- ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर दिया है और अपने दुश्मनों को तेल निर्यात नहीं करने का ऐलान किया है
- अमेरिकी ऊर्जा सचिव ने दावा किया था कि सेना ने तेल टैंकर को होर्मुज से सुरक्षित पार कराया था, फिर पोस्ट हटाया
- व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तेल टैंकर को सुरक्षा नहीं दी है
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की शुरू की गई जंग पूरे मिडिल ईस्ट में पांव पसार चुकी है. इस जंग ने तेल की कीमतों में भी आग लगा रखी है क्योंकि तेल व्यापार के लिए दुनिया के सबसे अहम चोकपॉइंट होर्मुज के जलडमरूमध्य को ईरान ने ब्लॉक कर दिया है. ईरान ने कहा है कि वह अपने दुश्मनों को "एक लीटर भी" तेल भेजने की अनुमति नहीं देगा. ऐसे में अमेरिका की तरफ से X पर डाले गए एक पोस्ट ने खलबली मचा दी, जिसे कुछ ही मिनट बाद डिलीट भी कर दिया गया है.
अमेरिका के उर्जा सचिव क्रिस राइट ने इस पोस्ट में दावा किया था कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज से गुजर रहे एक तेल टैंकर को सुरक्षा के साथ (एस्कॉर्ट करना) आगे बढ़ाया ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति जारी रहे. यह दावा बड़ा था और इससे पहले से अस्थिर तेल बाजार में और भ्रम पैदा हो गया. यह पोस्ट डालने के कुछ ही मिनट बाद हटा दी गई, लेकिन इससे बाजार में बिकवाली शुरू हो गई और तेल की कीमतें तेजी से गिर गईं. इसके बाद अमेरिकी सरकार (व्हाइट हाउस) को आगे आकर स्पष्ट करना पड़ा कि ऐसा कोई एस्कॉर्ट नहीं किया गया था. यानी किसी टैंकर को सुरक्षा देकर होर्मुज क्रॉस नहीं करवाया. ईरान ने भी मौका पर चौका मारा और यहां तक कही दिया कि अमेरिका की इतनी हिम्मत नहीं कि वो होर्मुज में अपनी सेना भेज सके.
डिलीट किए गए पोस्ट में क्या लिखा था?
क्रिस राइट ने X पर एक पोस्ट में लिखा था, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान वैश्विक ऊर्जा की स्थिरता बनाए हुए हैं.” उन्होंने आगे लिखा, “अमेरिकी नौसेना ने सफलतापूर्वक एक तेल टैंकर को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित रूप से पार कराया ताकि तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचता रहे.”

लेकिन सच्चाई कुछ और थी
अमेरिका के उर्जा सचिव क्रिस राइट की पोस्ट के बाद तेल की कीमतों में गिरावट और तेज हो गई. इसके बाद व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका ने होर्मुज से किसी भी तेल टैंकर को एस्कॉर्ट नहीं किया है.
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी (LNG) की खेप गुजरती है. सफाई देते हुए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “मैं पुष्टि कर सकती हूं कि इस समय अमेरिकी नौसेना ने किसी टैंकर या जहाज को एस्कॉर्ट नहीं किया है, हालांकि यह एक विकल्प जरूर है.”
होर्मुज सुरक्षित नहीं
1 से 10 मार्च के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में या उसके आसपास कम से कम 10 तेल टैंकरों पर हमले हुए, उन्हें निशाना बनाया गया या हमलों की रिपोर्ट मिली. यह जानकारी यूके समुद्री व्यापार संगठन, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन और ईरानी अधिकारियों द्वारा जुटाए गए आंकड़ों से सामने आई है. यह असामान्य घटना ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक तेल बाजार में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव हो रहा है. व्यापारी इस बात के ठोस सबूत तलाश रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन फारस की खाड़ी में फंसे लाखों बैरल तेल को बाहर निकालने के लिए क्या कदम उठा रहा है.
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज के जरिए लगभग पूरा व्यावसायिक व्यापार रुक गया है, क्योंकि जहाज मालिक सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. इसके कारण टैंकर खाड़ी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, भंडारण भर गया है और उत्पादकों को उत्पादन तेजी से कम करना पड़ा है. सऊदी अरब, कुवैत, इराक और संयुक्त अरब अमीरात सभी रोजाना लाखों बैरल कम तेल उत्पादन कर रहे हैं. ऐसे में इस समुद्री रास्ते से सामान्य यातायात बहाल करना बहुत जरूरी हो गया है.
लेकिन मंगलवार को तो ईरान ने कहा कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, फारस की खाड़ी से कोई तेल निर्यात नहीं किया जाएगा. युद्ध शुरू होने से पहले, रोज औसतन 138 जहाज होर्मुज से गुजरते थे.
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