Viral Video: इंडियन ट्रैवल यूट्यूबर अभिषेक बिश्नोई चीन के झांगजियाजी शहर की एक छोटी-सी सब्जी और फल मंडी पहुंचे. उन्होंने अपने इस सफर का व्लॉग अपने यूट्यूब चैनल Abhishek Bishnoi पर पोस्ट किया और दिखाया कि चीन की एक नॉर्मल-सी सब्जी मंडी भारत की सब्जी मंडी से कैसे अलग होती है. 513K फॉलोअर्स वाले इस चैनल पर अभिषेक ने Inside China's Most Unbelievable Market You Won't Believe This टाइटल से इस व्लॉग वीडियो को डाला है और इसे अब तक 2.4 मिलियन व्यूज मिले हैं.
भारत से कितनी अलग थी चीन की सब्जी मंडी
जैसे इंडिया में सब्जीवाले बोलते हैं कि आलू 10 रुपए किलो है, प्याज 20 रुपए किलो है, वैसे ही चीन के अंदर भी यही सेम सिस्टम है. वहां भी सब्जी बेचने वाले दुकानदार छोटे स्पीकर लगाकर कस्टमर को बुलाते हैं. भारत की तरह वहां भी सब्जीवाले जमीन पर टोकरियां रखकर आलू, टमाटर, खीरा, धनिया, हरा प्याज से लेकर शलजम बेच रहे थे. उन्होंने बताया कि भारत की सब्जी मंडी की अपेक्षा चीन की सब्जी मंडी ज्यादा व्यवस्थित है. यहां गंदगी बहुत कम मिलेगी. लोग बहुत तरीके से अपनी दुकान लगाते हैं. जब दुकान हटाई जाती है, तब भी बहुत करीने से ऐसा किया जाता है. अभिषेक ने एक और खास बात नोटिस की. जमीन पर बैठकर सब्जी बेचने वाले अधिकतर लोग बुजुर्ग थे. उनका मानना था कि चीन में जवान लोग यह काम नहीं करते हैं. वहां भी सब्जियों पर पानी डाला जाता है ताकि वे फ्रेश रहें और दिखें.
अभिषेक एक पिकअप के पास जाते हैं, जिस पर सेब बेचे जा रहे थे. उस पर बोर्ड लगाकर कीमत लिखी थी कि यहां 10 युआन में 10 सेब मिलते हैं. यानी लगभग 140 रुपए में 10 सेब. यहां क्यूआर कोड स्कैन करके पेमेंट की सुविधा थी. चूंकि यह एक छोटे शहर की सब्जी और फल मंडी थी, इसलिए यहां आसपास के गांवों के किसान अपना सामान बेचने आते हैं. यही वजह है कि बड़े शहरों की अपेक्षा यहां कीमत कम थी.
कुत्ते से कबूतर तक, हर तरह का मांस
इस मंडी में संतरे से लेकर गन्ने तक बेचे जा रहे थे. गन्ने को बेचने वाला ही छीलकर छोटे-छोटे टुकड़े करके ग्राहकों को बेच रहा था. हालांकि, यहां की मंडी में आप भारत की तरह मोलभाव नहीं कर सकते. अभिषेक ने वीडियो में कहा, "आप इंडिया में बोल देते हो ना भाई 50 का किलो है, तो 20 लगा लो या 30 लगा लो. चाइना में कोई मोलभाव नहीं होता. यहां प्राइसेस फिक्स हैं. अगर दुकानदार आगे से खुद से दाम कम कर दे, तो अलग बात है." उन्होंने यह भी बताया कि इस मंडी में लगभग हर सब्जी और फ्रूट एकदम फ्रेश थे. यहां लोगों को अपनी जरूरत के बाकी सामान भी मिलते हैं, जैसे खास तरह की अलग-अलग ब्रेड या टोफू.
यहां कबूतर से लेकर कुत्ते तक लटकाकर मांस के लिए बेचे जा रहे थे. यहां भी रूस की तरह सूखी हुई मछली खाने और बेचने का चलन है. मंडी के जिस हिस्से में अलग-अलग जानवरों के मांस बेचे जा रहे थे, उधर जाकर अभिषेक को उल्टी-सी आने लगी. इसकी सबसे बड़ी वजह थी कि वह वेजिटेरियन हैं. उन्होंने कहा, "चाइना का भाई, खाना मैंने आपको बहुत बार दिखा दिया है. बहुत ज्यादा अजीब है. कुछ भी खा जाते हैं. मतलब पानी में चलने से लेकर हवा में उड़ने तक कुछ भी नहीं छोड़ा जाता."
जब इंग्लिश बोलने वाले स्टूडेंट ने पूछ ली जाति
अभिषेक को मंडी में एक ऐसा चीनी युवक भी मिला, जो इंग्लिश बोल और समझ सकता था. वह लोकल यूनिवर्सिटी का छात्र था. अभिषेक ने उसे बताया कि वह भारत से हैं. साथ ही यह भी बताया कि वह हिंदू हैं. उस युवक का नाम मार्टिन था. अभिषेक ने उससे मजाक-मजाक में कहा कि "भविष्य में, मैं एक चीनी लड़की से शादी करूंगा. पहले मुझे एक चीनी गर्लफ्रेंड ढूंढनी होगी. हो सकता है कि ट्रैवल के दौरान मुझे अपना प्यार मिल जाए. शायद बाजार में या शहर में. क्या पता प्यार हो जाए, उससे शादी हो जाए और मैं चीनी भाषा सीखकर चीन में ही बस जाऊं."
बाद में मार्टिन फोन पर ट्रांसलेटर में ब्राह्मण लिखकर लेकर आया और अभिषेक से जानना चाहा कि क्या उनकी जाति ब्राह्मण है. इस पर अभिषेक ने उन्हें बताया कि नहीं, मैं ब्राह्मण नहीं हूं. फिर मार्टिन ने बताया कि चीन में कोई जाति व्यवस्था नहीं है. वहां धर्म है भी, तो किसी को उसे मानने के लिए बाध्य नहीं किया जाता. अगर चाहें तो आप धर्म मान सकते हैं और न चाहें, तो आप बिना किसी धर्म के रह सकते हैं.
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