- चुनाव आयोग ने 20 राज्यों में वोटर लिस्ट में छूटे हुए योग्य वोटरों को शामिल करने के लिए स्पेशल ड्राइव चलाएगा
- SIR प्रक्रिया के दौरान छूटे गए युवा और पहली बार वोट देने वाले लोग फॉर्म 6 के जरिए नाम दर्ज करा सकते हैं
- SIR के दौरान लगभग 13 करोड़ नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए, लेकिन सभी हटाए गए नाम योग्य वोटर नहीं थे
चुनाव आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है, जहां वोटर लिस्ट का 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) पूरा हो चुका है. उन्हें ऐसे योग्य वोटरों (जिनके नाम छूट गए थे) और युवा/पहली बार वोट देने वाले लोगों को लिस्ट में शामिल करने के लिए स्पेशल ड्राइव चलाने को कहा गया है.
पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'लगातार अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत, DEO और ERO छूटे हुए और पहली बार वोट देने वाले योग्य लोगों को लिस्ट में शामिल करने के लिए स्पेशल ड्राइव चलाएंगे.'
'जिनके नाम छूटे वे भी कर सकते हैं आवेदन'
26 सितंबर को जारी एक प्रेस नोट में आयोग ने कहा, 'बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पहले ही पूरा हो चुका है. कोई भी व्यक्ति जिसका नाम SIR के दौरान या उसके बाद छूट गया हो, वह अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकता है. इसमें युवा/पहली बार वोट देने वाले भी शामिल हैं. CEO को इसमें मदद करने का निर्देश दिया गया है. CEO, DEO और ERO इन वोटरों को लिस्ट में शामिल करने के लिए तुरंत एक स्पेशल ड्राइव शुरू करेंगे.'
13 करोड़ लोगों के नाम हटे
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब SIR के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से लगभग 13 करोड़ नाम हटाए गए थे. यह आंकड़ा ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए नामों का है और इसका मतलब यह नहीं है कि हटाए गए सभी लोग योग्य वोटर थे जिन्हें गलती से बाहर कर दिया गया था.
स्पेशल ड्राइव से SIR के दौरान या उसके बाद छूटे योग्य वोटर 'फॉर्म 6' का इस्तेमाल करके लगातार अपडेट करने की प्रक्रिया के जरिए लिस्ट में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकेंगे. जिला चुनाव अधिकारियों से कहा गया है कि वे लिस्ट में नाम जोड़ने की प्रक्रिया में मदद करें, जिसमें फील्ड-लेवल पर सहायता भी शामिल है.
गोवा ने रिविजन के बाद छूटे हुए नामों को ठीक करने में आने वाली चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया है. गोवा के CEO द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में चिह्नित 97 मामलों में से छह लोग विदेश में हैं और तीन पुर्तगाली पासपोर्ट धारक हैं, जबकि 88 लोगों को लिस्ट में शामिल किया जा चुका है. इन मामलों ने उन योग्य वोटरों (जो गलती से छूट गए थे) और उन लोगों (जिनकी परिस्थितियों के लिए अलग से वेरिफिकेशन की जरूरत है) के बीच अंतर करने की जरूरत को उजागर किया है. चुनाव आयोग ने कहा है कि गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी ने बूथ-लेवल अधिकारियों यानी BLO को निर्देश दिया है कि वे उन वोटरों के घर जाएं जिनके नाम छूट गए थे और उनके एनरोलमेंट फॉर्म इकट्ठा करें.
इस मामले के एक जानकार ने कहा, 'इन स्पेशल ड्राइव का मकसद यह पक्का करना है कि योग्य नागरिकों को SIR के बाद अपना नाम जुड़वाने का मौका मिले, जिनमें युवा और पहली बार वोट देने वाले भी शामिल हैं. इनका अमल इस बात पर निर्भर करेगा कि चुनाव अधिकारी छूटे हुए नामों की पहचान कितनी अच्छी तरह कर पाते हैं, आवेदकों की मदद कैसे करते हैं और तय नियमों के तहत एनरोलमेंट की रिक्वेस्ट पर कैसे कार्रवाई करते हैं.'
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