनल सप्लायर्स को निशाना बनाया गया है.
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