विज्ञापन

इधर अमेरिका कर रहा हमले की बात, उधर ईरान पहुंचे पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की

ये बातचीत पाकिस्तान के प्रस्ताव और ईरान की सहमति से हुई, क्योंकि इस क्षेत्र के देश अब यह समझने लगे हैं कि सुरक्षा तभी सुनिश्चित की जा सकती है जब क्षेत्र के सभी देश आपस में सहयोग करें और इसमें भागीदारी निभाएं.

इधर अमेरिका कर रहा हमले की बात, उधर ईरान पहुंचे पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की
ईरान में बैठक करते चारों देश के प्रतिनिधि. (फोटो-सोशल मीडिया)
  • बैठक में अमेरिका और इजरायल की सैन्य आक्रामकता तथा फिलिस्तीन और लेबनान की मदद पर चर्चा हुई
  • ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस बातचीत को क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्रों पर सहयोग का व्यावहारिक कदम बताया
  • ईरानी राष्ट्रपति ने इस्लामी देशों से क्षेत्रीय एकता और एकजुटता बढ़ाने का आह्वान किया

अमेरिका से लगातार ईरान पर फिर हमले करने की आवाजें सुनाई दे रही हैं. इस बीच आज उसके सहयोगी देश पाकिस्तान-सऊदी अरब और तुर्की के प्रतिनिधि ईरान पहुंच गए. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये अमेरिकी मंशा से हो रहा है या ये तीनों देश अमेरिका के उलट कुछ नया गुल खिला रहे हैं.

ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को तेहरान में एक चार-पक्षीय बैठक की. इस बैठक में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के हालिया आक्रामक युद्ध के नतीजों के बीच, क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा की गई. सोमवार, 26 अक्टूबर को तेहरान में आयोजित इस बैठक में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और तुर्की के राष्ट्रीय खुफिया संगठन के प्रमुख इब्राहिम कलिन शामिल हुए.

क्या बात हुई चारों देशों में

तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, ये बातचीत पाकिस्तान के प्रस्ताव और ईरान की सहमति से हुई, क्योंकि इस क्षेत्र के देश अब यह समझने लगे हैं कि सुरक्षा तभी सुनिश्चित की जा सकती है जब क्षेत्र के सभी देश आपस में सहयोग करें और इसमें भागीदारी निभाएं. खबरों के अनुसार, चर्चाओं में क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की सैन्य आक्रामकता और उसके जारी रहने के परिणामों, तथा फिलिस्तीन और लेबनान के लोगों की मदद करने के प्रयासों पर बात हुई है.

ईरान कैसे देख रहा

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सोमवार को इस बैठक को साझा हितों पर आधारित क्षेत्रीय सुरक्षा स्थापित करने की दिशा में एक “व्यावहारिक कदम” बताया. एक साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि यह बातचीत क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्रों पर आगे के विचार-विमर्श और सहयोग का रास्ता खोल सकती है. बकाई ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले दो वर्षों की घटनाओं ने यह दिखा दिया है कि क्षेत्रीय देशों के बीच आपसी भरोसे के बिना इस क्षेत्र में टिकाऊ और भरोसेमंद सुरक्षा हासिल नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि स्थायी स्थिरता इन देशों की अपनी क्षमताओं, दृढ़ संकल्प और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर निर्भर करती है.

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सोमवार को तेहरान में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक में "क्षेत्रीय एकता" का आह्वान किया.राष्ट्रपति की वेबसाइट पर जारी एक बयान के अनुसार, पेज़ेशकियान ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि इस बैठक में महत्वपूर्ण और प्रभावशाली इस्लामी देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से क्षेत्रीय एकता और एकजुटता को और मजबूत करने में मदद मिलेगी." उन्होंने इस्लामी देशों से आग्रह किया कि वे "एक साथ खड़े हों और एक समन्वित रुख अपनाएं."

क्या अमेरिका की ये मर्जी

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये बैठक अमेरिका की मर्जी से हो रही है. और अगर ये बैठक अमेरिका की मर्जी से नहीं हो रही तो ये तीनों देश क्या करने वाले हैं. मगर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंशा को समझें तो वो मिडिल ईस्ट में नये समीकरण बनाने पर काम कर रहे हैं. अब तक खाड़ी दो ताकतों के बीच बंटा हुआ था. एक तरफ सऊदी अरब समर्थक देश थे तो दूसरी तरफ ईरान समर्थक देश. हालांकि, दोनों के निशाने पर इजरायल था. मगर, सऊदी अरब वाला गठबंधन सिर्फ वैचारिक रूप से इजरायल की खिलाफत करता है जबकि ईरान वाला गठबंधन हूती और हमास के जरिए सैन्य तरीके से भी खिलाफत करता है. ट्रंप की मंशा है कि खाड़ी के सभी देश इजरायल को मान्यता दे दें और इस पूरी टकराहट को खत्म कर दें. 

क्या आ सकती है एकता

ईरान लगातार अमेरिका से समझौता करने की बात कर रहा है. पर्दे के पीछे बात भी चल रही है, लेकिन किसी मुकाम पर नहीं पहुंची है. ईरान से इजरायल और परमाणु हथियारों पर अमेरिका की बात चल ही रही है. वहीं सऊदी पर हूतियों ने लगातार हमले करके उसे भी दबाव में ला दिया है. अमेरिका इस मामले में अब तक बीच में नहीं पड़ा है. ऐसे में सऊदी को भी ईरान से बातचीत के लिए मेज पर आना पड़ा है. मगर इन सब के बावजूद ऐसी कल्पना करना फिलहाल बहुत मुश्किल है कि ईरान-सऊदी-इजरायल के संबंध पटरी पर आ जाएंगे. या ये भी हो सकता है कि इन तीनों देशों का यहां पहुंचने का मुद्दा सिर्फ यमन हो. ऐसे में जब तक ये चारों देश किसी एक मत पर नहीं पहुंचते तब तक किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता.

यह भी पढ़ें-

BRICS मंच पर गूंजा मीनाब के बच्चों का दर्द, ईरानी सांसद ने 'स्कूल बैग' रखकर दी श्रद्धांजलि

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Iran, Pakistan, Saudi Arab, Turkey
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com