- फरवरी के अंत में ईरान ने चार सौ अस्सी मिसाइलें दागी थीं जबकि मार्च में यह संख्या घटकर मात्र चालीस रह गई है
- ड्रोन हमलों में भी साठ प्रतिशत की कमी आई है, जिससे लगता है कि ईरान की सैन्य क्षमता प्रभावित हुई है
- ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करते हुए अब अधिक सटीक और घातक हमले करने पर जोर दिया है
इज़रायल और ईरान के बीच एक दूसरे पर हमला लगातार जारी है. हालांकि इन हमलों के बीच इजरायल ने ईरानी हमेल को लेकर एक बड़ा दावा किया है. इजरायल का कहना है कि उसने ईरान के इतने मिसाइल लांचर बरबाद कर दिए हैं कि अब ईरान नए हमले नहीं कर पा रहा है. द जेरुसलम पोस्ट की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को- यानी जंग के पहले दिन- ईरान ने 480 मिसाइलें दाग़ी थीं, जबकि नौ मार्च को बस 40 मिसाइलें दाग पाया. यानी बस वह दस फ़ीसदी मिसाइलें दाग पा रहा है. पोस्ट का दावा है कि इज़रायल और अमेरिका ने उसके 75 फ़ीसदी लांचर बरबाद कर दिए हैं.
माना जा रहा है कि ईरान के पास 400 से 550 मिसाइल लांचर थे जिनमें 300 के क़रीब तबाह हो चुके हैं. यही वजह है कि मिसाइल ही नहीं, ड्रोन हमलों में भी कमी आई है. ड्रोन हमले भी अब 60 फ़ीसदी घट गए हैं. हालांकि ईरान के सूत्र कुछ और दावा करते हैं. उनका कहना है कि उन्होंने अब रणनीति बदल दी है. अब वे अपने जवाब को और लंबा और घातक बनाए रखना चाहते हैं. तो ज़ोर संख्या पर नहीं, सटीक निशाने पर है.
इसके अलावा ईरान आर्थिक मोर्चे पर भी अमेरिका-इज़रायल को परेशान करने की कोशिश में है. होर्मुज की खाड़ी में कारोबारी जहाज़ जितने दिन रुके रहेंगे, दुनिया में उतनी ही बेचैनी फैलेगी और अमेरिका-इज़रायल के ख़िलाफ़ गुस्सा भी बढ़ेगा. ईरान का ये भी दावा है कि उसने अपनी सबसे ख़तरनाक मिसाइलें आने वाले दिनों के लिए बचा रखी हैं. यही नहीं, वह अपनी मिसाइलों में पहले से ज़्यादा विस्फोटक भर रहा है. पहले उनमें 400 से 500 किलो तक विस्फोटक होते थे, अब एक टन से दो टन के क़रीब होते हैं. तो लग रहा है कि युद्ध अभी खिंचेगा- वह ज़्यादा ख़तरनाक होगा, दुनिया और परेशान होगी. सवाल है, क्या युद्धरत नेताओं पर ऐसा दबाव बन पाएगा कि वे इस युद्ध से अपने पांव पीछे खींच लें? यानी मिसाइल और ड्रोन हमलों में कमी की वजह को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं. एक तरफ अमेरिका और इजरायल इसे अपनी सफलता बता रहे हैं. वहीं ईरान इसे नई सैन्य रणनीति बता रहा है.
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