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मदीना पहुंचने से पहले भारतीय IT इंजीनियर की मौत, दो बेटे-एक बेटी और बुआ अस्पताल में

हैदराबाद के रहने वाले यूसुफ के साथ जो हुआ, उसका गुनहगार कौन है? आखिर उनका गुनाह क्या था? वो तो अपने परिवार के साथ उमराह के लिए जा रहे थे. फिर क्यों गई उनकी जान?

मदीना पहुंचने से पहले भारतीय IT इंजीनियर की मौत, दो बेटे-एक बेटी और बुआ अस्पताल में
मोहम्मद यूसुफ अली की सारी खुशियां चंद सेकेंडों में खत्म हो गईं. (फोटो-अरब न्यूज)
  • रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए मिसाइल हमले में मोहम्मद यूसुफ अली समेत तेरह लोग मारे गए थे
  • यूसुफ अली और उनके बड़े बेटे जूस खरीदने गए थे, तभी मिसाइल गिरने से दोनों गंभीर रूप से घायल हुए थे
  • हमले में यूसुफ का एक पैर कट गया और अगले दिन उनकी अस्पताल में मौत हो गई थी

मोहम्मद यूसुफ अली और उनके बड़े बेटे जूस खरीदने गए थे, जबकि परिवार के बाकी सदस्य मदीना जाने वाली अपनी फ्लाइट का इंतजार कर रहे थे. वे अभी कुछ सौ मीटर ही दूर गए थे कि तभी एक मिसाइल वहां आ गिरी, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गए. दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां पिता की हालत बहुत गंभीर थी. उनके चचेरे भाई और पड़ोसी, मोहम्मद अकबर हाशमी ने 'अरब न्यूज' को बताया, "यूसुफ की मौत हो गई. उनका एक पैर पूरी तरह कट गया था और दूसरे दिन उनकी जान चली गई."

कब हुआ ये हादसा

अरब न्यूज के अनुसार, 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में मारे गए 13 लोगों में वे भी शामिल थे. इस हमले में 300 अन्य लोग घायल भी हुए. हैदराबाद के रहने वाले यूसुफ एक IT इंजीनियर थे, जो सऊदी अरब और भारत के बीच काम करते थे. इस बार जब वे घर आए थे, तो उन्होंने तय किया कि अगली यात्रा वे पूरे परिवार के साथ करेंगे. पिता, मां, दो बेटे, बेटी और बुआ - सभी उमराह के लिए जा रहे थे. यह उनकी एक साथ पहली उमराह यात्रा थी — एक ऐसी यात्रा जो बड़े बेटे के इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए परीक्षा पास करने की खुशी मनाने के लिए की गई थी.

परिवार के बाकी लोग कैसे हैं

हाशमी ने बताया, "उमराह की योजना तब बनाई गई थी जब उनके बड़े बेटे ने इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया था. यह अल्लाह के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका था. दोनों लड़के अभी भी अस्पताल में हैं. बेटी और बुआ को भी हल्की चोटें आई थीं, जिन्हें अब अस्पताल से छुट्टी मिल गई है. पत्नी ही अकेली ऐसी थीं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ी. हाशमी ने कहा, "उनकी हालत स्थिर है और वे अस्पताल में बच्चों की देखभाल कर रही हैं. बड़े बेटे के घुटनों की दोनों टोपियां (नी-कैप्स) बदलनी पड़ीं. साथ ही, उसके पेट का ऑपरेशन भी करना पड़ा, क्योंकि टूटे हुए कांच के टुकड़े पेट के अंदर चले गए थे और लिवर तक पहुंच गए थे."

वह अभी तीन और हफ्तों तक अस्पताल में रहेगा. उसे और उसके भाई-बहनों को पिता की मौत के बारे में बता दिया गया है. हाशमी ने कहा, "मैं पूरे परिवार के सदमे को शब्दों में बयां नहीं कर सकता... उन्होंने सब कुछ खो दिया है. सऊदी अरब पर हूतियों का यह हमला गलत है; यह पूरी तरह से गलत है. आम नागरिकों के हवाई अड्डे और मॉल को निशाना बनाना... इसका कोई औचित्य नहीं है."

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